Close Menu
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Trending
    • सऊदी के हवाई अड्डों पर हमले के बाद अमेरिकी विदेश विभाग ने अपने नागरिकों के लिए जारी किया सुरक्षा अलर्ट
    • राज्यपाल से गेड़ी नर्तक अनिल गढ़ेवाल ने की भेंट
    • सहायक शिक्षक भर्ती-2026 के विस्तृत विज्ञापन में संशोधन, दिव्यांग अभ्यर्थियों को मिलेगा आवेदन का अवसर
    • राज्यपाल श्री रमेन डेका से प्रदेश के उत्कृष्ट खिलाड़ियों ने की सौजन्य भेंट
    • प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना,उत्कृष्ट कार्य के लिए छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले को मिला राष्ट्रीय सम्मान, मुख्यमंत्री श्री साय ने दी बधाई
    • IND vs WI : हैदराबाद में खेला जाएगा चौथा मुकाबला, यहां अभी तक T20 में अजेय है भारत
    • JNU की 11 छात्राओं के यौन उत्पीड़न आरोपों पर कांग्रेस मुख्यालय के बाहर BJP का प्रदर्शन, राहुल गांधी से पूछा सवाल
    • क्या नवरात्री व्रत के दौरान होता है थकान और कमजोरी?, क्लीवलैंड क्लिनिक से जानें बचने के 6 तरीके
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Chhattisgarh RajyaChhattisgarh Rajya
    Monday, October 12
    • खानपान-सेहत
    • फीचर
    • राशिफल
    • लेख-आलेख
    • व्यापार
    • बिलासपुर
    • रायपुर
    • भिलाई
    • राजनाँदगाँव
    • कोरबा
    Chhattisgarh RajyaChhattisgarh Rajya
    Home»खानपान-सेहत»रीढ़ की आवाज’ समय रहते सुनिए, उम्र का बदलाव अनदेखा करना घातक
    खानपान-सेहत

    रीढ़ की आवाज’ समय रहते सुनिए, उम्र का बदलाव अनदेखा करना घातक

    chhattisgarhrajya.inBy chhattisgarhrajya.inOctober 10, 2026
    Facebook Twitter WhatsApp Email Telegram
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn Pinterest Email

    लगभग 2 वर्ष पहले पीठ दर्द की शिकायत हुई, लापरवाही की और समझ में आया कि रीढ़ की देखभाल दर्द शुरू होने के बाद नहीं, बहुत पहले से की जानी चाहिए। स्वस्थ बने रहना है तो इसे गंभीरता से लेना हरेक के लिए आवश्यक है। शुरू में लगा कि दर्द 84 की उम्र का असर है और इलाज टालता रहा। डॉक्टर की सलाह पर एम.आर.आई. कराया तो एल2, एल3 में समस्या दिखाई दी। डॉक्टरों ने ऑपरेशन की सलाह तो दी लेकिन साथ में यह भी कहा कि खतरा बहुत है, इसलिए दूसरे विकल्प आजमा लें, सर्जरी तो अंतिम उपाय है। एंडोस्कोपी के लिए कहा, सोचकर कि सब ठीक होगा, अपने को तैयार कर लिया। 

    समय तय हो गया, जाने पर दोबारा एम.आर.आई. कराया तो रिपोर्ट देखकर डॉक्टर ने कहा कि शरीर अपनी मरम्मत खुद कर रहा है, साधारण इपीड्यूरल इंजैक्शन लगवाने की सलाह दी लेकिन तकलीफ कम होने की बजाय बढऩे लगी। उठते-बैठते, चलते-फिरते हर समय दर्द और यहां तक कि सौ-पचास कदम चलना भी मुश्किल। मुंबई में एक प्रसिद्ध स्पाइन सर्जन को दिखाया, जिन्होंने स्थिति देखकर सर्जरी की सलाह दी और यही एक कारगर विकल्प बताया और भरोसा दिया कि डरने की जरूरत नहीं, इसी उम्र में यह होता है और 90 और अधिक आयु वालों की सर्जरी के उदाहरण दिए और कहा कि ये अपना सामान्य कामकाज स्वयं करने योग्य हो गए हैं। सर्जरी कराने का निर्णय लिया। काफी आराम है और लगभग 2 महीने बाद जीवनशैली सामान्य रहने की उम्मीद है। इस पूरे अनुभव ने कई सवाल पैदा किए, आखिर हमारी रीढ़ कमजोर होनी कब शुरू होती है और क्या हम उसे पहले से संभाल सकते हैं? यह जानना क्या केवल बुजुर्गों के लिए जरूरी है या 20-25 साल के नौजवान के लिए भी?

    रीढ़ भी उम्र के साथ बदलती है : यह कहना कि उम्र बढऩे पर कमर दर्द होना स्वाभाविक है, पूरी तरह सही नहीं है। जैसे हमारे बाल सफेद होते हैं, त्वचा बदलती है, मांसपेशियों की ताकत धीरे-धीरे कम होती जाती है, वैसे ही रीढ़ में भी बदलाव आते हैं। रीढ़ की हड्डियों के बीच छोटी-छोटी डिस्क यानी शरीर के शॉक एब्जार्वर होते हैं। जब चलते हैं, दौड़ते हैं, झुकते हैं या वजन उठाते हैं, तो ये काफी काम करते हैं। उम्र के साथ इनमें लचीलापन कम हो सकता है और आसपास के जोड़ों में बदलाव आ सकते हैं। इसका मतलब यह नहीं कि 40 की उम्र में रीढ़ ‘खराब’ हो गई और 70 या इससे अधिक की उम्र में वह ‘खत्म’ हो गई।

    असल बात यह है कि शरीर में बदलाव और बीमारी, दो अलग बातें हैं। एम.आर.आई. में उम्र से जुड़े बदलाव दिखाई देते हैं लेकिन कोई खास दर्द नहीं होता। दूसरी तरफ किसी व्यक्ति को काफी दर्द हो सकता है, इसलिए समस्या कुछ और है। जरूरी है कि शरीर के क्षरण यानी डिजैनरेशन पर ध्यान दिया जाए, जो हरेक व्यक्ति के जीवन में होना निश्चित है और उसे रोका नहीं जा सकता लेकिन सही व्यायाम और खानपान से उसकी गति को नियंत्रित किया जा सकता है तथा अधिक आयु तक स्वस्थ रहकर जिया जा सकता है। कुछ लोगों में 30-40 की उम्र में ही शुरुआती बदलाव दिखाई दे सकते हैं, किसी में 50 के बाद। किसी में उससे भी देर से। यह उम्र के साथ-साथ हमारी दिनचर्या, शरीर की बनावट, वजन, शारीरिक गतिविधि, पुरानी चोट और मांसपेशियों के गठन जैसी कई चीजों पर निर्भर करता है। लेकिन एक बात निश्चित है, जितनी उम्र बढ़ती है, उतनी ही समझदारी से स्पाइन की देखभाल करनी जरूरी है।

    20-30 की उम्र में जब दर्द नहीं है, तब भी सावधान रहिए : आज का युवा 8-10 घंटे कम्प्यूटर पर काम करते हुए और मोबाइल पर झुककर कई घंटे निकाल देता है। जिम जाकर बहुत भारी वजन उठा सकता है। शरीर जवान है, इसलिए वह बहुत कुछ सह लेता है। लेकिन जवान शरीर का मतलब असीमित क्षमता नहीं है। छोटी चेतावनी को बड़ी समस्या मत बनने दीजिए। बार-बार हल्का दर्द हो तो पेनकिलर की बजाय डॉक्टर से सलाह लेने पर कारण पता चल जाएगा। अगर बीमारी की शुरुआत है, तो सही इलाज करना चाहिए क्योंकि बार-बार लौटने वाले दर्द का कारण समझना जरूरी है। दर्द शरीर की भाषा है। वह हमेशा खतरे की घंटी नहीं लेकिन उसे चुप करा देना समझदारी नहीं है।

    शरीर का रखरखाव : शरीर के साथ यह सोच खतरनाक है कि ‘जब तक चल रहा है, चलने दो।’ वजन बहुत बढ़ रहा है तो उसे नियंत्रित करने की कोशिश करें। मांसपेशियां कमजोर हो रही हैं तो व्यायाम करें। दिन का अधिकांश समय कुर्सी पर बीत रहा है तो बीच-बीच में उठें और चलें। 60 के बाद-आराम से ज्यादा जरूरी है सही ढंग से रहना। उम्र बढऩे पर चलना बंद करना नहीं, सही तरीके से चलते रहना है। कसरत का मतलब यह नहीं कि 70 साल का व्यक्ति जिम में भारी वजन उठाए।

    शरीर और विशेषकर कमर और रीढ़ की हड्डी से चेतावनियां शुरू हो जाती हैं। इसे हल्के में मत लीजिए। यह कुछ इस तरह की होती हैं। पहली, दर्द का बार-बार लौटना। दूसरी, पहले जितना चल नहीं पाना। तीसरी, दर्द पैर तक जाना और साथ में झनझनाहट, सुन्नपन या कमजोरी महसूस होना। चौथी, चलने का तरीका बदलना। झुककर चलने लगना, बार-बार बैलेंस बिगडऩा या पैर कमजोर लगना। यह सिर्फ ‘उम्र’ का तकाजा नहीं, बल्कि गंभीर बीमारी का संकेत है। इसके साथ ही अचानक मूत्र या शौच क्रिया में बदलाव या जांघों के बीच का हिस्सा सुन्न हो जाए या पैर की कमजोरी तेजी से बढ़े, तो तत्काल डॉक्टर की सलाह जरूरी है।

    सबसे जरूरी है कि जिस रीढ़ के सहारे हम बचपन में दौड़ते हैं, जवानी में काम करते हैं और उम्र बढऩे पर अपने पैरों पर खड़े रहना चाहते हैं, उसकी देखभाल युवावस्था की शुरुआत से ही हमारी आदत का हिस्सा बन जानी चाहिए। अपनी स्पाइन का ख्याल उस दिन से रखिए, जिस दिन वह बिल्कुल ठीक है क्योंकि स्वस्थ जीवन उस पर ही निर्भर है।-पूरन चंद सरीन

    Disclaimer : यहाँ दी गई जानकारी केवल सामान्य जागरूकता और शैक्षिक उद्देश्यों के लिए है। इसे किसी भी डॉक्टर या योग्य चिकित्सक की सलाह का विकल्प न समझें। स्वास्थ्य से जुड़ी किसी भी समस्या के लिए हमेशा अपने चिकित्सक या विशेषज्ञ से परामर्श करें।”

    Share. Facebook Twitter Telegram WhatsApp Email
    chhattisgarhrajya.in
    chhattisgarhrajya.in
    • Website

    Related Posts

    क्या नवरात्री व्रत के दौरान होता है थकान और कमजोरी?, क्लीवलैंड क्लिनिक से जानें बचने के 6 तरीके

    October 12, 2026

    किडनी के लिए जहर है क्रिएटिनिन, ऐसे रोकें…

    October 7, 2026

    खांसते-छींकते ही पेशाब निकल जाती है, जानें किस बीमारी हैं पीड़ित?

    October 6, 2026

    Address - Gayatri Nagar, Near Ashirwad Hospital, Danganiya, Raipur C.G.

    Chandra Bhushan Verma
    Owner & Editor
    Mobile - 9826237000 Email - chhattisgarhrajya.in@gmail.com
    Facebook X (Twitter) Instagram Pinterest
    • About Us
    • Contact Us
    • Privacy Policy
    • Terms and Conditions
    • Disclaimer
    © 2026 ThemeSphere. Designed by ThemeSphere.

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.