इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में विश्व खाद्य दिवस का आयोजन
विद्यार्थियों ने प्रदर्शित किए नवाचारी खाद्य उत्पाद एवं व्यंजन
रायपुर । इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर के अंतर्गत संचालित खाद्य प्रौद्योगिकी महाविद्यालय में आज विश्व खाद्य दिवस उत्साहपूर्वक मनाया गया। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में खाद्य सुरक्षा, पोषण, खाद्य प्रसंस्करण, खाद्यान्न की बर्बादी रोकने तथा खाद्य उद्योग में नवाचार एवं उद्यमिता को प्रोत्साहित करने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता खाद्य प्रौद्योगिकी महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. एस.एस. सेंगर ने की।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल ने कहा कि विश्व खाद्य दिवस हमें यह स्मरण कराता है कि पर्याप्त, सुरक्षित एवं पौष्टिक भोजन की उपलब्धता प्रत्येक व्यक्ति की बुनियादी आवश्यकता है। विश्वभर में खाद्य सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने तथा भुखमरी एवं कुपोषण जैसी चुनौतियों के समाधान के उद्देश्य से प्रतिवर्ष 16 अक्टूबर को विश्व खाद्य दिवस मनाया जाता है। यह दिवस वर्ष 1945 में संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) की स्थापना की स्मृति में मनाया जाता है। उन्होंने कहा कि बढ़ती जनसंख्या, जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक संसाधनों पर बढ़ते दबाव तथा खाद्यान्न की बर्बादी जैसी चुनौतियों को देखते हुए खाद्य उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ उपलब्ध खाद्य संसाधनों का समुचित उपयोग सुनिश्चित करना भी आवश्यक है।
कुलपति डॉ. चंदेल ने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे खाद्य प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अर्जित ज्ञान एवं कौशल का उपयोग करते हुए नवाचारी खाद्य उत्पाद विकसित करें तथा खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में स्वयं के उद्योग एवं व्यवसाय स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ें। उन्होंने कहा कि वर्तमान प्रतिस्पर्धात्मक युग में खाद्य उद्योग में सफलता प्राप्त करने के लिए केवल नए विचार होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उत्पादों की बाजार मांग, आकर्षक स्वरूप स्वाद, गुणवत्ता, पौष्टिकता, पैकेजिंग तथा उपभोक्ताओं की पसंद का भी विशेष ध्यान रखना आवश्यक है। विद्यार्थियों को ऐसे खाद्य उत्पाद विकसित करने चाहिए जो स्वास्थ्यवर्धक होने के साथ-साथ बाजार की आवश्यकताओं के अनुरूप भी हों।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में धान, लघु धान्य फसलों, दलहनी, तिलहनी तथा विभिन्न उद्यानिकी उत्पादों के प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन की व्यापक संभावनाएं हैं। स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कृषि उत्पादों से नवाचारी एवं गुणवत्तापूर्ण खाद्य सामग्री विकसित कर युवा उद्यमिता और स्वरोजगार के नए अवसर सृजित कर सकते हैं। इससे किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिलने के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। इस अवसर पर खाद्य प्रौद्योगिकी महाविद्यालय के विद्यार्थियों द्वारा खाद्य प्रसंस्करण की विभिन्न तकनीकों के माध्यम से निर्मित विविध खाद्य उत्पादों एवं व्यंजनों की आकर्षक प्रदर्शनी लगाई गई। विद्यार्थियों ने खाद्य प्रौद्योगिकी पर केंद्रित प्रस्तुतियां भी दीं। कुलपति डॉ. चंदेल एवं अन्य अतिथियों ने प्रदर्शनी का अवलोकन किया तथा विद्यार्थियों से उनके द्वारा विकसित खाद्य उत्पादों, निर्माण प्रक्रिया, विशेषताओं एवं उपयोगिता के संबंध में जानकारी प्राप्त की।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए खाद्य प्रौद्योगिकी महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. एस.एस. सेंगर ने अतिथियों का स्वागत किया तथा महाविद्यालय की शैक्षणिक गतिविधियों एवं उपलब्धियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने खाद्य प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में शिक्षा, अनुसंधान एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण के महत्व को रेखांकित किया। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. कपिल देव दीपक, कृषि महाविद्यालय रायपुर की अधिष्ठाता डॉ. आरती गुहे, अधिष्ठाता छात्र कल्याण डॉ. संजय शर्मा, वित्त नियंत्रक श्रीमती मनीषा नाग एवं उप वित्त नियंत्रक श्री सचिन शर्मा उपस्थित थे।
इस अवसर पर आयोजित प्रदर्शनी में विद्यार्थियों के ज्ञान, रचनात्मकता, वैज्ञानिक दृष्टिकोण एवं व्यावहारिक कौशल को प्रोत्साहित करने के लिए फूड क्विज प्रतियोगिता, ई-पोस्टर प्रस्तुति, फूड स्टॉल प्रतियोगिता तथा फूड स्टॉल सजावट प्रतियोगिता आयोजित की गईं। इन गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों ने खाद्य प्रसंस्करण, गुणवत्ता, सुरक्षा, पोषण एवं नवीन तकनीकों से संबंधित विषयों पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
फूड स्टॉल प्रतियोगिता कार्यक्रम का विशेष आकर्षण रही। इसमें विद्यार्थियों ने ’’फायरलेस कुकिंग, छत्तीसगढ़ के पारंपरिक व्यंजनों तथा नवीन खाद्य उत्पादों’’ को प्रस्तुत किया। विद्यार्थियों ने पारंपरिक व्यंजनों की विशेषताओं, उनके सांस्कृतिक महत्व और स्थानीय खाद्य परंपराओं के संरक्षण की आवश्यकता को रेखांकित किया। फायरलेस कुकिंग के माध्यम से बिना आग के भोजन तैयार करने की रचनात्मक विधियों का प्रदर्शन किया गया। नवीन खाद्य उत्पादों ने विद्यार्थियों की कल्पनाशीलता, उद्यमशीलता और खाद्य प्रौद्योगिकी के प्रति उनकी रुचि को प्रदर्शित किया। लगभग 100 विद्यार्थियों ने विभिन्न गतिविधियों में उत्साहपूर्वक भाग लिया।

