नागौर: अयोध्या राम मंदिर में चंदा चोरी के बाद अब राजस्थान के नागौर जिले में स्थित बुटाटी धाम मंदिर को लेकर बवाल मच गया है। यहां पर संत चतुरदास महाराज मंदिर विकास समिति को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद पर जिला कलक्टर की ओर से गठित की गई जांच समिति ने अपनी जांच रिपोर्ट कलक्टर को सौंप दी है। इस जांच रिपोर्ट में प्रथम दृष्टया मंदिर समिति के कार्यकाल के दौरान करीब 22 करोड़ 74 लाख रुपए की वित्तीय अनियमितता, देवस्थान निधियों के दुरुपयोग तथा सुनियोजित गबन का प्रथम दृष्टया खुलासा किया गया है।
इस रिपोर्ट में समिति के प्रशासनिक एवं वित्तीय कार्यों पर गंभीर सवाल उठाते हुए संबंधित पदाधिकारियों के खिलाफ आपराधिक, राजस्व और विभागीय कार्रवाई की अनुशंसा की गई है। आपको बता दें कि जिला कलक्टर ने इस मंदिर विवाद को लेकर 10 फरवरी को जांच कमेटी गठित की थी, जिसने चार माह 13 दिन बाद गत 23 जून को अपनी रिपोर्ट सौंपी।
जिसके अनुसार समिति के रिकॉर्ड, आय-व्यय विवरण, बैंक खातों, निर्माण कार्यों और भुगतान संबंधी दस्तावेजों की जांच में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं मिली हैं। इस जांच समिति ने निष्कर्ष निकाला कि मंदिर की आय और देवस्थान निधियों का नियमानुसार उपयोग नहीं किया गया। कई मामलों में वित्तीय नियमों की अनदेखी कर राशि का दुरुपयोग किया गया। समिति ने इसे केवल प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि सुनियोजित वित्तीय गड़बड़ी और गबन का मामला माना है।
इस रिपोर्ट में यह भी बताया है कि नकद आय में भारी अंतर, बिना बिल और वाउचर के भुगतान, निर्माण एवं मरम्मत कार्यों में संदिग्ध व्यय, ग्राम विकास मद में खर्च तथा कबाड़ बिक्री से प्राप्त राशि के लेखांकन में भी गंभीर विसंगतियां मिली हैं। अब इस मामले में जांच समिति ने संबंधित कार्यकारिणी सदस्यों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर सक्षम पुलिस एजेंसी से विस्तृत जांच कराने की अनुशंसा की है। साथ ही राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम के तहत संबंधित व्यक्तियों से राशि की राजस्व बकाया की तरह वसूली करने का सुझाव दिया है। साथ ही जिन सदस्यों की भूमिका वित्तीय निर्णयों में रही, उनसे संयुक्त एवं पृथक दायित्व तय कर वसूली की जाए।

