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    Home»संपादकीय»अब श्रीकृष्ण मंदिर कारसेवा…
    संपादकीय

    अब श्रीकृष्ण मंदिर कारसेवा…

    chhattisgarhrajya.inBy chhattisgarhrajya.inJuly 15, 2026
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    अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद 9 अगस्त को मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर के पक्ष में कारसेवा करेगी। अखाड़ा परिषद 50 लाख से अधिक साधु-संतों की प्रतिनिधि धार्मिक संस्था है। परिषद में मुख्यत: 13 अखाड़े हैं, जिनमें 7 शैव, 3 वैष्णव और 3 ही उदासीन अखाड़े हैं। वे सभी सनातन के पैरोकार और आस्थावान हैं, लिहाजा अब उन्होंने अयोध्या के राम मंदिर आंदोलन की तर्ज पर श्रीकृष्ण मंदिर के लिए कारसेवा की घोषणा की है। जिस तरह अयोध्या में विवादित ढांचे (कथित बाबरी मस्जिद) का गुंबद ध्वस्त किया गया था, उस तरह श्रीकृष्ण मंदिर कारसेवा का मकसद नहीं है। साधु-संत और श्रद्धालु राजधानी दिल्ली से पैदल कूच कर मथुरा तक पहुंचेंगे और श्रीकृष्ण मंदिर परिसर के बाहर ही भजन-कीर्तन, चालीसा पाठ, पूजा-पाठ करेंगे। प्रभु श्रीकृष्ण को माखन-मिश्री का भोग लगाया जाएगा।

    हालांकि अभी किसी भी तरह की तोड़-फोड़ की कारसेवा का आह्वान नहीं किया गया है, लेकिन किसी पक्ष की धार्मिक भावनाएं उत्तेजित हो गईं या उन्माद का माहौल बन गया, तो उसे नियंत्रित करना कठिन होगा। भावनाएं तो स्वत:स्फूर्त भडक़ती हैं, लिहाजा पुलिस कहां तक की अनुमति देगी अथवा कारसेवा स्थगित करने का आग्रह करेगी, अभी निश्चित नहीं है। वैसे उप्र में एक धार्मिक योगी की सरकार है और वह भी श्रीकृष्ण आंदोलन के पक्षधर हैं, लिहाजा लगता है कि कारसेवा में व्यवधान पैदा नहीं किया जाएगा। बहरहाल कारसेवा तब आयोजित की जा रही है, जब सर्वोच्च अदालत विशेष लोक अदालत के जरिए काशी विश्वनाथ बनाम ज्ञानवापी मस्जिद, मथुरा के श्रीकृष्ण मंदिर बनाम ईदगाह मस्जिद और संभल के हरि मंदिर बनाम जामा मस्जिद सरीखे बेहद संवेदनशील विवादों को, हिंदू-मुस्लिम पक्ष की आपसी सहमति से, सुलझाने और निपटाने का प्रयास कर रही है। लोक अदालत में 21, 22, 23 अगस्त को दोनों पक्षों की दलीलें सुनी जाएंगी और फिर सहमति के बिंदु तय किए जाएंगे। बीती 4 जुलाई को ऐसा ही न्यायिक प्रयास नाकाम हो चुका है, जब वाराणसी के विवाद के संदर्भ में मुस्लिम पक्ष आया ही नहीं। वैसे दोनों पक्ष सर्वोच्च अदालत के ही अंतिम निर्णय के पक्ष में हैं, ताकि न्यायिक निष्कर्ष पर कानूनी सवाल न उठाए जा सकें। राम मंदिर का फैसला भी सर्वोच्च अदालत की संविधान पीठ ने सुनाया था। आज भी ऐसे सांप्रदायिक, धार्मिक विवादों की 18 याचिकाएं अदालतों के विचाराधीन हैं। सर्वोच्च अदालत ने 7 याचिकाएं ही लोक अदालत को भेजी थीं। बहरहाल मथुरा के श्रीकृष्ण मंदिर की कारसेवा का फैसला तब भी लिया गया है, जब कुछ महीनों बाद (संभवत: अप्रैल, 2027) उप्र में विधानसभा चुनाव होने हैं।

    अयोध्या, काशी, मथुरा संघ, विहिप और भाजपा के एजेंडे की प्राथमिकताएं रही हैं, लेकिन अखाड़ा परिषद की घोषित कारसेवा पर फिलहाल तीनों ही खामोश हैं। कारसेवा का न समर्थन और न ही विरोध..! मथुरा, वृंदावन प्रभु श्रीकृष्ण की जन्मस्थली और बाल-लीलाओं का क्षेत्र है। इसका उल्लेख पुराणों, उपनिषदों और प्राचीन धर्म-ग्रंथों में देखा और पढ़ा जा सकता है। श्रीकृष्ण मंदिर को 5000 साल प्राचीन बताया जाता है। हम इसकी पुष्टि नहीं कर सकते, क्योंकि हमारे सामने ऐसा कोई दस्तावेजी साक्ष्य नहीं है। अलबत्ता अधिसंख्य इतिहासकारों ने वृंदावन, मथुरा को श्रीकृष्ण की जन्मस्थली माना है। प्रभु का अवतार रूप में जन्म कंस के कारावास में हुआ, जहां श्रीकृष्ण के जैविक पिता वासुदेव और मां देवकी को कैद किया गया था। भगवान का पालन-पोषण वृंदावन में नंदबाबा और यशोदा मैया ने किया। श्रीकृष्ण मंदिर का इतिहास भी निर्माण, विध्वंस, पुनर्निर्माण, कब्जे के बाद मस्जिद-निर्माण आदि का रहा है। हम उसके विस्तार में नहीं जाएंगे, लेकिन भारत में 3 लाख से ज्यादा मस्जिदों की स्थापना और सक्रियता आज भी सवालिया है, लिहाजा हम जैसे तटस्थ लोग भी यह चाहते हैं कि सर्वोच्च अदालत 1991 के उपासना स्थल कानून पर अपना अंतिम फैसला तो यथाशीघ्र सुनाए, ताकि स्पष्ट हो सके कि कानून के दायरे में कौन से मंदिर, मठ, स्थापत्य और मस्जिदें हैं। ऐसी बहसें और दावे बंजर ही साबित होते हैं, क्योंकि उनकी बुनियाद में धार्मिक पूर्वाग्रह होते हैं। एक तरफ राम मंदिर में चंदा-चढ़ावा चोरी का प्रकरण जारी है, जांचें जारी हैं, ट्रस्ट में बदलाव किए जा रहे हैं, आरोपित अब भी जेल में हैं, लेकिन दूसरी तरफ श्रीकृष्ण मंदिर कारसेवा का आह्वान किया गया है, लिहाजा इसे राजनीति और चुनाव से जोड़ कर भी देखा जा रहा है। अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत डॉ. रवीन्द्र पुरी ने सपा अध्यक्ष तथा यादवों के नेता अखिलेश यादव को भी कारसेवा में आमंत्रित किया है, लेकिन ऐसे मामले सर्वोच्च अदालत के हस्तक्षेप के बिना सुलझाए नहीं जा सकते। सुप्रीम कोर्ट को दोनों पक्षों को सुनकर इस मामले में अपना फैसला सुनाना होगा।

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