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    Home»छत्तीसगढ़»रासायनिक खरपतवार नाशकों का नियंत्रित और प्रभावी उपयोग किया जाए: डाॅ. नायक
    छत्तीसगढ़

    रासायनिक खरपतवार नाशकों का नियंत्रित और प्रभावी उपयोग किया जाए: डाॅ. नायक

    chhattisgarhrajya.inBy chhattisgarhrajya.inMay 12, 2026
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    कृषि विश्वविद्यालय में अखिल भारतीय खरपतवार प्रबंधन अनुसंधान परियोजना की तीन दिवसीय वार्षिक बैठक का शुभांरभ


    रायपुर- इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में आज यहां अखिल भारतीय समन्वित खरपतवार प्रबंधन अनुसंधान परियोजना” की 33वीं वार्षिक समीक्षा बैठक की शुरूआत हुई। इस तीन दिवसीय बैठक का उद्घाटन मुख्य अतिथि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली के उप महानिदेशक (NRM) डॉ. ए. के. नायक द्वारा किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल ने की। विशिष्ट अतिथि के रूप में राष्ट्रीय जैविक तनाव प्रबंधन संस्थान, (आईसीएआर) बरोंडा रायपुर के निदेशक डाॅ. पी. के. राय तथा डाॅ. राकेश कुमार सहायक महानिदेशक आईसीएआर नई दिल्ली मौजूद थे। यह परियोजना देश के विभिन्न कृषि विश्वविद्यालयों में फसलों में खरपतवार नियंत्रण पर अनुसंधान तथा नवीनतम तकनीकों के विकास एवं उनके किसानों के बीच प्रसार हेतु भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली द्वारा जबलपुर स्थित खरपतवार अनुसंधान निदेशालय के माध्यम से चलाई जा रही है।

    बैठक को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि डॉ. ए. के. नायक ने वैज्ञानिकों से खरपतवारों के रसायनिक नियंत्रण के बजाय समन्वित खरपतवार नियंत्रण को अपनाने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि रासायनिक खरपतवारनाशकों के हानिकाकरक प्रभावी को देखते हुए उन पर आधारित अनुसंधान को हतोत्साहित किया जाए। डाॅ. नायक ने प्राकृतिक एवं जैविक कृषि अपनाने पर जोर देते हुए विभिन्न लाभकारी सूक्ष्मजीवों, केंचुओं तथा कीट पतंगो पर खरपतवारनाशकों के दुष्प्रभाव का अध्ययन करने की सलाह दी। कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डाॅ. गिरीश चंदेल ने कहा कि रासायनिक खरपतवारनाशी यद्यपि खेतों में खरपतवारों के नियंत्रण करने में समर्थ है लेकिन ये पर्यावरण तथा पारिस्थितिकी तंत्र के लिए हानिकारक है अतः इनका नियंत्रित और प्रभावी उपयोग किया जाना चाहिए। खरपतवार नाशकों का अंधाधुंध उपयोग मानवों और जीव-जंतुओं के स्वास्थ्य तथा पर्यावरण के लिए नुकसानदायक है। उन्होंने कहा कि खरपतवारों के प्रबंधन के लिए केवल रसायनों पर निर्भर न रहकर यांत्रिक एवं बायोलाॅजिकल नियंत्रण विधियों को प्राथमिकता देनी चाहिए। समारोह को डाॅ. पी. के. राय तथा डाॅ. राकेश कुमार ने भी संबोधित किया।

    खरपतवार अनुसंधान निदेशालय, जबलपुर के प्रभारी डाॅ. विजय कुमार चैधरी, प्रमुख वैज्ञानिक ने अखिल भारतीय समन्वित खरपतवार प्रबंधन अनुसंधान परियोजना के तहत देशभर के सभी 17 केन्द्रों में संचालित गतिविधियों एवं उपलब्धियों की जानकारी प्रस्तुत की। इस अवसर पर परियोजना के वार्षिक प्रतिवेदन 2025-26 के साथ ही अन्य प्रकाशनों का विमोचन भी किया गया। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के सेवानिवृत्त प्राध्यापक डाॅ. एस.एस. कोल्हे को खरपतवार प्रबंधन अनुसंधान के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान हेतु लाइफटाइम अचिवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया गया। पंजाब कृषि विश्वविद्यालय लुधियाना को खरपतवार प्रबंधन हेतु आईसीएआर बेस्ट सेंटर अवार्ड से सम्मानित किया गया। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के संचालक अनुसंधान एवं बैठक के आयोजन सचिव डाॅ. वी.के. त्रिपाठी ने रायपुर केन्द्र में इस परियोजना के तहत किए जा रहे कार्यो एवं गतिविधियों की जानकारी दी। परियोजना के प्रमुख अन्वेषक डाॅ. श्रीकांत चितले ने अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

    उल्लेखनीय है कि इस समीक्षा बैठक में भारत भर के विभिन्न कृषि विश्वविद्यालयों में संचालित 17 प्रमुख केंद्रों, तथा 7 स्वयंसेवी केंद्रों में खरपतवार अनुसंधान में कार्यरत वैज्ञानिकों के अलावा राज्य कृषि विश्वविद्यालयों (SAUs) ICAR संस्थानों तथा हर्बीसाइड उद्योगों के लगभग 100 वैज्ञानिक शामिल हुए हैं। समीक्षा बैठक के दौरान वर्ष 2025-26 में किए गए अनुसंधान कार्यों एवं विस्तार गतिविधियों की प्रमुख उपलब्धियों की समीक्षा की जाएगी तथा आगामी दो वर्षों के लिए तकनीकी कार्यक्रम पर गहन विचार विमर्श करते हुए इसे अंतिम रूप दिया जाएगा। गौरतलब है कि खरपतवार नियंत्रण न करने या समय पर न किए जाने से फसल उत्पादन में लगभग 40 से 60 प्रतिशत तक कमी आती है। धान की सीधी बोनी में यह कमी कभी कभी 90 प्रतिशत तक बढ़ सकती है।

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