Digital Wallet: डिजिटल दुनिया में अब ज्यादातर लोग ऑनलाइन काम करने लगे हैं. ऑनलाइन पेमेंट से लेकर एप्लीकेशन फॉर्म भरने तक, ज्यादातर चीजें अब ऑनलाइन संभव हो चुकी हैं. अब लोग ऑनलाइन पेमेंट करते हैं. आज कई सारे ऑनलाइन पेमेंट ऐप मौजूद हैं जहां पर यूजर्स को वो डिजिटल वॉलेट का ऑप्शन देते हैं जहां पर पैसे डॉयरेक्ट बैंक से कटने की जगह पर ऐप के वॉलेट से कटते हैं. लेकिन बढ़ती टेक्नोलॉजी के साथ ही साइबर फ्रॉड का खतरा भी काफी बढ़ चुका है. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या डिजिटल वॉलेट का इस्तेमाल करना पूरी तरह से सुरक्षित है या नहीं. आइए जानते हैं डिजिटल वॉलेट से क्या-क्या खतरे हो सकते हैं.
क्या होता है डिजिटल वॉलेट?
दरअसल, डिजिटल वॉलेट एक ऐसा ऐप या ऑनलाइन सिस्टम होता है जिसमें पेमेंट से जुड़ी जानकारी को डिजिटल तरीके से इस्तेमाल किया जाता है. इसमें बैंक अकाउंट, कार्ड या दूसरे पेमेंट तरीकों को लिंक करके पेमेंट किया जाता है. इसमें यूजर को हर बार कैश या कार्ड निकालने की जरूरत नहीं होती है.
हालांकि, डिजिटल वॉलेट और UPI एक ही चीज नहीं हैं. बता दे कि UPI सीधे बैंक अकाउंट से पेमेंट करने की सुविधा देता है तो वहीं, डिजिटल वॉलेट में पैसा ऐप में मौजूद रहता है और उसे बाद में कहीं भी इस्तेमाल किया जा सकता है.
फर्जी कस्टमर केयर से रहें सावधान
इसके साथ ही कई बार लोग इंटरनेट पर डिजिटल वॉलेट का कस्टमर केयर नंबर सर्च करते हैं और फर्जी नंबर पर कॉल कर बैठते हैं. अब लोगों को पता ही नहीं होता है कि जिससे वो बात कर रहे होते हैं वो कोई कस्टमर केयर वाला नहीं बल्कि खुद ठग होते हैं. ये अपराधी कॉल पर लोगों से उनकी समस्या को ठीक करने के नाम पर उनसे OTP, PIN या स्क्रीन शेयर करने को भी कहते हैं. ऐसे में ध्यान रखें, OTP, UPI PIN, पासवर्ड या कार्ड का CVV किसी के साथ शेयर नहीं करना चाहिए.
फिशिंग और फर्जी लिंक का खतरा
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अब साइबर ठग भी काफी एडवांस हो चुके हैं. बता दें कि फिशिंग के लिए सबसे आसान टार्गेट अब डिजिटल वॉलेट यूजर्स बन चुके हैं. साइबर अपराधी बैंक, वॉलेट कंपनी या कस्टमर केयर अधिकारी बनकर मैसेज भेजते हैं.
इनमें अक्सर किसी लिंक पर क्लिक करने, KYC अपडेट करने या अकाउंट वेरिफाई करने के लिए कहा जाता है. ऐसे लिंक पर जानकारी देने से आपका पासवर्ड, कार्ड डिटेल या दूसरी जरूरी जानकारी ठगों तक पहुंच जाती है.
फोन चोरी होने पर बढ़ सकता है जोखिम
अगर स्मार्टफोन चोरी या गुम हो जाए और उसमें डिजिटल वॉलेट या पेमेंट ऐप लॉग-इन हो तो खतरा बढ़ सकता है. फोन में कमजोर स्क्रीन लॉक होने पर कोई व्यक्ति आपके ऐप्स तक आसानी से पहुंच जाता है. इसलिए मजबूत PIN या पासकोड का इस्तेमाल करना यूजर्स के लिए ज्यादा बेहतर ऑप्शन होता है.
डिजिटल वॉलेट को सुरक्षित कैसे रखें?
आपको बता दें कि डिजिटल वॉलेट इस्तेमाल करते समय कुछ छोटी सावधानियां बरतने से आप बड़े नुकसान से बच सकते हैं. ऐप को हमेशा अपडेट रखें, फोन में स्क्रीन लॉक लगाएं और अनजान लिंक से दूरी बनाकर रखें. किसी भी व्यक्ति के कहने पर रिमोट-एक्सेस या स्क्रीन-शेयरिंग ऐप इंस्टॉल न करें. इसके अलावा, बैंक और पेमेंट ऐप से आने वाले अलर्ट पर नजर रखें. साथ ही किसी अनजान ट्रांजैक्शन की जानकारी मिले तो तुरंत संबंधित बैंक से कॉनटेक्ट करना चाहिए.
हालांकि, डिजिटल वॉलेट और UPI एक ही चीज नहीं हैं. बता दे कि UPI सीधे बैंक अकाउंट से पेमेंट करने की सुविधा देता है तो वहीं, डिजिटल वॉलेट में पैसा ऐप में मौजूद रहता है और उसे बाद में कहीं भी इस्तेमाल किया जा सकता है.

