Close Menu
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Trending
    • ग्रिड ब्लैकआउट की स्थिति में कोरबा बिजली संयंत्र तक 32 मिनट में पहुंचेगा स्टार्ट-अप पावर
    • अंबिकापुर:महामाया पहाड़ में युवती का मिला कंकाल, शिनाख्त के प्रयास जारी…
    • पुराने एंड्राॅयड यूजर्स को झटका:Google ने इस एंड्रॉयड वर्जन के लिए बंद किया सपोर्ट…
    • 50 ग्राम सोने का सिक्का खरीदकर ठगों ने 5.10 लाख रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर किए सराफा कारोबारी 20 दिन बाद बैंक खाता फ्रीज…
    • ‘उद्धव’ और ‘राज ठाकरे’ के संयुक्त मार्च को लेकर गतिविधियां तेज
    • दिल्ली के जंतर मंतर पर छात्रों का आंदोलन खत्म, सीजेपी ने किया ऐलान, सरकार ने मानी कौन-कौन सी डिमांड?
    • “लड़ाई अभी जारी है”, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद भी जारी रहेगा प्रदर्शन , CJP ने बताई वजह
    • सांसद लक्ष्मी वर्मा ने आधुनिक गोदामों और ए.आई आधारित कृषि निगरानी पर कृषि राज्य मंत्री से किया सवाल
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Chhattisgarh RajyaChhattisgarh Rajya
    Saturday, July 25
    • खानपान-सेहत
    • फीचर
    • राशिफल
    • लेख-आलेख
    • व्यापार
    • बिलासपुर
    • रायपुर
    • भिलाई
    • राजनाँदगाँव
    • कोरबा
    Chhattisgarh RajyaChhattisgarh Rajya
    Home»संपादकीय»तकरार पीएम आवास तक…
    संपादकीय

    तकरार पीएम आवास तक…

    chhattisgarhrajya.inBy chhattisgarhrajya.inJuly 23, 2026
    Facebook Twitter WhatsApp Email Telegram
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn Pinterest Email

    पेपरलीक आंदोलन, तकरार और विरोध-प्रदर्शन प्रधानमंत्री आवास की दहलीज तक पहुंच गया। यकीनन यह चौंकाने वाला यथार्थ है। प्रधानमंत्री की सुरक्षा के साथ ऐसा खिलवाड़ स्वीकार नहीं है। यह दंडनीय अपराध है। राजधानी दिल्ली में आंदोलन के स्थान चिह्नित हैं। पेपरलीक और युवाओं के भविष्य पर कोई तकरार है, तो उसके लिए संसद का मंच है। कमोबेश संसद में विपक्ष हंगामा करने, नारेबाजी, हुल्लड़बाजी से बाज आएगा, तो सदन में इस मुद्दे पर भी चर्चा हो सकती है। यह आश्वासन प्रधानमंत्री मोदी तक ने दिया है और एनडीए सांसदों को संबोधित करते हुए भी आश्वस्त किया है कि पेपरलीक के ‘माफिया’ को बख्शा नहीं जाएगा। सरकार सख्त कार्रवाई कर रही है। आरोपित जेल में भी हैं। संसद सत्र जारी है, लेकिन कार्यवाही बंजर है, क्योंकि विपक्ष को हंगामा करना ही विशेषाधिकार लगता है। बहरहाल संसद के दोनों सदनों में नेता प्रतिपक्ष-राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खडग़े-ने स्थापित कानून को तोड़ा है। खडग़े का सरकारी आवास 10, राजाजी मार्ग है, जो प्रधानमंत्री आवास से मात्र 300 मीटर की दूरी पर है। 21 जुलाई को खडग़े का 84वां जन्मदिन था, लिहाजा नेता प्रतिपक्ष, लोकसभा के अलावा, कांग्रेस के मुख्यमंत्री, पूर्व मुख्यमंत्री, सांसद और अन्य महत्वपूर्ण चेहरे खडग़े के आवास पर जुटे थे। संभवत: वहीं रणनीति तय हुई और कांग्रेसी पैदल चल कर ही प्रधानमंत्री आवास की दहलीज तक पहुंच गए। दलील दी गई कि प्रधानमंत्री संसद में नहीं आ रहे हैं, लिहाजा हम उनसे मिलने आए हैं।

    यह कुतर्क के अलावा कुछ भी नहीं। यह धरना सुरक्षा-व्यवस्था का घोर उल्लंघन था। चूंकि अधिकतर सांसद थे, लिहाजा वे संसद भवन में ही निश्चित स्थान पर धरना और नारेबाजी कर सकते थे। प्रधानमंत्री आवास की वह दहलीज ‘उच्चतम सुरक्षा’ क्षेत्र है, लिहाजा ‘अति संवेदनशील’ भी है। वहां से प्रधानमंत्री का काफिला ही आ-जा सकता है। वीवीआईपी मेहमान भी उसी रास्ते से प्रधानमंत्री से मुलाकात करने आते हैं। सवाल है कि क्या पुलिस और खुफिया एजेंसियों को इस धरने की भनक तक नहीं लगी? प्रधानमंत्री को पल-पल की खबर दी जाती है, फिर इतनी चूक कैसे हो गई? बहरहाल आजादी के बाद सिर्फ दो बार प्रधानमंत्री आवास पर प्रदर्शनबाजी की गई है, लेकिन दोनों बार ‘नेता प्रतिपक्ष’ शामिल नहीं थे। 1999 में आईसी-814 विमान अपहरण के वक्त पीडि़त, चिंतित जनता प्रधानमंत्री आवास तक पहुंची थी, क्योंकि विमान में कई यात्री सवार थे और अपहरण आतंकियों ने किया था। तब देश के प्रधानमंत्री अटलबिहारी वाजपेयी थे। दूसरी बार, 2012 में अन्ना हजारे आंदोलन के समय युवाओं की भीड़ ने प्रधानमंत्री आवास पर प्रदर्शन किया था। डॉ. मनमोहन सिंह तब देश के प्रधानमंत्री थे। दरअसल किसी भी विवाद, मुद्दे, समस्या, आपदा, कांड का न्यायिक निपटारा प्रधानमंत्री आवास पर धरना देकर हासिल नहीं किया जा सकता। मौजूदा कांग्रेसी धरना राजनीतिक अराजकता, मेरी मर्जी वाला अहंकार और पेपरलीक पर विभाजित राजनीति का स्पष्ट उदाहरण है।

    प्रधानमंत्री दफ्तर में राज्यमंत्री डॉ. जितेन्द्र सिंह और केंद्रीय गृह सचिव गोविन्द मोहन दो बार धरनास्थल तक आए और राहुल गांधी से संवाद किया, उन्हें प्रधानमंत्री आवास की दहलीज की संवेदनशीलता समझाई, लेकिन नेता प्रतिपक्ष नहीं माने। अपनी बात से मुकरते रहे और कई बार जवाब दिया-‘मेरी मर्जी..।’ देश किसी व्यक्ति की मनमर्जियों से नहीं चला करता। अंतत: पुलिस के जवानों ने हल्का बलप्रयोग करते हुए राहुल गांधी और अखिलेश यादव को टांगते हुए उठाया, हिरासत में लिया और बस में ठेल कर छत्रसाल स्टेडियम ले गए। देर रात उन्हें रिहा कर दिया गया। प्रियंका गांधी को भी जबरन उठा कर बस में बिठाया गया। मंदिर मार्ग थाने में उनसे मिलने मां सोनिया गांधी गईं। उन्हें भी रिहा कर दिया गया। दरअसल कांग्रेस सोच रही है कि पेपरलीक पर मोदी सरकार बैकफुट पर है। यह व्यापक वोट बैंक का भी मुद्दा है, लिहाजा राहुल गांधी ‘गूंज’ नाम से एक अभियान छात्रों के लिए चला रहे हैं। इसी दौरान जून में ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ प्रकट हो गई, तो उसके युवा नेतृत्व ने भी पेपरलीक को बुनियादी मुद्दा बनाया। विपक्ष दोनों ओर बंटा हुआ है। ‘तिलचट्टों’ ने इस मुद्दे को कुछ आक्रामक बना दिया। जंतर-मंतर पर बीती रात तमिलनाडु के सुपरस्टार मुख्यमंत्री थलपति विजय भी मिलने गए। ममता बनर्जी ने भी समर्थन की घोषणा की है। यह मुद्दा कांग्रेस नेतृत्व की यूपीए सरकार के दौरान भी जिंदा था। समाधान संसदीय चर्चा से ही संभव है। अगर जगत प्रकाश नड्डा की सीजेपी से बातचीत सफल रहती है, तो इसका समाधान अवश्य निकलेगा।

    Share. Facebook Twitter Telegram WhatsApp Email
    chhattisgarhrajya.in
    chhattisgarhrajya.in
    • Website

    Related Posts

    दलबदल अर्थात जनादेश को ठेंगा

    July 21, 2026

    चोरी का माल, सुप्रीम कोर्ट से गृहमंत्री तक!

    July 20, 2026

    अंतरिक्ष में ‘विक्रम-1’ सफल प्रयोग 

    July 20, 2026

    Address - Gayatri Nagar, Near Ashirwad Hospital, Danganiya, Raipur C.G.

    Chandra Bhushan Verma
    Owner & Editor
    Mobile - 9826237000 Email - chhattisgarhrajya.in@gmail.com
    Facebook X (Twitter) Instagram Pinterest
    • About Us
    • Contact Us
    • Privacy Policy
    • Terms and Conditions
    • Disclaimer
    © 2026 ThemeSphere. Designed by ThemeSphere.

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.