बंगाल में SIR को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई…

नई दिल्ली/कोलकाता: पश्चिम बंगाल में एसआईआर को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की पीठ ने सुनवाई के दौरान पूछा कि पश्चिम बंगाल को छोड़कर अन्य राज्यों में SIR की प्रक्रिया सुचारु रूप से संपन्न हुई। क्या आपको इसका एहसास है? हमने न्यायिक अधिकारियों पर 45 दिनों के भीतर 16 लाख मामलों का निपटारा करने का दबाव डाला है। इस दौरान ममता बनर्जी की ओर से पेश वकील श्याम दीवान ने वोटिंग से 7 दिन पहले वोटर लिस्ट को फ्रीज करने का सुझाव दिया। अब इस मामले में 1 अप्रैल को सुनवाई होगी।
एसआईआर पर एक बार फिर सुनवाई
मंगलवार को पश्चिम बंगाल में एसआईआर पर एक बार फिर सुनवाई हुई। इस दौरान अधिवक्ता श्याम दीवान ने जूडिशियल अफसरों के लंबित मामलों का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि हर कोई चाहता है कि यह प्रक्रिया जल्द पूरी हो। 23 मार्च तकविचाराधीन मामलों की कुल संख्या 60 लाख थी। 23 मार्च को पहली सप्लिमेंट्री लिस्ट प्रकाशित की गई, जिसमें निपटाए गए 27 लाख मामले शामिल थे।
पूरी सप्लिमेंट्री वोटर लिस्ट प्रकाशित नहीं
उन्होंने कहा कि चुनाव कार्यक्रम को देखते हुए इन मामलों का निपटारा आसान नहीं है, इसलिए कोर्ट वोटिंग की तारीख से सात दिन पहले वोटर लिस्ट को ‘फ्रीज़’ (स्थगित) करने पर विचार कर सकता है। इस दौरान सीनियर एडवोकेट कल्याण बनर्जी ने बताया कि अभी पूरी सप्लिमेंट्री वोटर लिस्ट प्रकाशित नहीं हुई है। राजनीतिक पार्टियों को इसकी एक सॉफ्ट कॉपी दी जा सकती है। इस पर भी विचार किया जा सकता है। कोर्ट ने कहा कि यह लॉजिस्टिकल मुद्दा है। इस बारे में 5-6 राजनीतिक पार्टियां एडजुडिकेटिंग ऑफिसर से अनुरोध कर सकती हैं।
पिछली बार क्या हुआ था?
बता दें कि 11 मार्च को पश्चिम बंगाल SIR की पिछली सुनवाई में नामों से जुड़े जूडिशियल फैसलों के खिलाफ अपील का मुद्दा उठाया गया था, तब सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाई कोर्ट को अपील ट्रिब्यूनल बनाने के निर्देश दिए थे। ट्रिब्यूनल में कौन होगा, इसका अधिकार भी हाई कोर्ट को दिया गया था।



