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    Home»लेख-आलेख»पीएम स्वनिधि योजना: पथ विक्रेताओं के सशक्तिकरण और वित्तीय समावेशन की परिवर्तनकारी यात्रा
    लेख-आलेख

    पीएम स्वनिधि योजना: पथ विक्रेताओं के सशक्तिकरण और वित्तीय समावेशन की परिवर्तनकारी यात्रा

    chhattisgarhrajya.inBy chhattisgarhrajya.inJune 3, 2026
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    श्री मनोहर लाल

    भारत में शहरीकरण तीव्र गति से बढ़ रहा है। अनुमान है कि वर्ष 2050 तक देश की लगभग 50% आबादी शहरी क्षेत्रों में निवास करेगी। वर्तमान में शहरी कार्यबल का लगभग 66% हिस्सा अनौपचारिक क्षेत्र से जुड़ा है, जो शहरी अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है। इस अनौपचारिक क्षेत्र में पथ विक्रेताओं की भूमिका विशेष रूप से उल्लेखनीय है। फल, सब्ज़ियाँ, चाय, नाश्ता, कपड़े तथा दैनिक उपयोग की अन्य वस्तुएँ उपलब्ध कराने वाले ये लाखों विक्रेता न केवल करोड़ों नागरिकों के जीवन को सुगम बनाते हैं, बल्कि शहरी अर्थव्यवस्था को भी सशक्त करते हैं। इसके बावजूद, लंबे समय तक उनकी औपचारिक बैंकिंग और ऋण तक पहुँच सीमित रही। क्रेडिट हिस्ट्री के अभाव में उन्हें अक्सर ऊँची ब्याज दरों पर अनौपचारिक ऋण लेना पड़ता था, जिससे उनकी आय का बड़ा हिस्सा ऋण चुकाने में खर्च हो जाता था।
    भारतीय पथ विक्रेता बदलती वैश्विक परिस्थितियों और विभिन्न आर्थिक व्यवधानों के बीच भी अपनी दृढ़ता और संघर्षशीलता के लिए जाने जाते हैं। पीएम स्वनिधि ने उनकी इस उद्यमशीलता को नई ऊर्जा प्रदान की है। यह केवल ऋण उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं रही, बल्कि सम्मान, पहचान और नए अवसरों का एक सशक्त माध्यम बनी है।
    योजना की सफलता का प्रमुख आधार “Whole of Government Approach” रहा, जिसमें केंद्र, राज्य, शहरी स्थानीय निकायों और बैंकिंग संस्थानों के समन्वित प्रयासों ने इसे देशभर अभूतपूर्व रूप से पहुँचाया तथा उल्लेखनीय परिणाम प्राप्त किये।
    इस योजना के अंतर्गत लाखों विक्रेताओं के बैंक खाते सक्रिय हुए, उनका वित्तीय व्यवहार दर्ज होने लगा और पहली बार उनके लिए एक औपचारिक क्रेडिट हिस्ट्री का निर्माण हुआ। इससे भविष्य में और अधिक ऋण तथा वित्तीय सेवाओं तक उनकी पहुँच आसान हुई और वे आज बैंक के सम्मानित ग्राहक और उद्यमी के रूप में उभरे हैं।
    इस योजना का एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू डिजिटल सशक्तिकरण है। यूपीआई और क्यूआर-कोड आधारित भुगतान को बढ़ावा देने के लिए कैशबैक प्रोत्साहन की व्यवस्था की गई है। इस पहल ने अभी तक 55 लाख विक्रेताओं को डिजिटल अर्थव्यवस्था से जोड़ा, उनके लेन-देन को पारदर्शी बनाया और उनकी वित्तीय साख को मजबूत किया है।
    योजना की सोच केवल व्यवसाय तक सीमित नहीं रही। ‘स्वनिधि से समृद्धि’ पहल के माध्यम से लाभार्थियों और उनके परिवारों को भारत सरकार की आठ प्रमुख कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ा गया। अब तक 50 लाख से अधिक पथ विक्रेता परिवारों की प्रोफाइलिंग की जा चुकी है तथा इन योजनाओं के अंतर्गत 1.52 करोड़ से अधिक लाभ स्वीकृत किए जा चुके हैं। पेंशन, बीमा, स्वास्थ्य सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा जैसी सुविधाओं तक पहुँच प्रदान कर यह पहल पथ विक्रेताओं और उनके परिवारों के लिए एक व्यापक सामाजिक सुरक्षा तंत्र का माध्यम बनी है।
    इसके अतिरिक्त FSSAI के सहयोग से खाद्य सुरक्षा और स्वच्छता संबंधी प्रशिक्षण भी प्रदान किए गए हैं, जिससे विशेष रूप से स्ट्रीट फूड विक्रेताओं की गुणवत्ता, स्वच्छता और ग्राहक विश्वास में वृद्धि हुई है।
    महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में भी योजना का योगदान उल्लेखनीय रहा है। कुल लाभार्थियों में लगभग 46% महिलाएँ हैं। इससे उनकी आय, सामाजिक प्रतिष्ठा और पारिवारिक निर्णयों में भागीदारी बढ़ी है।
    वर्ष 2023 और 2025 में की गयी इंडिपेंडेंट इम्पैक्ट अस्सेस्मेंट्स ने भी योजना के दूरगामी प्रभावों की पुष्टि की है। लगभग 95% लाभार्थियों ने अपने जीवन में पहली बार औपचारिक वित्तीय प्रणाली से ऋण प्राप्त किया, जो वित्तीय समावेशन की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। इतना ही नहीं, बल्कि, लगभग 30% लाभार्थी पीएम स्वनिधि से आगे बढ़कर अन्य औपचारिक वित्तीय संस्थानों से भी ऋण प्राप्त करने में सफल हुए, जो उनके बढ़ते वित्तीय विश्वास और सुदृढ़ क्रेडिट प्रोफाइल का प्रमाण है।
    योजना के लाभार्थियों की आय में औसतन लगभग 20% वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई है। इसके साथ ही आवास, पोषण, स्वास्थ्य सेवाओं और बच्चों की शिक्षा जैसे क्षेत्रों में भी सुधार देखा गया है। वर्ष 2023 से 2025 के बीच यूपीआई आधारित लेन-देन का उपयोग लगभग 45% से बढ़कर 83% तक पहुँच गया है।
    योजना के व्यापक और सकारात्मक प्रभाव को देखते हुए अगस्त 2025 में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इसके पुनर्गठित स्वरूप को मार्च 2030 तक विस्तारित करने की स्वीकृति प्रदान की।
    पुनर्गठित योजना के अंतर्गत पथ विक्रेताओं के ऋण की सीमा में वृद्धि की गई है तथा योजना का दायरा शहरी स्थानीय निकायों से आगे बढ़ाकर Census Towns/Peri Urban तक विस्तारित किया गया है। इसके साथ ही, क्षमता निर्माण पर विशेष बल दिया जा रहा है, ताकि पथ विक्रेता बदलती आर्थिक आवश्यकताओं के अनुरूप अपने उद्यमों को और अधिक सशक्त बना सकें। इसी क्रम में स्वनिधि क्रेडिट कार्ड की शुरुआत भी एक महत्वपूर्ण कदम है। यह सुविधा पथ विक्रेताओं को उनकी तत्काल वित्तीय और व्यक्तिगत आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए अल्पकालिक ब्याज-मुक्त ऋण उपलब्ध कराती है।
    यद्यपि, पीएम स्वनिधि योजना ने सड़क विक्रेताओं को वित्तीय सशक्तिकरण प्रदान की है, फिर भी आज, कई जगह उन्हें शहर की नियोजन संरचना का हिस्सा नहीं माना जाता है। उन्हें सुनियोजित वेंडिंग स्थानों के अभाव जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। निश्चित स्थान न होने से उनकी आजीविका और ग्राहकों तक पहुँच प्रभावित होती है। इस चुनौती के समाधान हेतु आने वाले वर्षों में, राज्य सरकारों और शहरी स्थानीय निकायों के द्वारा पथ विक्रेताओं को शहरी नियोजन ढाँचे का अभिन्न हिस्सा बनाने का प्रयास किया जाना चाहिए। इस दिशा में एक छोटी सी पहल – स्ट्रीट फूड हब के माध्यम से उन्हें सुगम एवं व्यवस्थित व्यापारिक स्थान उपलब्ध कराए जाएंगे। इससे न केवल उनकी आजीविका अधिक सुदृढ़ होगी, बल्कि शहरों की स्वच्छता, सुव्यवस्था और समग्र शहरी वातावरण को भी बढ़ावा मिलेगा।
    यह योजना आत्मनिर्भर भारत और “वोकल फॉर लोकल” के संकल्प को जमीनी स्तर पर साकार करती है। पीएम स्वनिधि की सफलता इस बात का प्रमाण है कि समावेशी विकास का लाभ जमीनी स्तर तक पहुँच रहा है।
    पीएम स्वनिधि योजना ने पथ विक्रेताओं के लिए वित्तीय समावेशन और सामाजिक सुरक्षा का एक प्रभावी मॉडल प्रस्तुत किया है। मुझे विश्वास है कि आने वाले वर्षों में यह योजना लाखों विक्रेताओं की आजीविका को सशक्त बनाते हुए नई परिवर्तनकारी कहानियाँ रचेगी तथा विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
    (लेखक केंद्रीय आवासन और शहरी कार्य मंत्री हैं।)

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