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    Home»लेख-आलेख»ऊर्जा संकट : क्या होगा पैट्रोल में इथेनॉल मिलाने से?
    लेख-आलेख

    ऊर्जा संकट : क्या होगा पैट्रोल में इथेनॉल मिलाने से?

    chhattisgarhrajya.inBy chhattisgarhrajya.inMay 1, 2026
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    पिछले कुछ दिनों से केंद्र सरकार ने पैट्रोल में इथेनॉल ब्लैंडिंग (मिश्रण) को 20 प्रतिशत (ई20) से अधिक बढ़ाने और फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों (एफ.एफ.वीस) को बढ़ावा देने के संकेत दिए हैं। पश्चिम एशिया संकट के कारण ऊर्जा आपूॢत बाधित होने के बीच यह कदम तेल आयात पर निर्भरता कम करने, विदेशी मुद्रा बचाने और स्वच्छ ईंधन को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से उठाया जा रहा है। पैट्रोलियम मंत्रालय की एक संयुक्त सचिव ने संकेत दिए कि सरकार जल्द ही ई85 (85 प्रतिशत इथेनॉल) से ई100 (100 प्रतिशत इथेनॉल) तक के वाहनों के टैस्टिंग नॉम्र्स अधिसूचित करने वाली है। ऑटोमेकर्स पहले से ही इसके प्रोटोटाइप तैयार कर चुके हैं। देखना यह होगा कि सरकार का यह फैसला आम आदमी की जेब, पर्यावरण और वाहनों पर क्या असर डालेगा।

    भारत ने 2025 में ई20 कार्यक्रम को पूरा कर लिया है। अप्रैल 2026 तक देशभर में ई20 पैट्रोल उपलब्ध है। अब सरकार ई85 या इससे ऊंचे मिश्रण की ओर आगे बढ़ रही है। फ्लेक्स-फ्यूल वाहन किसी भी अनुपात (ई20 से ई100 तक) में इथेनॉल चला सकते हैं। ब्राजील इसका सफल उदाहरण है, जहां एफ.एफ.वीस सालों से चल रहे हैं। भारत में यह कदम ऊर्जा सुरक्षा के लिए जरूरी है। सरकार का दावा है कि ई.बी.पी. कार्यक्रम से अब तक 4.5 करोड़ बैरल कच्चा तेल बचाया गया और 1.65 लाख करोड़ रुपए विदेशी मुद्रा की बचत हुई। 2014 से अब तक 69.8 मिलियन टन ष्टह्र2 उत्सर्जन कम हुआ। लेकिन क्या यह आम आदमी के लिए फायदेमंद है?

    दावा है कि इथेनॉल मिश्रण का सबसे बड़ा फायदा पर्यावरण को है। इथेनॉल नवीकरणीय स्रोत (गन्ना, मक्का, चावल) से बनता है। नीति आयोग के अनुसार, गन्ने से बने इथेनॉल से जी.एच.जी. उत्सर्जन 65 प्रतिशत और मक्के से 50 प्रतिशत कम होता है। टेलपाइप पर ष्टह्र, ॥ष्ट और पार्टिकुलेट मैटर (क्करू) कम निकलते हैं। ई20 से ष्टह्र2 में 6.8 प्रतिशत कमी आती है, जबकि ई85 या ई100 पर यह और ज्यादा। अध्ययनों से पता चलता है कि इथेनॉल ब्लैंड से वाहन प्रदूषण 20-30 प्रतिशत तक घट सकता है। वहीं इसके नुकसान भी हैं। गन्ना आधारित इथेनॉल पानी-गहन है। एक लीटर इथेनॉल बनाने में करीब 2860 लीटर पानी लगता है। भारत में गन्ना पहले से ही 70 प्रतिशत सिंचाई पानी का उपभोग करता है। इसके साथ ही भूमि उपयोग भी बढ़ेगा, मिट्टी की उर्वरता घट सकती है और कीटनाशकों का इस्तेमाल बढ़ेगा। दूसरी पीढ़ी (2जी) इथेनॉल (कृषि अपशेष से) पर जोर देने की जरूरत है, जो पर्यावरण के लिए बेहतर है। कुल मिलाकर, अगर नीति सतर्क रही तो पर्यावरणीय फायदा साफ है, कम आयात, कम प्रदूषण लेकिन पानी और भूमि प्रबंधन बिना तो नुकसान भी हो सकता है।

    उल्लेखनीय है कि इथेनॉल पैट्रोल से सस्ता है, इसलिए ब्लैंडेड पैट्रोल का प्रति लीटर दाम कम रहता है। सरकार ने ई20 के लिए कीमत कम रखने की सिफारिश की थी। लेकिन इथेनॉल का ऊर्जा घनत्व पैट्रोल से 30 प्रतिशत कम है, इसलिए इससे वाहन का माइलेज घटता है। नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, पुराने ई10 वाहनों में ई20 से 6-7 प्रतिशत (4-व्हीलर) या 3-4 प्रतिशत (2-व्हीलर) माइलेज गिरावट हो सकती है। मतलब, अगर आपकी कार 15 किलोमीटर प्रति लीटर की खपत करती है तो ई20 पर 14.1-14.5 किलोमीटर हो जाएगी।

    गौरतलब है कि आप ई85 या ई100 चुन सकते हैं, अगर वह सस्ता हो। भारत में अभी इंफ्रास्ट्रक्चर (अलग पंप) और कीमत निर्धारण स्पष्ट नहीं है। नए एफ.एफ.वी. थोड़े महंगे हो सकते हैं, हालांकि लंबे समय में इंसैंटिव से बचत हो सकती है। पुराने वाहन वाले उपभोक्ता (2012-2023 तक बने) का माइलेज नुकसान और संभवत: मेंटेनैंस खर्च बढ़ सकता है। कुल मिलाकर, जेब पर तुरंत असर नकारात्मक हो सकता है लेकिन अगर सरकार टैक्स छूट और सबसिडी दे तो दीर्घकाल में यह फायदेमंद साबित हो सकता है। 

    वाहनों की बात करें तो उनके लिए इसका असर मिश्रित है। अप्रैल 2023 से बने वाहन ई20 कंप्लायंट हैं, वे 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रित ईंधन से अपने वाहन आसानी से चला सकते हैं। अप्रैल 2025 से बने वाहन पूर्ण ई20 अनुकूलित हैं। लेकिन 2023 से पहले के वाहनों में रबर पाट्र्स, गैस्केट्स और प्लास्टिक पर इथेनॉल का बुरा असर हो सकता है। हालांकि, विशेषज्ञ कहते हैं कि यह मामूली है और सॢवसिंग में ठीक हो जाता है। ई20 से ऑक्टेन नंबर बढ़ता है (91 से 95 तक), इसलिए एक्सेलरेशन बेहतर हो सकता है।

    पुराने वाहनों में ई85़ ब्लैंड से समस्या ज्यादा हो सकती है। ARAI और SIAM अध्ययनों के अनुसार, सही ट्यूनिंग से परफॉर्मैंस बनी रहती है। कुल मिलाकर, नए वाहन खरीदने वालों के लिए यह अच्छी खबर है लेकिन पुराने वाहन वालों को काफी सावधानी बरतनी होगी। इसके साथ ही आम आदमी की जेब और पुराने वाहनों की सुरक्षा को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अगर नीति संतुलित रही, तो यह ‘विन-विन’ निर्णय साबित हो सकता है। वरना, माइलेज का नुकसान और महंगाई का बोझ आम आदमी पर पड़ेगा। इसलिए सरकार को हर पहलू पर गंभीरता से विचार करने के बाद ही किसी निर्णय पर पहुंचना चाहिए।-रजनीश कपूर

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