रायपुर, वरिष्ठ कर्मचारी नेता राज्य कर्मचारी संघ छत्तीसगढ़ के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष व भारतीय राज्य पेंशनर्स महासंघ छत्तीसगढ़ प्रदेश के प्रांताध्यक्ष वीरेन्द्र नामदेव ने छत्तीसगढ़ शासन सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा 21 अप्रैल 2026 को जारी आदेश को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि जिस आदेश में शासकीय सेवकों को राजनीतिक गतिविधियों एवं अन्य पदों से दूर रहने के नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने की बात कही गई थी, उसे एक दिन बाद ही स्थगित कर दिया गया।
नामदेव ने इसे प्रशासनिक अस्थिरता का उदाहरण बताते हुए पूछा कि आखिर ऐसा क्या कारण था कि सरकार को अपने ही आदेश से इतने कम समय में पीछे हटना पड़ा। उन्होंने कहा कि यह निर्णय न केवल कर्मचारियों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा करता है, बल्कि शासन की मंशा पर भी सवाल खड़े करता है।
उन्होंने यह भी कहा कि छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियमों के तहत स्पष्ट प्रावधान हैं कि कोई भी शासकीय सेवक:
– किसी राजनीतिक दल का सदस्य नहीं बन सकता
– किसी भी राजनीतिक गतिविधि में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से भाग नहीं ले सकता
– बिना अनुमति किसी अन्य संस्था या संगठन में पद धारण नहीं कर सकता
इसके बावजूद आदेश का स्थगन यह संकेत देता है कि कहीं न कहीं इन नियमों के पालन को लेकर गंभीरता की कमी है।
नामदेव ने सरकार से मांग की कि वह इस पूरे मामले में स्पष्ट स्थिति सामने लाए और बताए कि आदेश जारी करने और फिर स्थगित करने के पीछे क्या कारण हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ऐसे निर्णय बार-बार लिए जाते रहे तो इससे प्रशासनिक व्यवस्था की विश्वसनीयता प्रभावित होगी। उन्होंने अंत में कहा कि यदि सरकार वास्तव में अनुशासन बनाए रखना चाहती है, तो उसे अपने आदेशों पर दृढ़ता से अमल करना चाहिए, न कि उन्हें एक दिन में ही बदल देना चाहिए।



