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    Home»धर्म आस्था»कौन थे शुक्राचार्य? दैत्य गुरु की ये बातें शायद ही जानते होंगे
    धर्म आस्था

    कौन थे शुक्राचार्य? दैत्य गुरु की ये बातें शायद ही जानते होंगे

    chhattisgarhrajya.inBy chhattisgarhrajya.inAugust 25, 2026
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    Shukracharya: अभिनेता अक्षय खन्ना इन दिनों पौराणिक फिल्म ‘महाकाली’ में शुक्राचार्य की भूमिका को लेकर चर्चा में हैं. फिल्म के हालिया ग्लिम्प्स में उनका किरदार दैत्यों के गुरु के रूप में नजर आया है. लेकिन पौराणिक ग्रंथों में शुक्राचार्य की पहचान केवल असुरों के गुरु के तौर पर नहीं है. वे महान विद्वान, नीति-ज्ञाता और संजीवनी विद्या के जानकार माने जाते हैं.

    कौन थे शुक्राचार्य?

    शुक्राचार्य को पुराणों और महाभारत की परंपरा में दैत्यों या असुरों का गुरु बताया गया है. उन्हें शुक्र, उशनस् और काव्य जैसे नामों से भी जाना जाता है. महाभारत संबंधी स्रोतों में उन्हें महर्षि भृगु का पुत्र और देवयानी का पिता बताया गया है. वे देवताओं के गुरु बृहस्पति के समकक्ष माने जाते हैं.

    संजीवनी विद्या के थे जानकार

    शुक्राचार्य की सबसे चर्चित विशेषता संजीवनी विद्या थी. महाभारत के आदिपर्व में वर्णन मिलता है कि युद्ध में मारे गए दानवों को शुक्र अपने ज्ञान के बल पर पुनर्जीवित कर देते थे. यही कारण था कि देवता इस विद्या को लेकर चिंतित थे. बाद में बृहस्पति के पुत्र कच को शुक्राचार्य के पास यह विद्या सीखने के लिए भेजा गया.

    राजा बलि और वामन अवतार से संबंध

    शुक्राचार्य का संबंध भगवान विष्णु के वामन अवतार की प्रसिद्ध कथा से भी जुड़ा है. जब वामन रूप में भगवान विष्णु ने राजा महाबली से तीन पग भूमि मांगी, तो शुक्राचार्य ने उन्हें सावधान किया. उन्होंने दान की प्रक्रिया रोकने का प्रयास किया, लेकिन वामन ने कमंडल की नली में छिपे शुक्राचार्य को पहचान लिया. कथा के अनुसार, इसी घटना में उनकी एक आंख घायल हुई और उन्हें एकाक्ष भी कहा गया.

    केवल असुरों के गुरु नहीं थे

    शुक्राचार्य की छवि को केवल नकारात्मक रूप में देखना पौराणिक परंपराओं को सीमित कर देता है. वे विद्या, नीति और शास्त्रों के ज्ञाता माने जाते हैं. महाभारत में उनके ज्ञान और संजीवनी विद्या का उल्लेख मिलता है. इसी वजह से भारतीय धार्मिक परंपरा में शुक्राचार्य का चरित्र ज्ञान, रणनीति और गुरु-शिष्य परंपरा से भी जुड़ा दिखाई देता है.

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