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    Home»राष्ट्रीय»सिम-बाइंडिंग के लिए बढ़ सकती है टाइमलाइन, तकनीकी बाधाओं के चलते दूरसंचार विभाग ले सकता है निर्णय
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    सिम-बाइंडिंग के लिए बढ़ सकती है टाइमलाइन, तकनीकी बाधाओं के चलते दूरसंचार विभाग ले सकता है निर्णय

    chhattisgarhrajya.inBy chhattisgarhrajya.inMarch 30, 2026
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    भारत सरकार के दूरसंचार विभाग (DoT) ने मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स के लिए सिम-बाइंडिंग नियमों के अनुपालन की टाइमलाइन बढ़ाने का संकेत दिया है। दूरसंचार विभाग (DoT) अब व्हाट्सऐप (WhatsApp), टेलीग्राम (Telegram), सिग्नल, शेयरचैट और अरट्टई जैसे प्लेटफॉर्म्स को दिसंबर 2026 के एन्ड तक इस निर्देश का पालन करने का समय मिल सकता है। कंपनियों ने तकनीकी चुनौतियों का हवाला देते हुए एक्स्ट्रा टाइम की मांग की थी।

    क्या है सिम-बाइंडिंग नियम?

    नवंबर 2025 में जारी निर्देशों के अनुसार, सभी ऐसे ऐप-आधारित संचार प्लेटफॉर्म जो यूजर की पहचान के लिए मोबाइल नंबर का उपयोग करते हैं, उन्हें अपनी सेवाओं को यूजर के डिवाइस में मौजूद सक्रिय सिम कार्ड से लिंक करना होगा। इसका मुख्य बिना सक्रिय सिम के ऐप के इस्तेमाल को रोकना और दूरसंचार पहचान के दुरुपयोग पर अंकुश लगाना है। खासकर उन साइबर फ्रॉड मामलों में, जो विदेशों से संचालित होते हैं।

    DoT के निर्देशों में यह भी शामिल है कि वेब वर्जन को हर 6 घंटे में ऑटो-लॉगआउट किया जाए। दोबारा लॉगिन के लिए QR कोड आधारित री-ऑथेंटिकेशन अनिवार्य हो। यह कदम यूज़र सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए उठाया गया है।

    क्यों बढ़ानी पड़ी टाइमलाइन?

    सरकारी अधिकारियों के मुताबिक, कंपनियों को इस नियम को लागू करने में कई तकनीकी बाधाओं का सामना करना पड़ा। ऑपरेटिंग सिस्टम अपडेट की जटिलताएं, मल्टी-डिवाइस सपोर्ट में बदलाव, ऐप आर्किटेक्चर में बड़े स्तर पर संशोधन खासतौर पर iOS प्लेटफॉर्म पर चुनौतियां अधिक बताई गई हैं, जहां एप्पल इस दिशा में काम कर रहा है। वहीं, एंड्रॉयड पर अनुपालन अपेक्षाकृत जल्दी संभव माना जा रहा है।

    पहले क्या थी डेडलाइन?

    पहले इसका टाइम फरवरी 2026 तय की गई थी, जिसमें लगभग 90 दिनों के अंदर काम पूरा करना था। इसके बाद कंप्लायंस रिपोर्ट 120 दिनों के अंदर जमा करनी थी। हालांकि, कार्य की प्रगति अपेक्षित गति से नहीं हो सकी, जिसके कारण मार्च 2026 तक का संशोधित अनुमान लगाया गया। फिर भी कई कंपनियां इन निर्धारित समयसीमाओं को पूरा नहीं कर पाईं, इसलिए अब इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए समयसीमा बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है। इसी क्रम में संभावित नई डेडलाइन दिसंबर 2026 निर्धारित की जा सकती है।

    कंपनियों का रुख

    मेटा (व्हाट्सऐप की पैरेंट कंपनी) के सूत्रों के अनुसार एंड्रॉयड पर सिम-बाइंडिंग फीचर फिलहाल बीटा टेस्टिंग में है, कंपनी सरकार के साथ मिलकर तकनीकी समाधान तलाश रही है, वहीं, Zoho द्वारा विकसित अरट्टई के प्रोडक्ट हेड ने कहा, DoT के साथ मिलकर समाधान विकसित किया जा रहा है। अब यूजर एक्सपीरियंस को प्रभावित किए बिना बदलाव लागू किए जाएंगे।

    इंडस्ट्री में क्यों है असहमति?

    कई प्लेटफॉर्म्स ने इस नियम को लेकर चिंता जताई है, खासकर इसके मल्टी-डिवाइस और वेब लॉगिन पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर। उनका मानना है कि इसे लागू करने के लिए ऐप की संरचना में बड़े स्तर पर बदलाव करने होंगे, जो तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण हो सकता है। साथ ही, इस प्रक्रिया में ऑपरेटिंग सिस्टम कंपनियों के साथ गहरे समन्वय की भी आवश्यकता होगी। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि साइबर फ्रॉड को रोकने के लिए यह कदम महत्वपूर्ण है, लेकिन इसे प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए एक व्यापक और संतुलित दृष्टिकोण अपनाना बेहद जरूरी होगा।

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