करूर रैली भगदड़ मामले को लेकर तमिलनाडु की सियासत में भूचाल आया हुआ है। मुख्यमंत्री के. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली मौजूदा सरकार के मंत्रियों पर गवाहों को प्रभावित करने और जांच की दिशा मोड़ने के बेहद गंभीर आरोप लग रहे हैं। इन आरोपों के बीच देश की सर्वोच्च अदालत (सुप्रीम कोर्ट) ने एक बड़ा और कड़ा फैसला सुनाते हुए द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) की उस याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया है, जिसमें मंत्रियों द्वारा गवाहों को डराने-धमकाने का दावा किया गया था। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता के पास इस मामले से निपटने के लिए पहले से ही एक मजबूत और उचित मंच मौजूद है।
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