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    Home»छत्तीसगढ़»वेदांता प्लांट हादसे में पुलिस की कार्रवाई, कंपनी प्रबंधन समेत 10 पे FIR दर्ज
    छत्तीसगढ़

    वेदांता प्लांट हादसे में पुलिस की कार्रवाई, कंपनी प्रबंधन समेत 10 पे FIR दर्ज

    chhattisgarhrajya.inBy chhattisgarhrajya.inApril 17, 2026
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    छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले में स्थित Vedanta Limited के पावर प्लांट में हुआ भीषण बॉयलर हादसा अब कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई के केंद्र में आ गया है। इस दर्दनाक घटना में अब तक 20 मजदूरों की मौत हो चुकी है, जबकि 36 लोग गंभीर रूप से झुलस गए। इनमें से 16 घायलों का विभिन्न अस्पतालों में इलाज जारी है। मृतकों में छत्तीसगढ़ के अलावा उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल के श्रमिक शामिल हैं, जो रोज़ी-रोटी के लिए यहां काम कर रहे थे।

    FIR में बड़े नाम शामिल

    घटना के बाद पुलिस ने सख्त रुख अपनाते हुए डभरा थाने में कंपनी प्रबंधन के खिलाफ FIR दर्ज की है। इस FIR में कंपनी के चेयरमैन Anil Agarwal, प्लांट हेड देवेंद्र पटेल सहित 8 से 10 लोगों को आरोपी बनाया गया है। सक्ती के पुलिस अधीक्षक प्रफुल्ल ठाकुर के अनुसार, शुरुआती जांच में प्रबंधन की गंभीर लापरवाही सामने आई है, जिसके आधार पर यह कार्रवाई की गई।

    क्या था हादसे का कारण?

    औद्योगिक सुरक्षा विभाग की जांच में सामने आया कि बॉयलर फर्नेस के अंदर अत्यधिक मात्रा में फ्यूल जमा हो गया था, जिससे अचानक अत्यधिक दबाव बना। यह दबाव 1 से 2 सेकेंड के भीतर खतरनाक स्तर तक पहुंच गया, जिससे बॉयलर के निचले हिस्से का पाइप अपनी स्थिति से हट गया और विस्फोट हो गया।
    FSL रिपोर्ट ने भी इस तकनीकी कारण की पुष्टि की है।

    जांच में यह भी पाया गया कि-

    • उत्पादन बढ़ाने की जल्दबाजी में बॉयलर का लोड तेजी से बढ़ाया गया
    • 350 मेगावाट से सीधे लगभग 590 मेगावाट तक लोड बढ़ाया गया
    • मशीनों के रखरखाव (मेंटेनेंस) में गंभीर लापरवाही बरती गई
    • चेतावनी संकेत मिलने के बावजूद काम नहीं रोका गया
    • पीए फैन में लगातार खराबी के बावजूद संचालन जारी रखा गया

    इन सभी कारणों ने मिलकर इस बड़े हादसे को जन्म दिया।

    1-2 सेकेंड में बिगड़ी स्थिति

    14 अप्रैल को दोपहर 2:33 बजे यह हादसा हुआ, जब 2028 TPH क्षमता वाले वाटर ट्यूब बॉयलर में अचानक प्रेशर बढ़ा। इतनी तेज़ी से दबाव बढ़ा कि सिस्टम को बंद करने या किसी भी आपात नियंत्रण का समय ही नहीं मिला। परिणामस्वरूप अंदर विस्फोट हुआ और बाहरी पाइपलाइन भी इसकी चपेट में आ गई।

    जांच और प्रशासनिक कार्रवाई

    कलेक्टर अमृत विकास टोपनो ने मामले में मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दे दिए हैं और 30 दिनों के भीतर रिपोर्ट मांगी गई है। जांच में निम्न बिंदुओं पर फोकस किया जाएगा—

    • हादसा कब और कैसे हुआ
    • तकनीकी और मानवीय कारण क्या थे
    • जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारी कौन हैं
    • उस दिन ड्यूटी पर मौजूद मजदूरों की पूरी जानकारी
    • पहले के निरीक्षण में क्या खामियां सामने आई थीं
    • भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के उपाय

    नेताओं का दौरा और प्रतिक्रिया

    घटना के बाद राज्य के उद्योग मंत्री Lakhan Lal Devangan ने रायगढ़ पहुंचकर घायलों से मुलाकात की और उनके इलाज की जानकारी ली। वहीं नेता प्रतिपक्ष Charandas Mahant और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष Deepak Baij ने भी अस्पताल पहुंचकर पीड़ितों से मुलाकात की और सरकार व प्रबंधन पर सवाल उठाए।

    बड़ा सवाल: जिम्मेदारी किसकी?

    यह हादसा सिर्फ एक औद्योगिक दुर्घटना नहीं, बल्कि सिस्टम की विफलता का गंभीर उदाहरण बनकर सामने आया है। उत्पादन बढ़ाने की होड़, सुरक्षा मानकों की अनदेखी और समय पर चेतावनी के बावजूद कार्रवाई न होना—ये सभी पहलू अब जांच के दायरे में हैं। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि इस त्रासदी के लिए असल जिम्मेदार कौन है—प्रबंधन, तकनीकी टीम या निगरानी तंत्र। लेकिन फिलहाल, 20 परिवारों की जिंदगी हमेशा के लिए बदल चुकी है।

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