तिरुवनंतपुरम : IAS अधिकारी कन्नन गोपीनाथन ने 2019 में सरकारी सेवा से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने अपनी राय न रख पाने की वजह से इस्तीफा दिया था। हालांकि तब से उनका इस्तीफा केंद्र सरकार के पास पेंडिंग है। अब गोपीनाथ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से एक नई अपील की है कि उनका इस्तीफा मंजूर किया जाए। गोपीनाथ ने अपील के साथ ही पीएम मोदी पर कुछ तंज़ भी कसे हैं। उन्होंने लिखा कि कृपया मेरा इस्तीफा भी स्वीकार करें। 7 साल हो गए हैं!! ऐसा लगता है कि उन्होंने यह बात हाल ही में वरिष्ठ BJP नेता धर्मेंद्र प्रधान के शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा देने के संदर्भ में कही है, जो ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के खिलाफ Gen-Z के हफ़्तों तक चले विरोध-प्रदर्शनों के बाद हुआ था।
गोपीनाथन अरुणाचल प्रदेश-गोवा-मिजोरम और केंद्र शासित प्रदेश (AGMUT) कैडर के 2012 बैच के IAS अधिकारी हैं। जब एक यूज़र ने उनके X पोस्ट पर पूछा कि क्या सरकार उन्हें सैलरी दे रही है क्योंकि उनकी नौकरी अभी भी है, तो गोपीनाथन ने जवाब दिया कि नहीं। न सैलरी, न सस्पेंशन, कुछ नहीं। बस मामले को लटकाए हुए हैं। ठीक वैसे ही जैसे हर दूसरे मुद्दे पर करते हैं।
सोशल मीडिया पर लिए मजे
एक और व्यक्ति ने मजाक में कहा कि शायद इसे इंस्टाग्राम पर पोस्ट करें। हाल ही में CJP आंदोलन के जोर पकड़ने के साथ ही PM मोदी इंस्टाग्राम पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं, जिसे युवाओं के बीच ज्यादा लोकप्रिय सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म माना जाता है। इस पर गोपीनाथन ने मोदी पर एक और तंज कसा। उन्होंने कहा कि कैमरा एंगल सेट कर रहा हूं… नया टेलीप्रॉम्प्टर लगवा रहा हूं। तुरंत एक और जवाब आया, लेकिन पहले अपने मेकअप आर्टिस्ट और कॉस्ट्यूम तैयार करवा लीजिए। गोपीनाथन ने फिर जवाब दिया कि वे सब इस्तीफा दे चुके हैं।
गोपीनाथन ने इस्तीफा क्यों दिया
गोपीनाथन ने कई बार कहा है कि उन्होंने 2019 में आर्टिकल 370 को कमजोर करने के बाद जम्मू-कश्मीरको बंद करने के मोदी सरकार के फैसले के विरोध में इस्तीफा दिया था। उन्होंने पिछले साल के अंत में कांग्रेस में शामिल होने के एक कार्यक्रम में कहा था कि आर्टिकल 370 को हटाना सरकार का फैसला हो सकता है। लेकिन अगर आप पूरे राज्य को बंद करने, सभी पत्रकारों, सांसदों और पूर्व मुख्यमंत्रियों को जेल में डालने, और ट्रांसपोर्ट, कम्युनिकेशन व इंटरनेट बंद करने का फैसला करते हैं, तो क्या यह सही है? यह सवाल सिर्फ मेरे लिए नहीं, बल्कि हम सबके लिए है। क्या किसी लोकतांत्रिक देश में ऐसा होना सही हो सकता है? क्या इसके खिलाफ आवाज नहीं उठाई जानी चाहिए थी? मैंने वह सवाल उठाया था, और आज भी मैं अपनी बात पर कायम हूं।
2018 में चर्चा में आए थे गोपीनाथन
गोपीनाथन 2018 में केरल बाढ़ के दौरान वॉलंटियर के तौर पर काम करने की वजह से चर्चा में आए थे। 2019 में वे नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के खिलाफ एक प्रमुख आवाज बनकर उभरे थे। केंद्र सरकार ने अगस्त 2019 में भारतीय संविधान के अनुच्छेद 370 को प्रभावी रूप से खत्म कर दिया, जिससे जम्मू-कश्मीर को मिला विशेष दर्जा समाप्त हो गया और राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों – जम्मू-कश्मीर और लद्दाख – में बांट दिया गया। अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद से ही जम्मू-कश्मीर की क्षेत्रीय राजनीतिक पार्टियां राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग करती रही हैं।
इस्तीफे के बारे में क्या जानकारी है?
गोपीनाथन के इस्तीफे पर सरकार की ओर से कोई अंतिम फैसला नहीं आया है। इस साल की शुरुआत में ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ और अन्य प्रकाशनों ने अज्ञात सूत्रों के हवाले से बताया था कि गोपीनाथन के इस्तीफे पर अंतिम सिफारिश अभी कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (DoPT) को नहीं भेजी गई थी। DoPT सीधे प्रधानमंत्री की देखरेख में काम करता है, इसलिए यह मामला अमित शाह के नेतृत्व वाले गृह मंत्रालय के पास ही लंबित पड़ा रहा।
इस्तीफा देने वाले दूसरे आईएएस अफसरों का जिक्र
उन्होंने बताया कि नौकरी छोड़ने वाले दूसरे लोगों के इस्तीफे मंजूर हो गए थे। उदाहरण के लिए, उनके पूर्व सहयोगी शशिकांत सेंथिल, जिन्होंने 2019 में IAS छोड़ा था, का इस्तीफ़ा 2022 में मंज़ूर हुआ। सेंथिल ने भी मोदी सरकार के दौर में भारतीय लोकतंत्र की हालत से निराशा का ज़िक्र किया था, और अभी वह तमिलनाडु के तिरुवल्लुर निर्वाचन क्षेत्र से कांग्रेस सांसद हैं।
जम्मू-कश्मीर कैडर के IAS अधिकारी शाह फैसल का भी जिक्र किया गया। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु के IPS अधिकारी के. अन्नामलाई जैसे अन्य लोगों ने 2019 में नौकरी छोड़ी, उसी साल उनका इस्तीफा मंजूर हो गया।
गोपीनाथन ने अक्टूबर 2025 में कहा था कि मेरे इस्तीफे के दो महीने बाद, सरकार ने मेरे खिलाफ ‘काम में लापरवाही’ और मीडिया में सरकार की आलोचना करने के लिए कार्रवाई शुरू की… लेकिन उस मामले को बंद हुए भी दो-तीन साल हो चुके हैं। यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन (UPSC) ने मुझे बताया कि मैंने सरकार में रहते हुए ही सरकार की आलोचना की थी, इसलिए मेरा पे-स्केल कम कर दिया जाएगा। लेकिन मुझे तो सैलरी मिल ही नहीं रही है, तो कौन सा पे-स्केल कम किया जाएगा?

