छत्तीसगढ़– सरगुजा जिले की सीतापुर सीट से भाजपा विधायक रामकुमार टोप्पो इन दिनों काफी चर्चा में हैं. कथित तौर पर नायब तहसीलदार से मारपीट के आरोप में घिरे विधायक टोप्पो कभी सेना के जवान रह चुके थे. वे गृह मंत्री अमित शाह की सुरक्षा करने वाली टीम का भी हिस्सा रह चुके हैं. महिलाओं की खून से लिखी गईं चिट्ठियां रामकुमार टोप्पो को राजनीति में ले आईं. आइए, अब जानते हैं कौन भाजपा विधायक राजमुकार टोप्पो और क्या है उनसे जुड़ा विवाद, जिसकी जमकर चर्चा हो रही है.
सबसे पहले जानिए क्या है पूरा विवाद?
भाजपा विधायक रामकुमार टोप्पो पर कथित तौर पर नायब तहसीलदार से मारपीट करने का आरोप है. मामले में पुलिस ने दोनों पक्षों की ओर से एफआईआर दर्ज कर ली है. इसी सिलसिले में शुक्रवार 29 मई को विधायक टोप्पो सरेंडर करने जा रहे थे, लेकिन उनके समर्थकों ने NH-43 पर चक्काजाम कर दिया और गाड़ी के आगे लेटकर विधायक को बीच रास्ते से वापस लौटा दिया. भाजपा विधायक ने इसे जनता का सम्मान बताते हुए आंदोलनरत कर्मचारियों से काम पर लौटने की अपील की है. लेकिन, यह मामला शांत होता नहीं लग रहा है. घटना के विरोध में कनिष्ठ प्रशासनिक सेवा संगठन और पीड़ित नायब तहसीलदार ने आईजी को ज्ञापन सौंपकर विधायक टोप्पो की गिरफ्तारी की मांग की है.
कौन हैं भाजपा विधायक रामकुमार टोप्पो?
रामकुमार टोप्पो सरगुजा जिले की सीतापुर (अनुसूचित जनजाति आरक्षित) विधानसभा सीट से भाजपा के विधायक हैं. उन्होंने साल 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं तत्कालीन मंत्री अमरजीत भगत को करीब लगभग 17,160 वोटों से हराकर बड़ी राजनीतिक जीत दर्ज की थी. इसी के साथ वह पहली बार विधायक बनकर संसद पहुंचे थे.
नेता बनने से पहले क्या थे विधायक टोप्पो?
भाजपा विधायक रामकुमार टोप्पो का जन्म साल 1992 में सरगुजा जिले सीतापुर में हुआ. उनके पिता का नाम गणेश राम है. उन्होंने रायपुर की मात्स यूनिवर्सिटी से बीए की डिग्री ली है. राजनीति में आने से पहले रामकुमार टोप्पो सेना में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने सीआरपीएफ की वैली क्विक एक्शन टीम में कमांडो के रूप में कार्य किया है, उन्हें बहादुरी के लिए सम्मानित भी किया जा चुका है. रामकुमार टोप्पो गृह मंत्री अमित शाह के सुरक्षा में भी तैनात रह चुके हैं.
कैसे रातनीति में आए रामकुमार टोप्पो?
बताया जाता है कि रामकुमार टोप्पो को 5000 से ज्यादा महिलाओं ने खून से चिट्ठी लिखकर विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए बुलाया था. हालांकि, आज तक इन चिट्ठियों का कोई विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया. इन चिट्ठियों के बाद ही उन्होंने राजनीति में आने का फैसला किया. पहली बार उन्होंने भाजपा की टिकट पर चुनाव सीतापुर विधानसभा सीट से 2023 में चुनाव लड़ा और विधायक बने. वर्तमान में वे आदिवासी समाज से जुड़े युवा नेता हैं, उन्हें भाजपा के उभरते जनजातीय चेहरों में से एक माना जाता है.

