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    Home»लेख-आलेख»भारत–यूनाइटेड किंगडम सीईटीए लागू हुआ
    लेख-आलेख

    भारत–यूनाइटेड किंगडम सीईटीए लागू हुआ

    chhattisgarhrajya.inBy chhattisgarhrajya.inJuly 16, 2026
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    द्विपक्षीय व्यापार और निवेश को सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम

    भारत–यूनाइटेड किंगडम व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता (सीईटीए) दोनों देशों के बीच आर्थिक साझेदारी में एक महत्त्वपूर्ण उपलब्धि है। इसका उद्देश्य बाज़ार की बेहतर पहुँच, सरल व्यापार प्रक्रियाओं, सेवा क्षेत्र में व्यापक प्रतिबद्धताओं तथा पेशेवरों की अधिक सुगम आवाजाही के माध्यम से व्यापार और निवेश को बढ़ावा देना है। सीईटीए व्यापार संबंधी बाधाओं को कम करके और निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाकर कृषि, मत्स्य, विनिर्माण, सेवा तथा अन्य प्रमुख क्षेत्रों में नए अवसर सृजित करता है। साथ ही, यह संतुलित बाज़ार पहुँच और चरणबद्ध शुल्क उदारीकरण के माध्यम से भारत के संवेदनशील क्षेत्रों के हितों का संरक्षण भी सुनिश्चित करता है। यह समझौता डिजिटल व्यापार, नवाचार, सतत् विकास तथा दोनों देशों के लोगों के बीच संबंधों को और सुदृढ़ बनाने को बढ़ावा देता है। विभिन्न क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग को सशक्त बनाते हुए यह समझौता अधिक समावेशी और भविष्य उन्मुख आर्थिक साझेदारी की मजबूत आधारशिला रखता है।

    भारत–यूनाइटेड किंगडम सीईटीए : एक ऐतिहासिक व्यापार समझौता
    भारत–यूनाइटेड किंगडम (यूके) व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता (सीईटीए) एक आधुनिक, व्यापक तथा ऐतिहासिक व्यापार समझौता है। इसका उद्देश्य बेहतर बाज़ार पहुँच, व्यापार उदारीकरण तथा शुल्क में रियायतों के माध्यम से भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच आर्थिक एकीकरण को और अधिक सुदृढ़ करना है। इस समझौते के तहत भारत को मुक्त व्यापार समझौते के अंतर्गत यूनाइटेड किंगडम द्वारा अब तक की सबसे महत्त्वाकांक्षी सेवा प्रतिबद्धताओं में से एक का लाभ मिलेगा। भारत के लगभग 99 प्रतिशत निर्यात को, जो व्यापार मूल्य के लगभग 100 प्रतिशत हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है, शून्य-शुल्क पहुँच प्रदान किए जाने से सीईटीए के ज़रिए भारत की निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता सुदृढ़ होने की अपेक्षा है। इस समझौते से द्विपक्षीय व्यापार का विस्तार, निवेश में वृद्धि तथा व्यवसायों के लिए नए अवसर सृजित होने की भी संभावना है।

    अपने आर्थिक और वाणिज्यिक महत्व से परे सीईटीए को एक समावेशी तथा भविष्य उन्मुख समझौते के रूप में तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि व्यापार के लाभ समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुँचें। यह केवल एक व्यापार समझौता नहीं है, बल्कि एक सुदृढ़, नवाचार-आधारित और जन-केंद्रित आर्थिक साझेदारी की आधारशिला भी रखता है।

    भारत–यूनाइटेड किंगडम द्विपक्षीय व्यापार
    भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच एक मजबूत और विस्‍तृत होती आर्थिक साझेदारी है। वर्ष 2025 में भारत का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) 3.96 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर रहा, जबकि यूनाइटेड किंगडम की अर्थव्यवस्था 3.84 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की रही। यह वैश्विक व्यापार में दोनों अर्थव्यवस्थाओं के महत्व को दर्शाता है।

    वर्ष 2025–26 में दोनों देशों के बीच वस्तु व्यापार 25.12 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुँचा। इस अवधि में यूनाइटेड किंगडम को भारत का निर्यात 13.44 अरब अमेरिकी डॉलर तथा आयात 11.68 अरब अमेरिकी डॉलर रहा, जिसके परिणामस्वरूप भारत को 1.76 अरब अमेरिकी डॉलर का व्यापार अधिशेष प्राप्त हुआ।

    सेवाओं का व्यापार भी समान रूप से सशक्त रहा है। वर्ष 2024 में दोनों देशों के बीच कुल द्विपक्षीय सेवा व्यापार 35.44 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुँचा। इस अवधि में भारत ने यूनाइटेड किंगडम को 21.66 अरब अमेरिकी डॉलर मूल्य की सेवाओं का निर्यात किया तथा 13.78 अरब अमेरिकी डॉलर मूल्य की सेवाओं का आयात किया, जिससे भारत को सेवा व्यापार में 7.88 अरब अमेरिकी डॉलर का अधिशेष प्राप्त हुआ।

    सीईटीए से प्रमुख हितधारकों को होने वाले लाभ
    सीईटीए को अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों में व्यापक लाभ सुनिश्चित करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। साथ ही, यह समझौता ये भी सुनिश्चित करता है कि व्यापार से होने वाले लाभ व्यापक रूप से समाज के सभी वर्गों तक पहुँचें।

    • शुल्क समाप्त कर दिए जाने से भारतीय किसानों तथा मत्स्यपालकों को यूनाइटेड किंगडम के बाज़ारों तक बेहतर पहुँच मिलने की उम्मीद है। इससे नए निर्यात अवसर सृजित होने तथा उनकी आय में वृद्धि होने की संभावना है।
    • यह समझौता वन पर निर्भर समुदायों की आजीविका के महत्व को स्वीकार करता है। साथ ही, यह प्राकृतिक संसाधनों के उत्तरदायी प्रबंधन तथा पर्यावरणीय सहयोग को प्रोत्साहित करता है।
    • वस्त्र, चमड़ा, फुटवियर, रत्न एवं आभूषण, हस्तशिल्प, खाद्य प्रसंस्करण, ऑटो कम्‍पोनेंट्स, प्लास्टिक तथा कार्बनिक रसायन जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों में निर्यात बढ़ने की संभावना है। इससे रोजगार सृजन को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
    • यह समझौता समावेशी तथा भविष्य के लिए तैयार विकास पर विशेष बल देता है। इससे महिलाओं, युवाओं, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई), व्यवसायों तथा पेशेवरों के लिए अवसरों का विस्तार होगा। इसमें महिलाओं तथा अन्य कम प्रतिनिधित्व वाले समूहों की व्यापार, नवाचार और उद्यमिता में अधिक भागीदारी को प्रोत्साहित करने के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। साथ ही, यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त श्रम अधिकारों, स्‍त्री-पुरुष समानता तथा न्यायसंगत कार्य परिस्थितियों के प्रति प्रतिबद्धता को भी सुदृढ़ करता है।
    • यूनाइटेड किंगडम के सेवा बाज़ार तक बेहतर पहुँच, पेशेवरों की आवाजाही से संबंधित प्रावधान तथा व्यावसायिक योग्यताओं की मान्यता नए अवसर सृजित करते हैं। इन अवसरों से कुशल भारतीय पेशेवरों तथा युवा प्रतिभाओं को लाभ मिलेगा।
    • सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को सरल सीमा शुल्क प्रक्रियाओं, कागज़-रहित व्यापार तथा डिजिटल प्रणालियों से लाभ होगा। ये उपाय अनुपालन लागत को कम करेंगे और बाज़ार तक पहुँच को बेहतर बनाएँगे। भारतीय एमएसएमई को यूनाइटेड किंगडम में प्रवेश करने वाले भारत के 99 प्रतिशत निर्यात पर शुल्क-मुक्त पहुँच का भी लाभ मिलेगा। इसमें वस्त्र, चमड़ा, आभूषण, फुटवियर तथा खाद्य उत्पाद शामिल हैं, जिससे शुल्क में 4 से 16 प्रतिशत तक की बचत होगी।
    • व्यवसायों को व्यापार सुगमता से संबंधित सरल उपायों, डिजिटल सहयोग तथा वैश्विक मूल्य शृंखलाओं के साथ मजबूत एकीकरण का लाभ मिलेगा। इससे कारोबार की सुगमता में वृद्धि होगी और सतत् आर्थिक विकास को समर्थन मिलेगा। यह समझौता डिजिटल व्यापार सुगमता तथा इलेक्ट्रॉनिक प्रमाणन को भी बढ़ावा देता है। साथ ही, यह सिंगल विंडो तथा अधिकृत आर्थिक परिचालक (एईओ) जैसी स्थापित व्यवस्थाओं का भी प्रभावी उपयोग करता है।
      विज़न से वास्‍तविकता तक : भारत–यूनाइटेड किंगडम सीईटीए का सफ़र
      भारत–यूनाइटेड किंगडम व्यापार समझौता दोनों देशों के बीच वर्षों तक चले निरंतर संवाद, वार्ताओं और रणनीतिक सहयोग का परिणाम है।
      व्यापार से परे : भारत–यूनाइटेड किंगडम रणनीतिक साझेदारी
      भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच व्यापार, निवेश, जन-से-जन संपर्क तथा रणनीतिक सहयोग पर आधारित एक मजबूत और बहुआयामी साझेदारी है।

    निवेश साझेदारी
    यूनाइटेड किंगडम भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश करने वाला छठा सबसे बड़ा निवेशक है। सितंबर 2024 तक उसने भारत में कुल 35 अरब अमेरिकी डॉलर का इक्विटी निवेश किया है। वहीं, मार्च 2024 तक यूनाइटेड किंगडम में भारत का कुल बाह्य निवेश 19 अरब अमेरिकी डॉलर रहा।

    जुलाई 2025 तक यूनाइटेड किंगडम में 971 भारतीय कंपनियाँ कार्यरत हैं, जो 1 लाख से अधिक लोगों को रोजगार प्रदान करती हैं। वहीं, भारत में 667 ब्रिटिश कंपनियाँ कार्यरत हैं, जो 5 लाख से अधिक लोगों को रोजगार देती हैं।

    आवाजाही एवं पेशेवरों का आदान-प्रदान
    भारत और यूनाइटेड किंगडम ने 4 मई 2021 को प्रवासन एवं आवाजाही साझेदारी (एमएमपी) समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते का उद्देश्य कार्यरत पेशेवरों की आवाजाही को अधिक सुगम और तेज़ बनाना है, जो भारत–यूनाइटेड किंगडम आर्थिक साझेदारी का एक महत्त्वपूर्ण स्तंभ है।

    नवंबर 2022 में जी-20 बाली शिखर सम्मेलन के अवसर पर भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच यंग प्रोफेशनल स्कीम की घोषणा की गई। इस योजना के अंतर्गत प्रतिवर्ष 3,000 वीज़ा जारी किए जाते हैं। इसके तहत 18 से 30 वर्ष के आयु वर्ग के स्नातकों को दो वर्ष की अवधि का वीज़ा प्रदान किया जाता है। यह योजना उन्हें एक-दूसरे के देश में रहने और कार्य करने की अनुमति देती है।

    यूनाइटेड किंगडम में भारतीय प्रवासी समुदाय
    यूनाइटेड किंगडम में भारतीय मूल के लगभग 18.64 लाख लोगों का एक बड़ा प्रवासी समुदाय निवास करता है। वर्ष 2021 की जनगणना के अनुसार यह यूनाइटेड किंगडम की कुल जनसंख्या का 2.6 प्रतिशत है, जिसकी अनुमानित संख्या वर्ष 2022 में 6.8 करोड़ थी। जनगणना के अनुसार यूनाइटेड किंगडम में 3.69 लाख भारतीय पासपोर्ट धारक भी निवास करते हैं।

    भारतीय प्रवासी समुदाय में रोजगार और व्यावसायिक योग्यताओं का स्तर उच्च है। इस समुदाय ने शिक्षा, साहित्य, कला, चिकित्सा, विज्ञान, खेल, उद्योग, व्यवसाय तथा राजनीति सहित अनेक क्षेत्रों में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया है।

    ग्रांट थॉर्नटन और फिक्की की मार्च 2022 की रिपोर्ट ‘इंडिया इन द यूके : द डायस्पोरा इफेक्ट’ के अनुसार यूनाइटेड किंगडम में 65,000 से अधिक कंपनियों का स्वामित्व भारतीय प्रवासी समुदाय के पास है।

    राष्ट्रीय हितों की रक्षा के साथ बाज़ार पहुँच का विस्तार
    भारत–यूनाइटेड किंगडम सीईटीए व्यापार उदारीकरण के साथ-साथ भारत के रणनीतिक क्षेत्रों, घरेलू उद्योगों तथा दीर्घकालिक विकास संबंधी प्राथमिकताओं के संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करता है।

    भारत ने अपनी 89.5 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर शुल्क रियायतें प्रदान की हैं, जिनके अंतर्गत यूनाइटेड किंगडम के 91 प्रतिशत निर्यात को शामिल किया गया है। यूनाइटेड किंगडम के कुल निर्यात मूल्य का 24.5 प्रतिशत भाग तत्काल शुल्क-मुक्त पहुँच प्राप्त करेगा, जबकि अन्य उत्पादों पर रियायतें चरणबद्ध तरीके से लागू की जाएँगी।

    कृषि तथा रणनीतिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण उद्योगों सहित संवेदनशील क्षेत्रों को शुल्क रियायतों से बाहर रखकर अथवा चरणबद्ध शुल्क कटौती के माध्यम से संरक्षित किया गया है।

    • कृषि क्षेत्र के अंतर्गत दुग्ध उत्पाद, अनाज एवं मोटे अनाज (मिलेट्स), दालें, सेब, खाद्य तेल, जई तथा सब्ज़ियाँ शामिल हैं।
    • सीईटीए सोना, आभूषण, प्रयोगशाला में निर्मित हीरे, कुछ सुगंधित तेल, महत्त्वपूर्ण ऊर्जा ईंधन, समुद्री पोत, प्रयुक्त वस्त्र, महत्त्वपूर्ण पॉलिमर, उनके मोनोफिलामेंट, स्मार्टफोन तथा ऑप्टिकल फाइबर जैसे उच्च-मूल्य वाले उत्पादों का भी संरक्षण करता है।
    • रणनीतिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण उत्पादों पर विशेष सावधानी के साथ विचार किया गया है। इनमें वे क्षेत्र शामिल हैं जिनमें मेक इन इंडिया तथा उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना के अंतर्गत घरेलू विनिर्माण क्षमता विकसित की जा रही है। इन उत्पादों पर शुल्क रियायतें 5, 7 या 10 वर्षों की अवधि के दौरान चरणबद्ध रूप से शुल्क में कमी के माध्यम से लागू की जाएँगी।
    • इसके अतिरिक्त, भारत ने मादक पेय पदार्थों के लिए अपने बाज़ार को क्रमिक और चयनात्मक रूप से खोला है।
    • ऑटोमोबाइल क्षेत्र के लिए भारत ने संतुलित, चरणबद्ध तथा विकासोन्मुख कोटा-आधारित उदारीकरण रणनीति अपनाई है। साथ ही, भारत के ऑटोमोबाइल उद्योग के संवेदनशील क्षेत्रों का संरक्षण भी सुनिश्चित किया गया है।
    • प्राथमिकता प्राप्त शुल्क दरों पर प्रतिवर्ष 37,000 यात्री वाहनों की पूर्णतः निर्मित इकाइयों (सीबीयू) के आयात हेतु कोटा-आधारित, चरणबद्ध बाज़ार पहुँच प्रदान की गई है। इससे बेहतर बाज़ार पहुँच और घरेलू उद्योग की प्राथमिकताओं के बीच संतुलन सुनिश्चित होता है।
    • छोटे और मध्यम श्रेणी के आंतरिक दहन इंजन (आईसीई) वाहनों तथा किफायती इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) सहित संवेदनशील क्षेत्रों को संरक्षित रखा गया है। इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए बाज़ार पहुँच को सावधानीपूर्वक विनियमित किया गया है। इन पर रियायतें केवल छठे वर्ष से लागू होंगी, जिससे भारतीय विनिर्माताओं को अपनी उत्पादन क्षमता, प्रौद्योगिकी और प्रतिस्पर्धात्मकता को सुदृढ़ करने का पर्याप्त अवसर मिलेगा।
    • बड़े इंजन वाले आंतरिक दहन इंजन (आईसीई) वाहनों (3000 सीसी से अधिक पेट्रोल तथा 2500 सीसी से अधिक डीज़ल) के लिए अधिक रियायतें प्रदान की गई हैं। कोटा के भीतर लागू शुल्क पाँच वर्षों के दौरान घटाकर 10 प्रतिशत कर दिया जाएगा, जबकि कोटा से अधिक आयात पर शुल्क 10 वर्षों के दौरान घटाकर 50 प्रतिशत कर दिया जाएगा।
      भारत–यूनाइटेड किंगडम सीईटीए से क्षेत्रवार लाभ

    भारत–यूनाइटेड किंगडम सीईटीए बेहतर बाज़ार पहुँच, शुल्क रियायत तथा व्यापार सुगमता में सुधार के माध्यम से भारतीय अर्थव्यवस्था के प्रमुख क्षेत्रों को उल्लेखनीय लाभ पहुँचाने के लिए तैयार है।

    वस्त्र उत्पाद
    क्षेत्रीय परिदृश्य
    यूनाइटेड किंगडम प्रतिवर्ष 28.8 अरब अमेरिकी डॉलर मूल्य के वस्त्र एवं परिधानों का आयात करता है, जबकि भारत का वैश्विक वस्त्र निर्यात लगभग 37 अरब अमेरिकी डॉलर है। भारत यूनाइटेड किंगडम को 1.79 अरब अमेरिकी डॉलर मूल्य के वस्त्र एवं परिधानों का निर्यात करता है और वहाँ के आयात बाज़ार में उसकी 6.1 प्रतिशत की हिस्सेदारी है।
    भारत यूनाइटेड किंगडम को वस्त्रों की आपूर्ति करने वाला चौथा सबसे बड़ा देश भी है।

    सीईटीए के अंतर्गत प्रमुख प्रावधान
    1,143 टैरिफ लाइनों पर शुल्क-मुक्त बाज़ार पहुँच
    बांग्लादेश, पाकिस्तान और कंबोडिया की तुलना में शुल्क संबंधी असमानता का अंत

    प्रमुख लाभार्थी
    रेडीमेड परिधान (आरएमजी), होम टेक्सटाइल, कालीन तथा हस्तशिल्प

    प्रमुख उत्पाद श्रेणियाँ
    लाभान्वित होने वाले उत्पादों में महिलाओं के सूती परिधान, सूती शर्ट/ब्लाउज़, टेरी कॉटन से बने तौलिये तथा रसोई में उपयोग होने वाले लिनेन, कृत्रिम रेशों से बने परिधान, बुने हुए सूती परिधान, पुरुषों की सूती औपचारिक शर्ट, सूती टी-शर्ट और बनियान, गद्दे, कुशन तथा बिस्तर संबंधी उत्पाद शामिल हैं

    सीईटीए के अंतर्गत अवसर
    यूनाइटेड किंगडम के बाज़ार में भारतीय वस्त्र एवं परिधान उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता में वृद्धि

    कृषि उत्पाद
    क्षेत्रीय परिदृश्य: वर्ष 2022–23 में भारत का कृषि निर्यात 45.05 अरब अमेरिकी डॉलर रहा, जो वर्ष 2020–21 के 41.3 अरब अमेरिकी डॉलर से बढ़कर इस स्तर पर पहुँचा। भारत वैश्विक स्तर पर 57 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक मूल्य के कृषि उत्पादों का निर्यात करता है। यूनाइटेड किंगडम का वैश्विक कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य आयात 90 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक का है, जबकि यूनाइटेड किंगडम को भारत का निर्यात मात्र 1.11 अरब अमेरिकी डॉलर है। यह निर्यात वृद्धि की उल्लेखनीय अप्रयुक्त संभावनाओं को दर्शाता है। यूनाइटेड किंगडम भारतीय उत्पादों जैसे चाय, आम, अंगूर, मसाले तथा समुद्री उत्पादों के लिए एक उच्च-मूल्य वाला बाज़ार भी है।

    सीईटीए के अंतर्गत प्रमुख प्रावधान: इस समझौते के तहत 1,437 टैरिफ लाइनों में शामिल कृषि उत्पादों को शुल्क-मुक्त बाज़ार पहुँच प्रदान की गई है। ये समझौते के अंतर्गत सभी टैरिफ लाइनों का 14.8 प्रतिशत हिस्सा हैं। इसके अतिरिक्त, यूनाइटेड किंगडम ने विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के कृषि संबंधी समझौते के अंतर्गत उपलब्ध सुरक्षा उपाय लागू करने के अपने अधिकार का उपयोग न करने पर सहमति व्यक्त की है।

    प्रमुख लाभार्थी: भारत–यूनाइटेड किंगडम सीईटीए के माध्यम से भारतीय किसानों को यूनाइटेड किंगडम के बाज़ार में अपने कृषि उत्पादों के बेहतर मूल्य प्राप्त करने का अवसर मिलेगा। किसानों को पारंपरिक ज्ञान को मान्यता दिए जाने संबंधी प्रतिबद्धताओं का भी लाभ मिलेगा, विशेष रूप से आनुवंशिक संसाधनों से संबंधित पेटेंट प्रक्रिया में। इसके अतिरिक्त, सीईटीए कृषि सहित विभिन्न क्षेत्रों में समावेशी और प्रौद्योगिकी-तटस्थ नवाचार को बढ़ावा देगा। साथ ही, इस समझौते से आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, पंजाब, महाराष्ट्र (अंगूर एवं प्याज), गुजरात (मूंगफली एवं कपास), केरल (मसाले) तथा पूर्वोत्तर राज्यों (बागवानी) के उत्पादकों को भी लाभ मिलने की अपेक्षा है।

    सीईटीए के अंतर्गत विकास के अवसर: प्रमुख कृषि श्रेणियों में शुल्क-मुक्त बाज़ार पहुँच मिलने से अगले तीन वर्षों में कृषि निर्यात में 50 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि होने की अपेक्षा है। इस समझौते से ताज़े अंगूर, प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद, बेकरी उत्पाद, संरक्षित सब्ज़ियाँ, फल एवं मेवे, ताज़ी तथा शीतित सब्ज़ियाँ, सॉस तथा तैयार सॉस के निर्यात को बढ़ावा मिलने की संभावना है। यह भारतीय कृषि उत्पादों को जर्मनी और नीदरलैंड सहित उन प्रमुख यूरोपीय संघ (ईयू) निर्यातकों के समान प्रतिस्पर्धी स्थिति में भी लाता है, जिन्हें पहले से ही यूनाइटेड किंगडम के बाज़ार में शून्य-शुल्क पहुँच प्राप्त है।

    खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र
    क्षेत्रीय परिदृश्य
    भारत वैश्विक स्तर पर 14.07 अरब अमेरिकी डॉलर मूल्य के प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों का निर्यात करता है। यूनाइटेड किंगडम 50.68 अरब अमेरिकी डॉलर मूल्य के प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों का आयात करता है, लेकिन भारत से उसका आयात केवल 30.95 करोड़ अमेरिकी डॉलर का है। यह निर्यात वृद्धि की उल्लेखनीय अप्रयुक्त संभावनाओं को दर्शाता है।

    सीईटीए के अंतर्गत प्रमुख प्रावधान
    इस समझौते के तहत प्रसंस्कृत खाद्य क्षेत्र के 985 टैरिफ लाइनों पर शुल्क-मुक्त बाज़ार पहुँच प्रदान की गई है। ये समझौते के अंतर्गत सभी टैरिफ लाइनों का 10.1 प्रतिशत हिस्सा हैं।

    प्रमुख लाभार्थी
    प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों के विनिर्माता तथा निर्यातक

    बागान क्षेत्र
    क्षेत्रीय परिदृश्य: यूनाइटेड किंगडम भारत के बागान उत्पादों के लिए एक महत्त्वपूर्ण निर्यात बाज़ार है। भारत के कुल कॉफी निर्यात का 1.7 प्रतिशत, चाय निर्यात का 5.6 प्रतिशत तथा मसाला निर्यात का 2.9 प्रतिशत यूनाइटेड किंगडम को होता है।

    *सीईटीए के अंतर्गत प्रमुख प्रावधान: इस समझौते के तहत इंस्टेंट कॉफी को शुल्क-मुक्त बाज़ार पहुँच प्रदान की गई है, जिससे यूनाइटेड किंगडम के बाज़ार में भारत के मूल्यवर्धित कॉफी उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी।
    *प्रमुख लाभार्थी: इस समझौते से निर्यातकों, उत्पादकों तथा विनिर्माताओं को लाभ मिलने की अपेक्षा है। शुल्क-मुक्त बाज़ार पहुँच मिलने से भारतीय व्यवसाय जर्मनी, स्पेन और नीदरलैंड के इंस्टेंट कॉफी आपूर्तिकर्ताओं के साथ अधिक प्रभावी ढंग से प्रतिस्पर्धा कर सकेंगे।
    *सीईटीए के अंतर्गत विकास के अवसर: इस समझौते से यूनाइटेड किंगडम के बाज़ार में, विशेष रूप से भारतीय इंस्टेंट कॉफी सहित, मूल्यवर्धित कॉफी उत्पादों के निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि होने की अपेक्षा है।

    चमड़ा एवं फुटवियर उत्पाद
    क्षेत्रीय परिदृश्य
    वर्ष 2024 में यूनाइटेड किंगडम को भारत का चमड़ा एवं फुटवियर निर्यात 49.4 करोड़ अमेरिकी डॉलर का रहा। सीईटीए के माध्यम से यूनाइटेड किंगडम के 8.9 अरब अमेरिकी डॉलर के चमड़ा एवं फुटवियर बाज़ार तक पहुँच का मार्ग प्रशस्त हुआ है, जिससे भारतीय निर्यातकों के लिए नए विकास के अवसर उपलब्ध होंगे। वैश्विक स्तर पर 5.6 अरब अमेरिकी डॉलर मूल्य के भारत के चमड़ा एवं फुटवियर निर्यात को यूनाइटेड किंगडम के बाज़ार में अपनी उपस्थिति बढ़ाने तथा प्रतिस्पर्धात्मकता को और सुदृढ़ करने का अवसर मिलेगा।

    सीईटीए के अंतर्गत प्रमुख प्रावधान
    यूनाइटेड किंगडम को होने वाले फुटवियर निर्यात के लिए शुल्क-मुक्त बाज़ार पहुँच

    प्रमुख लाभार्थी
    उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल तथा दिल्ली-एनसीआर के चमड़ा एवं फुटवियर क्लस्टर

    प्रमुख उत्पाद श्रेणियाँ
    रबर/प्लास्टिक तलों वाले चमड़े के जूते, रबर/प्लास्टिक तलों वाले लेदर फुटवियर, वस्त्र आधारित खेल एवं कैज़ुअल फुटवियर, धातुयुक्त टो कैप वाले सुरक्षा जूते, हैंडबैग तथा पर्स जैसी श्रेणियों के लाभान्वित होने की अपेक्षा है।

    सीईटीए के अंतर्गत अवसर
    सतर्क अनुमानों के अनुसार, यूनाइटेड किंगडम को भारत का निर्यात 90 करोड़ अमेरिकी डॉलर से अधिक हो सकता है।

    मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) से यूनाइटेड किंगडम के बाज़ार में वियतनाम, इंडोनेशिया, कंबोडिया, तुर्किये और बांग्लादेश की तुलना में भारत की प्रतिस्पर्धात्मकता सुदृढ़ होगी।
    इससे उत्पादन और निर्यात को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में रोजगार सृजन को भी समर्थन मिलने की अपेक्षा है।

    समुद्री उत्पाद
    क्षेत्रीय परिदृश्य: यूनाइटेड किंगडम प्रतिवर्ष 4.9 अरब अमेरिकी डॉलर मूल्य के समुद्री उत्पादों का आयात करता है, जबकि भारत का निर्यात केवल 12.6 करोड़ अमेरिकी डॉलर का है, जो इस क्षेत्र में अप्रयुक्त संभावनाओं को दर्शाता है। भारत के 7.8 अरब अमेरिकी डॉलर के वैश्विक समुद्री उत्पाद निर्यात को देखते हुए, शुल्क-मुक्त बाज़ार पहुँच से भारत की समुद्री उत्पाद मूल्य शृंखला में नए अवसर सृजित होने की संभावना है। यूनाइटेड किंगडम भारतीय फ्रोज़न समुद्री खाद्य उत्पादों के लिए एक उच्च-मूल्य वाला बाज़ार है। मछली, झींगा तथा कटलफिश प्रमुख निर्यात श्रेणियों में शामिल हैं। वहाँ भारतीय मूल के बड़े प्रवासी समुदाय तथा प्रसंस्कृत समुद्री खाद्य पदार्थों की बढ़ती खपत के कारण इन उत्पादों की माँग बढ़ रही है।

    सीईटीए के अंतर्गत प्रमुख प्रावधान: इस समझौते के तहत भारतीय समुद्री उत्पादों पर यूनाइटेड किंगडम द्वारा लगाए जाने वाले शुल्क समाप्त कर दिए गए हैं। इससे भारतीय निर्यातकों को बेहतर मूल्य प्राप्त होगा तथा मत्स्य क्षेत्र की संपूर्ण मूल्य शृंखला में आय में वृद्धि होगी। इससे पहले भारतीय झींगा पर यूनाइटेड किंगडम में 4.2 प्रतिशत से 8.5 प्रतिशत तक शुल्क लगाया जाता था। शुल्क समाप्त होने से समुद्री उत्पादों के निर्यात में तेजी आने तथा उच्च-मूल्य वाले प्रसंस्करण और उत्पाद विविधीकरण को बढ़ावा मिलने की अपेक्षा है।

    प्रमुख लाभार्थी: इस समझौते से समुद्री खाद्य उत्पादों के निर्यातकों, समुद्री खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों, तटीय मछुआरा समुदायों तथा मत्स्य क्षेत्र को लाभ मिलने की अपेक्षा है। निर्यात माँग में वृद्धि से खरीद मूल्य बेहतर होने तथा आजीविका सुदृढ़ होने की संभावना है। समुद्री उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एमपीईडीए) के अनुसार, समुद्री खाद्य प्रसंस्करण संयंत्रों में हजारों महिला श्रमिक कार्यरत हैं। यूनाइटेड किंगडम के बाज़ार तक अधिक पहुँच मिलने से इन संयंत्रों की क्षमता उपयोग में वृद्धि होने की उम्मीद है। साथ ही, केरल, आंध्र प्रदेश, गुजरात, तमिलनाडु, ओडिशा तथा पश्चिम बंगाल जैसे तटीय राज्यों को भी निर्यात वृद्धि, रोजगार सृजन तथा तटीय आर्थिक विकास के माध्यम से उल्लेखनीय लाभ मिलने की अपेक्षा है।

    इंजीनियरिंग उत्पाद

    क्षेत्रीय परिदृश्य
    यूनाइटेड किंगडम भारत की इंजीनियरिंग वस्तुओं के लिए छठा सबसे बड़ा निर्यात बाज़ार है। वर्ष 2024–25 में यूनाइटेड किंगडम को भारत के इंजीनियरिंग वस्तुओं के निर्यात में इससे पिछले वर्ष की तुलना में 11.7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

    यूनाइटेड किंगडम 193.52 अरब अमेरिकी डॉलर मूल्य की इंजीनियरिंग वस्तुओं का आयात करता है, लेकिन इसमें से केवल 4.28 अरब अमेरिकी डॉलर का आयात ही भारत से होता है। यह निर्यात वृद्धि की उल्लेखनीय संभावनाओं को दर्शाता है।

    सीईटीए के अंतर्गत प्रमुख प्रावधान
    समझौते के अंतर्गत 1,659 टैरिफ लाइनों, जो कुल टैरिफ लाइनों का 17 प्रतिशत हैं, को शुल्क-मुक्त बाज़ार पहुँच
    18 प्रतिशत तक के शुल्क को समाप्‍त किया गया

    प्रमुख लाभार्थी
    इंजीनियरिंग विनिर्माता एवं निर्यातक, विशेष रूप से विद्युत मशीनरी, ऑटो कलपुर्जों, औद्योगिक उपकरणों तथा निर्माण मशीनरी का उत्पादन करने वाले उद्यम

    तमिलनाडु, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात तथा तेलंगाना के इंजीनियरिंग क्लस्टर

    सीईटीए के अंतर्गत अवसर
    यूनाइटेड किंगडम को भारत का इंजीनियरिंग निर्यात वर्ष 2029–30 तक दोगुना होकर 7.5 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक होने का अनुमान है। प्रमुख इंजीनियरिंग उत्पादों के निर्यात में 12 से 20 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (सीएजीआर) से वृद्धि होने की अपेक्षा है।

    इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सॉफ्टवेयर उत्पाद
    सीईटीए के अंतर्गत प्रमुख प्रावधान: इस समझौते के तहत पात्र इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों को शुल्क-मुक्त बाज़ार पहुँच प्रदान की गई है। साथ ही, सॉफ्टवेयर तथा सूचना प्रौद्योगिकी-सक्षम सेवाओं (आईटीईएस) के लिए यूनाइटेड किंगडम से व्यापक और महत्त्वाकांक्षी बाज़ार पहुँच संबंधी प्रतिबद्धताएँ भी प्राप्त की गई हैं।

    सीईटीए के अंतर्गत अवसर: इस समझौते से स्मार्टफोन, ऑप्टिकल फाइबर केबल तथा इन्वर्टर के निर्यात में तेजी आने की अपेक्षा है, जिससे यूनाइटेड किंगडम के बाज़ार में भारत की उपस्थिति और सुदृढ़ होगी। साथ ही, सॉफ्टवेयर तथा सूचना प्रौद्योगिकी-सक्षम सेवाओं (आईटीईएस) के लिए नए बाज़ार खुलने, रोजगार सृजन को बढ़ावा मिलने तथा निर्यात क्षमता में वृद्धि होने की भी संभावना है। भारतीय सॉफ्टवेयर कंपनियों के निर्यात में प्रतिवर्ष 15 से 20 प्रतिशत की वृद्धि होने का अनुमान है।

    औषध उत्पाद
    क्षेत्रीय परिदृश्य
    यूनाइटेड किंगडम लगभग 30 अरब अमेरिकी डॉलर मूल्य की औषधियों का आयात करता है, लेकिन भारत से उसका आयात 1 अरब अमेरिकी डॉलर से भी कम है।

    सीईटीए के अंतर्गत प्रमुख प्रावधान
    औषधि क्षेत्र के लिए 56 टैरिफ लाइनों पर शुल्क-मुक्त बाज़ार पहुँच, जो कुल टैरिफ लाइनों का 0.6 प्रतिशत है।
    सर्जिकल उपकरणों, डायग्नोस्टिक उपकरणों, ईसीजी मशीनों और एक्स-रे प्रणालियों सहित विभिन्न चिकित्सा उपकरणों पर शुल्क समाप्त करता है।

    प्रमुख लाभार्थी
    भारतीय मेड-टेक कंपनियाँ और विनिर्माता

    सीईटीए के अंतर्गत अवसर
    यूनाइटेड किंगडम के बाज़ार में भारतीय जेनेरिक दवाओं की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने की अपेक्षा है।

    ब्रेक्सिट और कोविड-19 के बाद चीन से आयात पर यूनाइटेड किंगडम की निर्भरता में कमी आने के साथ, भारतीय विनिर्माता एक पसंदीदा और किफायती आपूर्तिकर्ता के रूप में उभरने के लिए बेहतर स्थिति में हैं।

    रसायन उत्पाद
    क्षेत्रीय परिदृश्य: भारत वैश्विक स्तर पर 40 अरब अमेरिकी डॉलर मूल्य के रसायन एवं संबद्ध उत्पादों का निर्यात करता है। 35.8 अरब अमेरिकी डॉलर मूल्य का यूनाइटेड किंगडम का रसायन बाज़ार भारतीय निर्यातकों के लिए विकास की संभावनाएँ प्रस्तुत करता है। हालांकि, यूनाइटेड किंगडम को भारत का निर्यात केवल 84.3 करोड़ अमेरिकी डॉलर है। वर्तमान में यूनाइटेड किंगडम को रसायन निर्यात 57.032 करोड़ अमेरिकी डॉलर है, जो भारत के कुल वैश्विक रसायन निर्यात का लगभग 2 प्रतिशत है। यह यूनाइटेड किंगडम के बाज़ार में निर्यात की महत्वपूर्ण अप्रयुक्त संभावनाओं को दर्शाता है।

    सीईटीए के अंतर्गत प्रमुख प्रावधान: यह समझौता 1,206 टैरिफ लाइनों पर शुल्क-मुक्त बाज़ार पहुँच प्रदान करता है। ये समझौते के अंतर्गत कुल टैरिफ लाइनों का 12.4 प्रतिशत हैं। इसमें उर्वरक, औद्योगिक रसायन और पेट्रोकेमिकल्स जैसे उत्पाद शामिल हैं, जो द्विपक्षीय व्यापार में इस क्षेत्र के महत्व को दर्शाते हैं। गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और तेलंगाना के रसायन विनिर्माण केंद्रों को इससे लाभ मिलने की अपेक्षा है।

    प्लास्टिक उत्पाद
    क्षेत्रीय परिदृश्य
    भारत यूनाइटेड किंगडम को प्लास्टिक उत्पादों की आपूर्ति करने वाला 13वाँ सबसे बड़ा देश है।

    सीईटीए के अंतर्गत प्रमुख प्रावधान
    यह समझौता प्लास्टिक उत्पादों के लिए शुल्क-मुक्त बाज़ार पहुँच प्रदान करता है, जिनके विनिर्माण में भारत ने अपनी क्षमता सिद्ध की है।

    सीईटीए के अंतर्गत अवसर
    कम लागत से भारतीय प्लास्टिक उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी। शुल्क-मुक्त पहुँच से फिल्म, शीट, पाइप, पैकेजिंग, टेबलवेयर और किचनवेयर के निर्यात को बढ़ावा मिलेगा, जिससे भारत जर्मनी, चीन जैसे प्रमुख वैश्विक आपूर्तिकर्ताओं के साथ अधिक प्रभावी रूप से प्रतिस्पर्धा कर सकेगा।

    खेल सामग्री और खिलौने
    सीईटीए के अंतर्गत प्रमुख प्रावधान: यह समझौता पात्र उत्पादों पर यूनाइटेड किंगडम द्वारा लगाए जाने वाले आयात शुल्क को समाप्त करता है। यह यूनाइटेड किंगडम और यूरोपीय संघ के मानकों के अनुपालन को भी प्रोत्साहित करता है, जिससे खरीदारों का विश्वास बढ़ेगा और अधिक व्यावसायिक सहयोग को बढ़ावा मिलेगा।

    सीईटीए के अंतर्गत विकास के अवसर: फुटबॉल, क्रिकेट उपकरण, रग्बी बॉल और गैर-इलेक्ट्रॉनिक खिलौनों के निर्यात में वृद्धि होने की अपेक्षा है। इस क्षेत्र में 15 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान है तथा वर्ष 2030 तक निर्यात को 18.697 करोड़ अमेरिकी डॉलर तक पहुँचाने का लक्ष्य है। शुल्क-मुक्त पहुँच से भारत के उत्पादों की कीमत प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार होगा, जिससे वे चीन और वियतनाम के आपूर्तिकर्ताओं की तुलना में अधिक प्रतिस्पर्धी बन सकेंगे, जिनके पास यूनाइटेड किंगडम के साथ ऐसे समान व्यापार समझौते नहीं हैं।

    रत्न एवं आभूषण उत्पाद
    क्षेत्रीय परिदृश्य
    भारत का यूनाइटेड किंगडम को रत्न एवं आभूषण निर्यात 1.03 अरब अमेरिकी डॉलर का है।

    यूनाइटेड किंगडम प्रतिवर्ष लगभग 4 अरब अमेरिकी डॉलर मूल्य के आभूषणों का आयात करता है, जो भारतीय निर्यातकों के लिए महत्वपूर्ण विकास संभावनाओं को दर्शाता है।

    सीईटीए के अंतर्गत प्रमुख प्रावधान
    रत्न एवं आभूषण निर्यात के लिए शुल्क में छूट

    प्रमुख लाभार्थी
    विनिर्माता और पारंपरिक कारीगर
    सूरत, अहमदाबाद, मुंबई, जयपुर, कोलकाता, हैदराबाद, चेन्नई और त्रिशूर के प्रमुख रत्न एवं आभूषण क्लस्टरों को महत्वपूर्ण लाभ मिलने की अपेक्षा है।

    सीईटीए के अंतर्गत अवसर
    शुल्क में छूट से अगले 2–3 वर्षों में यूनाइटेड किंगडम को भारत के रत्न एवं आभूषण निर्यात के दोगुना होने का अनुमान है।
    उच्च निर्यात से डिजाइन, विनिर्माण और कारीगर क्षेत्रों में रोजगार सृजन को बढ़ावा मिलने की अपेक्षा है।

    इस्पात क्षेत्र
    मार्च 2026 में यूनाइटेड किंगडम ने 188 टैरिफ लाइनों पर नए इस्पात उपाय लागू किए, जो 1 जुलाई 2026 से प्रभावी हुए। इन टैरिफ लाइनों पर भारत का निर्यात उसके कुल इस्पात निर्यात (960 मिलियन अमेरिकी डॉलर) का केवल लगभग 14 प्रतिशत (137 मिलियन अमेरिकी डॉलर) था। भारतीय इस्पात निर्यातकों के हितों की रक्षा के लिए दोनों देशों ने इन उपायों के प्रभाव को कम करने हेतु व्यापक स्तर पर बातचीत की। इससे वाणिज्यिक हितों की रक्षा होगी, बाज़ार में व्यवधान कम होंगे तथा संतुलित और स्थिर व्यापारिक वातावरण बना रहेगा।

    सीईटीए के अंतर्गत प्रमुख प्रावधान: संभावित व्यापारिक प्रभावों को कम करने और समझौते में संतुलन बनाए रखने के लिए यूनाइटेड किंगडम ने तीन महत्वपूर्ण उत्पाद श्रेणियों में शुल्क-मुक्त पहुँच का विस्तार किया है:

    श्रेणी 1 (नॉन-अलॉय और अन्य अलॉय हॉट-रोल्ड शीट्स एवं स्ट्रिप्स): भारत के लिए देश-विशिष्ट कोटा लगभग 3 गुना बढ़ाकर 12,405 टन से 33,456 टन कर दिया गया है। यूनाइटेड किंगडम ने अधिकृत उपयोग योजना (एयूएस) के तहत कोटा का 40 प्रतिशत हिस्सा विशेष रूप से भारत के लिए आरक्षित किया है। इससे भारतीय निर्यातकों को लाभ होगा और लगभग 9.45 लाख टन के समर्पित व्यापार अवसर उपलब्ध होंगे।
    श्रेणी 28 (नॉन-अलॉय वायर): इस उपाय के दायरे से 9 कमोडिटी कोड हटाए गए हैं, जिससे बाज़ार पहुँच में सुधार होगा। इससे यह सुनिश्चित होगा कि इस श्रेणी में भारत के 95 प्रतिशत निर्यात पूरी तरह से प्रतिबंधों से मुक्त रहेंगे।
    विस्‍तृत अवशिष्ट कोटा: भारत ने महत्वपूर्ण उप-श्रेणियों में विस्‍तृत पहुँच सुनिश्चित की है। इसके अंतर्गत श्रेणी 12बी (नॉन-अलॉय मर्चेंट बार्स और लाइट सेक्शंस) का अवशिष्ट कोटा 468 टन से बढ़ाकर 4,540 टन तथा श्रेणी 26 (अन्य वेल्डेड ट्यूब्स) का अवशिष्ट कोटा 10,809 टन से बढ़ाकर 16,327 टन कर दिया गया है।
    सीईटीए के अंतर्गत अवसर: नए ढाँचे के तहत भारत का कुल देश-विशिष्ट कोटा बढ़ाकर 1,68,029 टन कर दिया गया है। इसके अतिरिक्त, एयूएस के अंतर्गत 9.45 लाख टन का विशेष कोटा भी उपलब्ध कराया गया है।

    भारतीय तिलहन उत्पाद
    सीईटीए के अंतर्गत प्रमुख प्रावधान
    शुल्कों में कमी और प्रक्रियाओं का सरलीकरण

    प्रमुख लाभार्थी
    भारतीय तिलहन निर्यातक

    सीईटीए के अंतर्गत अवसर
    यूनाइटेड किंगडम का बाज़ार भारतीय तिलहन निर्यातकों को अपने उपभोक्ता आधार का विस्तार करने, बाज़ार में अपनी उपस्थिति सुदृढ़ करने तथा निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने का अवसर प्रदान करता है।

    सेवा क्षेत्र: बाज़ार पहुँच और पेशेवरों की आवाजाही का विस्तार
    क्षेत्रीय परिदृश्य
    सेवा क्षेत्र भारत–यूनाइटेड किंगडम आर्थिक साझेदारी का एक प्रमुख आधार है। यूनाइटेड किंगडम के साथ सेवाओं के व्यापार में भारत को लगभग 7.9 अरब अमेरिकी डॉलर का अधिशेष प्राप्त है। भारत का सेवा निर्यात 21.6 अरब अमेरिकी डॉलर है, जबकि सेवा आयात 13.7 अरब अमेरिकी डॉलर है।

    सीईटीए के अंतर्गत प्रमुख प्रावधान
    भारत ने यूनाइटेड किंगडम से सभी 12 प्रमुख सेवा क्षेत्रों और 137 उप-क्षेत्रों को शामिल करते हुए व्यापक प्रतिबद्धताएँ प्राप्त की हैं, जो भारत के 99 प्रतिशत से अधिक निर्यात हितों का प्रतिनिधित्व करती हैं। वहीं, भारत की ओर से 108 उप-क्षेत्रों में प्रतिबद्धताएँ प्रदान की गई हैं।

    पारस्परिक मान्यता और पेशेवरों की आवाजाही
    दोनों देशों ने समझौते के लागू होने के 12 माह के भीतर पेशेवर योग्यताओं की पारस्परिक मान्यता के लिए पारस्परिक मान्यता समझौतों (एमआरए) को आगे बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की है। प्रस्तावित एमआरए में नर्सिंग, लेखांकन तथा वास्तुकला को शामिल किया गया है। इनसे पेशेवरों के लिए बाधाएँ कम होने और सर्वोत्तम कार्य-पद्धतियों के आदान-प्रदान को बढ़ावा मिलने की अपेक्षा है।

    यूनाइटेड किंगडम ने पेशेवरों के प्रवेश पर किसी भी प्रकार की संख्यात्मक सीमा या आर्थिक आवश्यकता परीक्षण (ईएनटी) लागू न करने पर सहमति व्यक्त की है। ईएनटी समाप्त होने से अनिश्चितता कम होगी और भारतीय पेशेवरों की आवाजाही अधिक सुगम होने की अपेक्षा है। यह समझौता भारत की सांस्कृतिक विशेषज्ञता को मान्यता देते हुए संविदात्मक सेवा प्रदाताओं के लिए प्रतिवर्ष 1,800 पदों का एक समर्पित कोटा भी निर्धारित करता है।
    इसके अतिरिक्त, यह समझौता भारतीय पेशेवरों के अस्थायी प्रवेश और प्रवास के लिए एक सुनिश्चित रूपरेखा प्रदान करता है।

    श्रेणी
    ठहरने की अवधि

    व्यावसायिक आगंतुक (बीवी)
    सभी क्षेत्रों में किसी भी 6 माह की अवधि में 90 दिन

    अंतर-कंपनी स्थानांतरित कर्मचारी (आईसीटी)
    सभी क्षेत्रों में, साझेदारों और आश्रितों सहित, 3 वर्ष। इसमें स्नातक प्रशिक्षु भी शामिल हैं।

    निवेशक
    1 वर्ष

    संविदात्मक सेवा प्रदाता (सीएसएस)
    सूचना प्रौद्योगिकी/आईटीईएस, व्यवसाय, वित्त, आतिथ्य और परिवहन सहित 33 उप-क्षेत्रों में किसी भी 24 माह की अवधि में 12 माह

    स्वतंत्र पेशेवर (आईपी)
    सूचना प्रौद्योगिकी/आईटीईएस, व्यवसाय, पेशेवर सेवाएँ, दूरसंचार और वित्त सहित 16 उप-क्षेत्रों में किसी भी 24 माह की अवधि में 12 माह

    डबल कॉन्ट्रिब्यूशन कन्वेंशन
    पहले, यूनाइटेड किंगडम में अल्पकालिक नियुक्तियों पर कार्यरत भारतीय पेशेवरों और उनके नियोक्ताओं को वहाँ की राष्ट्रीय बीमा (नेशनल इंश्योरेंस) प्रणाली में वेतन का लगभग 23 प्रतिशत अंशदान करना पड़ता था। इसके बदले वे किसी भी लाभ के पात्र नहीं होते थे।

    डबल कॉन्ट्रिब्यूशन कन्वेंशन (डीसीसी) के तहत 60 माह तक की नियुक्तियों के लिए इस दोहरे सामाजिक सुरक्षा अंशदान को समाप्त कर दिया गया है। इस कन्‍वेंशन से 75,000 से अधिक भारतीय पेशेवरों और लगभग 900 भारतीय कंपनियों को लाभ मिलने की अपेक्षा है। इससे रोजगार लागत में कमी आएगी और पेशेवरों की हाथ में आने वाली आय बढ़ेगी। उद्योग के अनुमानों के अनुसार, इस प्रावधान से प्रतिवर्ष 60 करोड़ अमेरिकी डॉलर से अधिक की बचत होने का अनुमान है।

    डिजिटल माध्यम से प्रदान की जाने वाली सेवाएँ और निवेश के अवसर
    यह समझौता सूचना प्रौद्योगिकी, पेशेवर परामर्श, शिक्षा, प्रशिक्षण तथा दूरसंचार जैसी डिजिटल माध्यम से प्रदान की जाने वाली सेवाओं के लिए बाज़ार पहुँच को सुदृढ़ करता है। इससे भारत के सूचना प्रौद्योगिकी तथा आईटी-सक्षम सेवा क्षेत्र को बढ़ावा मिलने की अपेक्षा है, जिसे पहले से ही यूनाइटेड किंगडम के साथ व्यापार में अधिशेष प्राप्त है।

    यह भारतीय कंपनियों के लिए यूनाइटेड किंगडम में अपने परिचालन स्थापित करने के नए अवसर भी सृजित करता है। ये अवसर प्रबंधन परामर्श, शिक्षा तथा पर्यावरणीय सेवाओं जैसे क्षेत्रों में उपलब्ध होंगे।

    प्रमुख लाभार्थी
    व्यवसायी और स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र: सेवाओं से संबंधित प्रतिबद्धताएँ यूनाइटेड किंगडम में निवेश की योजना बना रहे भारतीय व्यवसायों को अधिक निश्चितता प्रदान करेंगी। यह समझौता अनुपालन संबंधी बाधाओं को कम करेगा, जिससे विशेष रूप से डिजिटल सेवाओं के क्षेत्र में भारतीय स्टार्टअप्स को नए ग्राहकों तक पहुँचने में सुविधा होगी।

    सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) पेशेवर: पेशेवरों की आवाजाही से संबंधित प्रतिबद्धताओं का भारतीय आईटी पेशेवरों पर महत्वपूर्ण सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा, जिससे उनके लिए यूनाइटेड किंगडम में कार्य करना अधिक सुगम होगा। इन प्रावधानों से कुशल पेशेवरों की निर्बाध और लागत-प्रभावी आवाजाही सुनिश्चित होगी।
    ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (जीसीसी): यह समझौता भारत के प्रति यूनाइटेड किंगडम की कंपनियों के दृष्टिकोण को कम लागत वाले बैक-ऑफिस केंद्र से बदलकर अनुसंधान एवं विकास, विश्लेषण, साइबर सुरक्षा तथा उभरती प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में एक रणनीतिक साझेदार के रूप में स्थापित करने में सहायक हो सकता है। यह ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (जीसीसी) के विस्तार को भी बढ़ावा देगा।

    स्वास्थ्य एवं शिक्षा क्षेत्र: भारतीय अस्पताल बेहतर स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान करने और उन्नत चिकित्सा प्रौद्योगिकियों को अपनाने के लिए यूनाइटेड किंगडम के अस्पतालों के साथ सहयोग कर सकेंगे। यूनाइटेड किंगडम के शैक्षणिक संस्थान भारत में अपने परिसर स्थापित कर सकेंगे, जबकि भारतीय संस्थान यूनाइटेड किंगडम में अपने परिचालन स्थापित कर एडटेक जैसे क्षेत्रों में विस्तार कर सकेंगे।

    भारतीय वित्तीय संस्थान: इस समझौते से भारतीय वित्तीय संस्थानों को यूनाइटेड किंगडम के बाज़ार तक बेहतर पहुँच मिलेगी, जिससे वे वहाँ रह रहे भारतीय समुदाय और व्यवसायों को अधिक प्रभावी सेवाएँ प्रदान कर सकेंगे। गैर-भेदभाव संबंधी प्रावधान भारतीय संस्थानों के साथ समान और निष्पक्ष व्यवहार सुनिश्चित करेंगे। साथ ही, यह समझौता इलेक्ट्रॉनिक भुगतान, फिनटेक तथा अन्य डिजिटल वित्तीय समाधानों के विस्तार को भी बढ़ावा देगा, जिससे समग्र बाज़ार एकीकरण और सुदृढ़ होगा।

    सरकारी खरीद: भारतीय आपूर्तिकर्ताओं को यूनाइटेड किंगडम के 90 अरब पाउंड (122 अरब अमेरिकी डॉलर) मूल्य के सरकारी खरीद बाज़ार तक पहुँच प्राप्त होगी, जबकि यूनाइटेड किंगडम को भारत के 114 अरब अमेरिकी डॉलर मूल्य के सरकारी खरीद बाज़ार तक पारस्परिक पहुँच मिलेगी। यह समझौता भारतीय आपूर्तिकर्ताओं के साथ निष्पक्ष व्यवहार सुनिश्चित करता है तथा सूचना प्रौद्योगिकी, निर्माण, वित्तीय सेवाएँ, बीमा और चुनिंदा शैक्षणिक संस्थानों जैसे क्षेत्रों में नए अवसर उपलब्ध कराता है।

    सीईटीए के अंतर्गत अवसर
    इस समझौते से सूचना प्रौद्योगिकी तथा व्यावसायिक सेवाओं के क्षेत्र में तीव्र वृद्धि होने की अपेक्षा है। इससे भारतीय कंपनियों के लिए यूनाइटेड किंगडम के 200 अरब अमेरिकी डॉलर के सेवा आयात बाज़ार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने के अवसर सृजित होंगे। यह भारत के वर्तमान लगभग 14 अरब अमेरिकी डॉलर के सेवा निर्यात को और विस्तार देने में सहायक होगा।

    भारत–यूनाइटेड किंगडम के बीच अधिक सशक्त आर्थिक साझेदारी की ओर
    भारत–यूनाइटेड किंगडम सीईटीए दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों में एक नए अध्याय की शुरुआत करता है। यह बेहतर बाज़ार पहुँच के साथ व्यापार, निवेश, नवाचार और पेशेवरों की आवाजाही के नए अवसर प्रदान करता है। इस समझौते से भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को सुदृढ़ करने के साथ-साथ समावेशी और सतत् विकास को भी बढ़ावा मिलने की अपेक्षा है। यह समझौता भारत–यूनाइटेड किंगडम के बीच एक सुदृढ़, लचीली और भविष्य के लिए तैयार साझेदारी की आधारशिला रखता है।

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