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    Home»लेख-आलेख»चुनाव 2027: जीत के लिए सरगर्मियां शुरु, पर लोक भलाई का एजैंडा नहीं
    लेख-आलेख

    चुनाव 2027: जीत के लिए सरगर्मियां शुरु, पर लोक भलाई का एजैंडा नहीं

    chhattisgarhrajya.inBy chhattisgarhrajya.inJune 28, 2026
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    साल 2027 में होने जा रहे पंजाब विधानसभा चुनावों में जीत हासिल करने के लिए प्रांत के सभी राजनीतिक दलों ने सरगर्मियां शुरू कर दी हैं। एक तरफ ‘आप’, कांग्रेस, बसपा और अकाली दल के विभिन्न धड़े सत्ता पर कब्जा करने के लिए हर तरह के पापड़ बेल रहे हैं। दूसरी तरफ भाजपा भी ये चुनाव जीतने के लिए कई हैरान करने वाले, लेकिन संदेह से भरे पैंतरे अपना रही है। भाजपा, राजनीतिक अवसरवाद और दोहरे मानदंडों के मामले में भी कई नए कीर्तिमान स्थापित कर रही है। इसने सत्ता का डर दिखाकर और धन के लालच के अधीन दल-बदल के निंदनीय चलन को एक  ‘जायज राजनीतिक सिद्धांत’ बना दिया है। साथ ही विभिन्न डेरों के प्रमुखों को भी काबू कर लिया है, ताकि लोगों की धार्मिक आस्था को वोट के रूप में खरीदा जा सके।

    मनुवाद के इन सूत्रधारों के मनों में आजकल दलितों, विशेषकर वाल्मीकि भाईचारे के प्रति भी खासा ‘मोह’ जागा हुआ है। जबकि आम जीवन में संघ समर्थित भाजपाई, दलितों के साथ खान-पान के बर्तनों, जल स्रोतों और श्मशान घाटों की सांझ बनाने के भी सख्त खिलाफ  हैं। पंजाब के कम्युनिस्टों ने आर.एस.एस. की सांप्रदायिक-फासीवादी विचारधारा के खिलाफ  जन-चेतना तेज करने और वामपंथ की मजबूती के लिए सार्वजनिक गतिविधियां तेज कर दी हैं, ताकि भाजपा का पंजाब की सत्ता पर कब्जा करने का हर प्रयास असफल किया जा सके।

    पंजाब के चुनाव तब होने जा रहे हैं, जब संघ परिवार द्वारा मोदी सरकार के बीते 12 साल के निकम्मे कार्यकाल का जश्न मनाया जा रहा है। मोदी सरकार के कामकाज और बोल-वाणी में दिन-प्रतिदिन बेलगाम बढ़ रही डीजल-पैट्रोल और रसोई गैस की कीमतों, कृषि के लिए अत्यंत आवश्यक खाद की भारी किल्लत, रोजगार की तलाश में दर-दर भटक रहे करोड़ों युवाओं की आहत संवेदनाओं, दो वक्त की रोटी के साधन जुटाने की चिंताओं में दिन काट रहे गरीबों के प्रति न कोई फिक्र दिखाई देती है और न ही इन दुखों के उचित समाधान के लिए कोई सार्थक नीतिगत ढांचा तैयार करने की इच्छा नजर आती है। अमीरी-गरीबी की खतरनाक हद तक बढ़ती खाई और भारतीय मुद्रा की निरंतर गिरती कीमत निकट भविष्य में देश के लिए किसी बड़ी विपदा का कारण बन सकती है। साम्राज्यवाद निर्देशित नव-उदारवादी नीतिगत ढांचे का पिछलग्गू बनने और अमरीका, यूरोपीय संघ व दूसरे पूंजीवादी देशों के साथ असमान शर्तों के तहत किए जा रहे ‘विदेशी व्यापार समझौते’, भारत जैसे आर्थिक रूप से पिछड़े देश के लिए निश्चित रूप से घातक सिद्ध होंगे। 

    पंजाब,पानी की बढ़ती किल्लत और घटती गुणवत्ता, युवाओं में बढ़ती बेरोजगारी और नशे के रुझान, गैंगस्टरवाद, दिन-प्रतिदिन बढ़ते अपराधों और प्रदूषित हो रहे पर्यावरण के कारण लगातार गिरावट की ओर धंसता जा रहा है। राजनीतिक अवसरवाद और बढ़ते भ्रष्टाचार ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। सरकारें चला रहे आज के राजनेता और नौकरशाह सत्ता का आनंद लेने और भ्रष्टाचार के माध्यम से बेहिसाब माया इकट्ठा करने की होड़ में लगे हुए हैं। समाज के प्रति अपने संवेदनहीन रवैये के कारण, आम जनता का कुछ भला सोचने या करने का इनके पास न तो समय है और न ही इनका ऐसा कोई इरादा है। विधानसभा चुनावों के दौरान सिखों के वोट हासिल करने के लिए आर.एस.एस.ए भाजपा और संघ परिवार ने तो राजनीतिक-वैचारिक अवसरवाद की सारी सीमाएं ही लांघ दी हैं। 6 जून 1984 को घटित हृदय विदारक ‘ऑपरेशन ब्लू स्टार’ को सभी लोग, विशेषकर सिख जनसमूह कभी भी भुला नहीं सकते। 

    अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण ऑपरेशन ‘ब्लू स्टार’ के खिलाफ रोष प्रकट करने के लिए ‘दमदमी टकसाल’ के मुख्यालय मेहता चौक पर हर साल धार्मिक समागम आयोजित किए जाते हैं। इस साल, 6 जून 2026 को आयोजित ऐसे ही एक समागम में पहुंचकर भाजपा के नेतृत्व वाली महाराष्ट्र राज्य सरकार के एक मंत्री ‘श्रीमान’ गिरीश महाजन ने उन सभी को हैरान-परेशान कर दिया है जो हिंदू राष्ट्र की पैरोकार भाजपा और खालिस्तान की समर्थक दमदमी टकसाल को अब तक एक-दूसरे का दुश्मन समझते आए हैं। मंत्री जी ने अपने भाषण में ‘ऑपरेशन ब्लू स्टार’ की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए दिवंगत श्रीमती इंदिरा गांधी को पानी पी-पीकर कोसा था। इतना ही नहीं, मंत्री साहब ने भारतीय सेना की गोलीबारी में मारे गए उन सशस्त्र व्यक्तियों को ‘शहीद’ के दर्जे से भी नवाजा, जिन्हें भाजपा नेता अब तक आतंकवादी और देशद्रोही कहते रहे हैं। 
    हमारी शिकायत सिर्फ भाजपा नेता के भाषण को लेकर नहीं है, बल्कि संघ-भाजपा के दो मुंहे चरित्र और सिखों के वोट हासिल करने के लिए इनके द्वारा चली जा रही कुचालों को लेकर है। याद रहे, पंजाब के काले दौर में संघी और भाजपाई नेता आम सिखों और हिंसक गतिविधियों को अंजाम देने वाले मु_ी भर सशस्त्र खालिस्तानियों के बीच कोई अंतर नहीं समझते थे। तब ये समय की सरकारों को सभी सिखों से सख्ती से निपटने की सलाह देते रहे थे। पंजाब की सत्ता पर भाजपा का कब्जा होने का अर्थ यहां के लोगों के मनों के अंदर भाईचारे, सांप्रदायिक सद्भाव और मिलजुलकर शांतिपूर्वक जीने की संस्कृति को तबाह करना होगा।

    संघ-भाजपा की इस खतरनाक साजिश को विफल करने के लिए पंजाब वासियों के पास राजनीतिक और वैचारिक विधान भी है, अपनी समृद्ध संस्कृति, बलिदानों से भरा गौरवमयी इतिहास और सिख गुरु साहिबान व भक्ति आंदोलन के महान मार्गदर्शकों द्वारा रचित मानवीय वाणी का खजाना भी है। पंजाबी, गदरी बाबों और शहीद-ए-आजम भगत सिंह व उनके साथियों की सांझीवालता (समानता)वाला समाज बनाने के लिए स्थापित की गई बलिदानों की बेमिसाल विरासत के मालिक भी हैं। इसके बल पर ये सांप्रदायिक-फासीवादी, विभाजनकारी सोच वाली संघ- भाजपा जैसी नकारात्मक ताकतों को हर क्षेत्र में मात दे सकते हैं।-मंगत राम पासला

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