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    लेख-आलेख

    पोषण निगरानी ऐप: कुपोषण के समाधान के लिए डेटा का उपयोग-प्रो. लिंडसे जैक्स

    chhattisgarhrajya.inBy chhattisgarhrajya.inApril 25, 2026
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    हममें से कई लोग अपने डॉक्टरों को इलेक्ट्रॉनिक स्वास्थ्य रिकॉर्ड में जानकारी दर्ज करते हुए देखते हैं। हम उम्मीद करते हैं कि ये डेटा समय के साथ हमारे स्वास्थ्य की निगरानी करने में मदद करेंगे, जोखिमों की शुरुआत में ही पहचान कर लेंगे और समय पर कार्रवाई को निर्देशित करेंगे। डिजिटल प्रणालियाँ केवल डेटा संग्रह के कारण ही नहीं, बल्कि जानकारी को निर्णय और बेहतर देखभाल में बदलने में मदद करने की वजह से सबसे बेहतर काम करती हैं।

    महिला और बाल विकास मंत्रालय द्वारा 2021 में लॉन्च किए जाने के बाद, पोषण निगरानी ऐप ने पोषण सेवा अदायगी डेटा को अधिक कार्रवाई-योग्य बनाने का प्रयास किया है। इसका उद्देश्य केवल डिजिटलीकरण करना नहीं, बल्कि बाल विकास और पोषण सेवाओं को दर्ज करने और समीक्षा करने में अधिक गंभीरता और निरंतरता लाना है।

    पोषण निगरानी में नियमित रूप से एकत्र किए गए वृद्धि डेटा को अंतिम सिरे पर खड़े व्यक्ति के लिए सार्थक निर्णयों में बदलने की क्षमता है। मासिक वृद्धि निगरानी—यदि सही ढंग से मापी जाए और लगातार रिकॉर्ड की जाए—तो जोखिम के शुरुआती संकेत प्रदान कर सकती है। एक एकल, निरंतर मौजूद इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड, वृद्धि रुझानों को पूरक पोषण उपायों से जोड़ने में मदद कर सकता है, जैसे घर ले जाने वाला राशन, देखभाल करने वालों का परामर्श और गंभीर कुपोषण से पीड़ित बच्चों को स्वास्थ्य केंद्रों में रेफर करना आदि।

    इस दिशा में आगे बढ़ने के लिए, हमें डैशबोर्ड से निर्णय की ओर और गणना से देखभाल की ओर बदलाव करने की आवश्यकता है। अंतर्निहित संकेत, सरल चेकलिस्ट और चेतावनी; आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को कमजोर या गंभीर कुपोषण के शिकार बच्चों के लिए बाद की कार्रवाई करने में मदद कर सकती है। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय तथा आरसीएच 2.0 पोर्टल के डेटा के साथ एकीकरण, समन्वय की साथ की गयी घर की यात्रा के जरिये रेफरल फॉलो-अप को और भी मजबूत कर सकता है।

    वर्तमान में, एकत्रित वृद्धि डेटा एक महत्वपूर्ण शुरुआती बिंदु प्रदान करता है। मापन प्रथाओं और प्रणाली समर्थन में सुधारों के साथ, यह समय पर निर्णय लेने में भरोसेमंद जानकारी प्रदान कर सकता है। सटीक निर्णय मूलभूत चीज़ों को ठीक करने पर निर्भर करते हैं—भरोसेमंद मापन, सही तकनीकें और कार्यात्मक उपकरण। यदि किसी बच्चे की ऊँचाई या वजन एक महीने में असामान्य रूप से बदलता है, तो प्रणाली को सत्यापन या पुनः मापन का संकेत देना चाहिए। ऐप में शामिल छोटे माइक्रो-वीडियो देखभाल के स्थल पर वजन पैमाने और लंबाई बोर्ड के सही उपयोग को सुदृढ़ कर सकते हैं। समान रूप से महत्वपूर्ण यह सुनिश्चित करना भी है कि प्रत्येक आंगनवाड़ी केंद्र में माप-संकेत वाले और कार्यात्मक उपकरण मौजूद हों। ये मूलभूत बातें वृद्धि निगरानी डेटा की उपयोगिता को मजबूत करने के लिए आवश्यक हैं।

    पोषण निगरानी डेटा का विश्लेषण डैशबोर्ड से निर्णय लेने की प्रक्रिया में बदलाव का भी समर्थन कर सकता है। सबसे पहले, हमें पता होना चाहिए कि कुपोषण की सबसे अधिक संभावना कब होती है—किस उम्र में और वर्ष के किन महीनों में। क्या यह जन्म के समय होता है? या क्या 0 से 3 महीने या 3 से 6 महीने महत्वपूर्ण हैं, जब माताओं को केवल स्तनपान कराने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है? या यह 6 महीने से 1 साल के दौरान होता है, जब पर्याप्त, उचित और सुरक्षित पूरक आहार की आवश्यकता होती है?

    पोषण निगरानी डेटा के विश्लेषण से हमें उन बच्चों के बारे में और ज़्यादा जानने में भी मदद मिल सकती है जो कुपोषण से ठीक हो जाते हैं। क्या कुछ खास ज़िलों के बच्चों में ठीक होने की संभावना ज़्यादा होती है? क्या खरीफ फसल की कटाई वाले महीनों के दौरान बच्चों के ठीक होने की संभावना अधिक होती है? इसी तरह, ऐसे विश्लेषण हमें उन बच्चों के बारे में और भी बहुत कुछ बता सकते हैं जो अपने पूरे बचपन के दौरान बार-बार या लगातार कुपोषण का शिकार होते रहते हैं। क्या ये वे बच्चे हैं, जो जन्म के समय से ही कुपोषण के शिकार थे और बाद में भी पूरी तरह से ठीक नहीं हो पाए? क्या ये वे बच्चे हैं, जिन्हें घर ले जाने वाला राशन नियमित रूप से नहीं मिल रहा है? इस तरह की जानकारी होने पर, स्थानीय स्तर पर पोषण सेवा अदायगी को बेहतर बनाया जा सकता है।

    डेटा पर भरोसा बढ़ाना, अग्रिम पंक्ति के कार्यकर्ताओं के कार्यभार में कमी लाने के लिए भी महत्वपूर्ण होगा। प्रणाली में विश्वास बढ़ने के साथ, अधिक आंगनवाड़ी कार्यकर्ता प्राथमिक रिकॉर्ड के रूप में ऐप का उपयोग करने की शुरुआत कर रहे हैं। हालांकि, कई जगहों पर, संचार-संपर्क की समस्याओं या अनुपालन आवश्यकताओं के कारण डिजिटल प्रविष्टि के साथ-साथ कागजी रजिस्टर भी रखे जाते हैं। ऑफ़लाइन कार्यक्षमता को मजबूत करना, डेटा की विश्वसनीयता में सुधार करना और डिजिटल-प्रथम कार्यप्रवाह पर स्पष्टता प्रदान करना, सेवा स्थल पर डेटा प्रविष्टि की ओर बदलाव को गति देने और दोहरी रिपोर्टिंग की आवश्यकता को कम करने में मदद कर सकता है। प्रणाली को परिष्कृत करने में अग्रिम पंक्ति के कार्यकर्ताओं को शामिल करने से यह सुनिश्चित करने में मदद मिल सकती है कि ऐप उनके काम में सहायक हो।

    पोषण निगरानी ऐप समय पर और सोच-समझकर फ़ैसले लेने में मदद करने वाला एक भरोसेमंद उपकरण है। इसकी असली ताकत जोखिम की जल्द पहचान करने, तेज़ी से बाद की कार्रवाई करने और पोषण सेवाओं के बेहतर तालमेल को सक्षम बनाने में है। आखिरी छोर की ज़मीनी हकीकतों को ध्यान में रखकर बनाया गया और डेटा की गुणवत्ता व इसके इस्तेमाल में हुए लगातार सुधारों से और मज़बूत बनाया गया पोषण निगरानी ऐप, सिर्फ़ एक निगरानी उपकरण ही नहीं, बल्कि पोषण सेवा अदायगी को मज़बूत बनाने का एक सार्थक उपाय भी है।


    (लेखिका एडिनबर्ग विश्वविद्यालय में वैश्विक स्वास्थ्य और पोषण की प्रोफेसर हैं।)

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