ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजरायल की जंग में सऊदी और UAE भी कूदे, क्या और बढ़ेगा तनाव?

नई दिल्ली। ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजरायल की जंग के बाद से मिडिल ईस्ट में पिछले 25-26 दिनों से भीषड़ तनाव की स्थिति बनी हुई है। अब कुछ रिपोर्ट ऐसी आई हैं कि इस जंग में शामिल होने के सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात कुछ कदम उठाए हैं।
वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट के अनुसार, सऊदी अरब ने अमेरिकी सेना को किंग फहद एयर बेस तक पहुंच देने पर सहमति जताई है। यह एक अहम बदलाव है, क्योंकि इससे पहले उसने कहा था कि उसकी जमीन का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ हमलों के लिए नहीं किया जाएगा।
यूएई ने भी उठाए कदम
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि यूएई ने ईरान से जुड़ी संपत्तियों के खिलाफ कार्रवाई की है, जिसके तहत ईरान के मालिकाना हक वाले एक अस्पताल और एक क्लब को बंद कर दिया गया है। इस कदम को तेहरान से जुड़े समर्थन नेटवर्क पर लगाम कसने की दिशा में उठाया गया कदम माना जा रहा है।
इसके अलावा, अखबार द्वारा दिखाए गए वीडियो में ऐसा प्रतीत होता है कि ईरान पर हुए हमलों में इस्तेमाल की गई मिसाइलें बहरीन से दागी गई थीं, जिससे यह संकेत मिलता है कि इस संघर्ष में क्षेत्रीय स्तर पर और भी व्यापक भागीदारी हो सकती है।
अमेरिका ने टिप्पणी करने से किया इनकार
हालांकि, अमेरिकी सेना ने इस बात पर कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया कि क्या उसे क्षेत्रीय सहयोगियों से मदद मिल रही है। वहीं, बाजारों ने इसको लेकर तुरंत प्रतिक्रिया दी और कच्चे तेल की कीमतें थोड़ी बढ़ गईं, जबकि अमेरिकी स्टॉक-इंडेक्स फ्यूचर्स ने अपनी पिछली बढ़त गंवा दी।
दरअसल, ईरान ने पड़ोसी देशों में मौजूद ठिकानों को निशाना बनाकर अमेरिका और इजरायल के हमलों का बदला लिया है। इजरायल के हालिया हमले में ईरान के एक गैस क्षेत्र को निशाना बनाया गया था, जिसके जवाब में तेहरान ने पूरे मिडिल ईस्ट में ऊर्जा से जुड़े बुनियादी ढांचों पर जवाबी हमले किए।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने इसके बाद इजरायल की आलोचना की। इजरायल ने बाद में कहा कि वह ऊर्जा से जुड़ी सुविधाओं को निशाना बनाने से बचेगा। ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि वह तेहरान के साथ “समझौते के अहम बिंदुओं” का हवाला देते हुए ईरान के ऊर्जा क्षेत्र पर हमला करने से पांच दिनों के लिए पीछे हट रहे हैं।



