Close Menu
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Trending
    • छत्तीसगढ़ के PWD विभाग में 84 अधिकारियों के तबादले:29 कार्टोग्राफर, 14 असिस्टेंट ग्रेड-1 और 41 असिस्टेंट ग्रेड-2 के कर्मचारी भी शामिल
    • राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु को राज्यपाल श्री रमेन डेका ने भेंट की पहाड़ी मैना की प्रतिकृति
    • कातिल पति का गूगल सर्च आया सामने-‘अगर पत्नी आत्महत्या कर ले तो क्या पति जिम्मेदार?’ फिर कर दी प्रेग्नेंट वाइफ की हत्या…
    • अबूझमाड़ के मुहाने पर जलापूर्ति की नई मिसाल जल जीवन मिशन से बदली ग्राम कचोरा की तस्वीर
    • कृषि उत्पादन आयुक्त श्री सिद्धार्थ कोमल परदेशी की अध्यक्षता में कृषि एवं संबद्ध विभागों की संभागीय बैठक सम्पन्न
    • कौन हैं निर्मला सीतारमण के पति परकला प्रभाकर जो प्रकाश राज और अभिजीत दिपके साथ CJP का प्रदर्शन में शामिल होंगे
    • पूरा परिवार संघ का है…PM मोदी ने गुजरात के दिवंगत BJYM कार्यकर्ता के पिता को लगाया फोन, भावुक ऑडियो आया सामने
    • आशुतोष-सौरव को जमानत कोई जीत नहीं, शायना एनसी ने कहा- कोर्ट को भी लगा ये लोग अशांति फैला सकते हैं
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Chhattisgarh RajyaChhattisgarh Rajya
    Friday, October 23
    • खानपान-सेहत
    • फीचर
    • राशिफल
    • लेख-आलेख
    • व्यापार
    • बिलासपुर
    • रायपुर
    • भिलाई
    • राजनाँदगाँव
    • कोरबा
    Chhattisgarh RajyaChhattisgarh Rajya
    Home»लेख-आलेख»अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए न्याय और सुरक्षा का सुदृढ़ीकरण
    लेख-आलेख

    अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए न्याय और सुरक्षा का सुदृढ़ीकरण

    chhattisgarhrajya.inBy chhattisgarhrajya.inOctober 10, 2026
    Facebook Twitter WhatsApp Email Telegram
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn Pinterest Email

    एक न्यायपूर्ण और समावेशी समाज की नींव इस भरोसे पर टिकी होती है कि प्रत्येक नागरिक गरिमा, समानता और सुरक्षा के साथ जीवन यापन कर सके। अनुसूचित जातियों (एस.सी.) और अनुसूचित जनजातियों (एस.टी.) के लिए यह प्रतिबद्धता मजबूत संवैधानिक सुरक्षा उपायों,…

    एक न्यायपूर्ण और समावेशी समाज की नींव इस भरोसे पर टिकी होती है कि प्रत्येक नागरिक गरिमा, समानता और सुरक्षा के साथ जीवन यापन कर सके। अनुसूचित जातियों (एस.सी.) और अनुसूचित जनजातियों (एस.टी.) के लिए यह प्रतिबद्धता मजबूत संवैधानिक सुरक्षा उपायों, प्रभावी कानूनों और उत्तरदायी संस्थाओं के माध्यम से ठोस रूप लेती है। इसलिए, भारत सरकार ने अत्याचारों की रोकथाम, पीड़ितों की सुरक्षा और समय पर न्याय सुनिश्चित करने के लिए कानूनी और संस्थागत फ्रेमवर्क को लगातार मजबूत किया है। इस फ्रेमवर्क का आधार 2 प्रमुख कानून हैं-नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1955 और अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989। वर्षों से इन कानूनों को विधायी संशोधनों, बेहतर राहत और पुनर्वास प्रावधानों, विशेष न्यायिक तंत्रों, शिकायत-निवारण प्रणालियों तथा राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को वित्तीय सहायता के जरिए सुदृढ़ किया गया है।

    न्याय के लिए अधिक सशक्त कानूनी फ्रेमवर्क : जाति-आधारित अत्याचारों के प्रति संवेदनशील समुदायों की चुनौतियों का अधिक प्रभावी ढंग से समाधान करने के लिए एस.सी./एस.टी. अधिनियम, 1989 में उल्लेखनीय विकास हुआ है। इस दिशा में एक बड़ा कदम 26 जनवरी, 2016 से प्रभावी हुए संशोधनों के जरिए उठाया गया। इन संशोधनों में अपराधों की त्वरित सुनवाई के लिए अनन्य विशेष न्यायालयों की स्थापना और अनन्य विशेष लोक अभियोजकों की नियुक्ति का प्रावधान किया गया। अधिनियम में कई नए प्रकार के अत्याचारों को भी शामिल किया गया, जिससे एस.सी. और एस.टी. समुदायों को उपलब्ध कानूनी सुरक्षा का दायरा व्यापक हुआ।

    यह स्वीकार करते हुए कि न्याय केवल मामले के पंजीकरण और मुकद्दमे की सुनवाई तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि इसमें प्रभावित लोगों की सुरक्षा, गरिमा और पुनर्वास भी शामिल होना चाहिए। इसके बाद, 14 अप्रैल, 2016 को एस.सी./एस.टी. नियम, 1995 में संशोधन किए गए। इन संशोधनों ने राहत और पुनर्वास फ्रेमवर्क को मजबूत किया, अत्याचार के 47 अपराधों के लिए निर्धारित राहत राशि में वृद्धि की और पीड़ितों तथा उनके आश्रितों को समय पर वित्तीय सहायता के वितरण पर जोर दिया।

    समय पर न्याय सुनिश्चित करना : 20 अगस्त, 2018 को एस.सी./एस.टी. अधिनियम में किए गए संशोधन के माध्यम से और भी महत्वपूर्ण बदलाव पेश किए गए। इस संशोधन ने इस कानून के तहत मामलों में प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफ.आई.आर.) दर्ज करने से पहले प्रारंभिक जांच की अनिवार्यता को समाप्त कर दिया। इसके अलावा, अधिनियम के तहत अपराध के आरोपी व्यक्ति की गिरफ्तारी के लिए पूर्व अनुमति की आवश्यकता को भी हटा दिया गया। उद्देश्य बिल्कुल स्पष्ट था-प्रक्रियात्मक औपचारिकताएं एस.सी. और एस.टी. के खिलाफ अत्याचार से जुड़े अपराधों के पंजीकरण, जांच और अभियोजन में बाधा नहीं बननी चाहिएं। ये सुधार इस महत्वपूर्ण सिद्धांत को रेखांकित करते हैं कि कानून को केवल कागजों पर ही मजबूत नहीं होना चाहिए, बल्कि जब कोई पीड़ित सुरक्षा और न्याय की गुहार लगाए, तब उसे सुलभ और संवेदनशील भी होना चाहिए।

    त्वरित सुनवाई के लिए अनन्य विशेष न्यायालयों का सुदृढ़ीकरण: राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, एस.सी./एस.टी. (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के तहत अपराधों की सुनवाई के लिए 15 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 217 अनन्य विशेष न्यायालय स्थापित किए जा चुके हैं। अनन्य विशेष न्यायालयों की स्थापना और सुदृढ़ीकरण का उद्देश्य अधिनियम के तहत मामलों की त्वरित सुनवाई और प्रभावी निस्तारण को सुगम बनाना, साथ ही यह सुनिश्चित करना है कि पीड़ितों की पहुंच विशेष न्यायिक तंत्र तक हो।

    शिकायत निवारण को नागरिकों के निकट लाना : कानूनी सुरक्षा तभी सार्थक होती है जब नागरिक अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हों और उचित सहायता प्राप्त कर सकें। इसे ध्यान में रखते हुए, 13 दिसम्बर, 2021 को एस.सी. और एस.टी. पर अत्याचार के खिलाफ राष्ट्रीय हैल्पलाइन शुरू की गई, जिसे बाद में ‘संबल’ नाम दिया गया। टोल-फ्री नंबर 1800-202-1989 और शॉर्ट कोड हैल्पलाइन 14566 को एस.सी./एस.टी. अधिनियम के प्रावधानों के बारे में अधिक जागरूकता फैलाने और सूचना, मार्गदर्शन तथा शिकायत निवारण तंत्र तक पहुंच को आसान बनाने के लिए तैयार किया गया है। 

    जमीनी स्तर पर कार्यान्वयन को सुदृढ़ बनाना: किसी भी कानून की प्रभावशीलता अंतत: उसके क्रियान्वयन पर निर्भर करती है। इसलिए, सरकार ने हितधारकों तथा संबंधित मंत्रालयों और विभागों के साथ परामर्श के बाद पी.सी.आर. अधिनियम, 1955 और एस.सी./एस.टी. अधिनियम, 1989 के प्रभावी कार्यान्वयन को सुविधाजनक बनाने के लिए योजना दिशानिर्देश जारी किए हैं। सरकार ने कार्यान्वयन के दौरान सामने आने वाली व्यावहारिक चुनौतियों का भी समाधान किया है। स्पष्टता और एकरूपता लाने के लिए, 20 जून, 2025 को जारी एक स्पष्टीकरण में यह निर्धारित किया गया कि एस.सी./एस.टी. नियमों के तहत निर्धारित राहत राशि उस राज्य या केंद्र शासित प्रदेश द्वारा प्रदान की जाएगी, जहां अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। ऐसे उपाय महत्वपूर्ण हैं क्योंकि कानून के तहत उपलब्ध सुरक्षा तब भी प्रभावी रहनी चाहिए जब पीड़ित या उनके आश्रित राज्य या केंद्र शासित प्रदेश की सीमाओं से बाहर चले जाएं। 

    वर्ष 2014-15 से अब तक इस योजना के तहत 5,012.17 करोड़ रुपए की केंद्रीय सहायता जारी की जा चुकी है। इस अवधि के दौरान, अत्याचार के लगभग 7,26,588 पीड़ितों को राहत प्रदान की गई, जबकि 2,21,716 जोड़ों को अंतरजातीय विवाह के लिए प्रोत्साहन राशि प्राप्त हुई है। हमारी प्रतिबद्धता केवल अत्याचार होने के बाद प्रतिक्रिया देने तक सीमित नहीं है। यह समान रूप से रोकथाम, जागरूकता, संस्थागत जवाबदेही, समय पर राहत, पुनर्वास और ऐसी परिस्थितियां बनाने के बारे में भी है, जिसमें प्रत्येक नागरिक गरिमा के साथ और बिना किसी डर के जी सके।-रामदास अठावले(केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री)

    Share. Facebook Twitter Telegram WhatsApp Email
    chhattisgarhrajya.in
    chhattisgarhrajya.in
    • Website

    Related Posts

    सी.जे.पी. ने अपनी क्षमता से कहीं बड़ा लक्ष्य चुन लिया

    October 22, 2026

    जनसंघ के 75 वर्ष: दीपक से कमल तक, राष्ट्रवाद की अखंड यात्रा

    October 22, 2026

    विकसित भारत के केंद्र में किसान को स्थापित कर सकता है ‘एग्रीवोल्टिक्स’

    October 22, 2026

    Address - Gayatri Nagar, Near Ashirwad Hospital, Danganiya, Raipur C.G.

    Chandra Bhushan Verma
    Owner & Editor
    Mobile - 9826237000 Email - chhattisgarhrajya.in@gmail.com
    Facebook X (Twitter) Instagram Pinterest
    • About Us
    • Contact Us
    • Privacy Policy
    • Terms and Conditions
    • Disclaimer
    © 2026 ThemeSphere. Designed by ThemeSphere.

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.