Petrol-Diesel Rate, पांच राज्यों के चुनाव खत्म हो गए हैं, लेकिन लोगों को राहत देने वाली कोई खबर फिलहाल नहीं आई है। 30 अप्रैल की सुबह 6 बजे सरकारी तेल कंपनियों, Indian Oil Corporation, Hindustan Petroleum और Bharat Petroleum ने पेट्रोल और डीजल के ताजा रेट जारी किए। अच्छी बात ये है कि कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ, लेकिन असली चिंता कहीं और है। असली दबाव कच्चे तेल के बाजार में दिख रहा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव का असर साफ दिख रहा है। ब्रेंट क्रूड 119 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुका है, जबकि WTI करीब 106 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा है। कुछ समय पहले तक यही कीमतें करीब 70 डॉलर के आसपास थीं। पेट्रोल-डीजल रेट की बात करें तो दिल्ली में आज भी पेट्रोल 94.77 रुपये और डीजल 87.67 रुपये प्रति लीटर पर मिल रहा है।
चुनाव बाद दाम बढ़ने की फैली थी अफवाह
सरकार ने पहले ही साफ कर दिया था कि चुनाव खत्म होते ही पेट्रोल-डीजल महंगा होने की जो अटकलें लगाई जा रही हैं, उनमें कोई सच्चाई नहीं है। अब तक हालात भी वैसे ही दिख रहे हैं, कम से कम फिलहाल तो कीमतें जस की तस बनी हुई हैं। इस बीच सोशल मीडिया पर एक और खबर तेजी से वायरल हुई थी। दावा किया गया था कि सरकार ने पेट्रोल पर 10 रूपये और डीजल पर 12.50 रूपये की बढ़ोतरी कर दी है। लेकिन Press Information Bureau ने इसे पूरी तरह फर्जी बताया और कहा कि ऐसा कोई आदेश जारी नहीं हुआ है।
कहां-कितना है रेट?
अगर देश के अलग-अलग हिस्सों की बात करें, तो कुछ शहरों में पेट्रोल-डीजल अभी भी अपेक्षाकृत सस्ता मिल रहा है। अंडमान-निकोबार के पोर्ट ब्लेयर में पेट्रोल करीब 82 रुपये के आसपास है, जो देश में सबसे कम है। वहीं अरुणाचल प्रदेश, उत्तराखंड और हिमाचल के कई शहरों में भी कीमतें दिल्ली से कम हैं। डीजल की बात करें तो जम्मू-कश्मीर और चंडीगढ़ जैसे इलाकों में यह अपेक्षाकृत सस्ता है। इन जगहों पर दाम 80 से 82 रुपये प्रति लीटर के बीच बने हुए हैं।
पड़ोसी देशों के क्या हैं हाल?
हालांकि, पड़ोसी देशों की स्थिति इससे कहीं ज्यादा गंभीर है। पाकिस्तान, श्रीलंका, नेपाल और चीन जैसे देशों में पेट्रोल की कीमतें भारत से काफी ऊपर पहुंच चुकी हैं। कई जगह तो यह 130-140 रुपये प्रति लीटर के पार जा चुका है। कुल मिलाकर, भारत में फिलहाल राहत जरूर है, लेकिन कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें आने वाले समय में दबाव बना सकती हैं। अगर अंतरराष्ट्रीय हालात ऐसे ही बने रहे, तो आगे चलकर इसका असर आम लोगों की जेब पर भी पड़ सकता है।

