मध्य प्रदेश यूथ कांग्रेस में इन दिनों अंदरूनी नाराजगी खुलकर सामने आने लगी है। 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित राहुल गांधी के कार्यक्रम में शामिल नहीं हो पाने के कारण यूथ कांग्रेस के करीब 60 नेताओं को निलंबित किए जाने का मामला तूल पकड़ रहा है। संगठन की इस कार्रवाई से प्रभावित नेताओं में भारी नाराजगी है। उनका आरोप है कि बिना किसी कारण बताओ नोटिस और पक्ष रखने का मौका दिए सीधे निलंबन की कार्रवाई कर दी गई। निलंबित नेताओं का कहना है कि वे वर्षों से संगठन के लिए काम कर रहे हैं, आंदोलनों में हिस्सा ले रहे हैं और कई बार जेल भी जा चुके हैं, लेकिन मुश्किल पारिवारिक परिस्थितियों में कार्यक्रम में शामिल नहीं हो पाने पर संगठन ने उनकी सेवाओं को नजरअंदाज कर दिया। निलंबित यूथ कांग्रेस के जनरल सेक्रेटरी रोहित राजोरिया ने इस कार्रवाई को अपने साथ अन्याय बताते हुए संगठन के राष्ट्रीय नेतृत्व और हाईकमान के सामने अपनी बात रखने की बात कही है।

ऐप और बारकोड स्कैनर से पकड़ी गई ‘अनुपस्थिति’
यूथ कांग्रेस ने रैली में अपने नेताओं की मौजूदगी दर्ज करने के लिए हाई-टेक तरीका अपनाया था, जिसने कई गैरहाजिर नेताओं की पोल खोल दी।
मिंटो रोड असेंबली पॉइंट पर बारकोड स्कैनर लगाए गए थे और सभी राष्ट्रीय, राज्य व जिला स्तर के पदाधिकारियों को ‘With IYC’ ऐप के जरिए अपनी अटेंडेंस दर्ज करने का सख्त निर्देश दिया गया था।
यूथ कांग्रेस का दावा है कि मिंटो रोड पर करीब 15,000 कार्यकर्ता जमा हुए थे, लेकिन ऐप पर महज 2,831 लोगों ने ही चेक-इन किया। समीक्षा में पाया गया कि तकनीकी जानकारी नहीं होने, इंटरनेट की कम स्पीड और सुस्ती के कारण ज्यादातर पदाधिकारियों ने रजिस्ट्रेशन ही नहीं कराया।

चाचा के निधन के कारण नहीं पहुंच पाए दिल्ली, सोशल मीडिया से मिली निलंबन की जानकारी
निलंबित यूथ कांग्रेस जनरल सेक्रेटरी रोहित राजोरिया ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि उन्होंने संगठन के लिए लंबे समय तक रात-दिन मेहनत की है और अपना खून-पसीना लगाया है। इसके बावजूद उनके साथ जिस तरह का व्यवहार हुआ, उससे वह बेहद दुखी हैं। राजोरिया के मुताबिक, वह 15 अक्टूबर को दिल्ली से अपने घर लौटे थे और अगले ही दिन यानी 16 अक्टूबर को उनके चाचा का निधन हो गया। परिवार में हुई इस दुखद घटना के कारण वह मानसिक और पारिवारिक परेशानी से गुजर रहे थे। इसी वजह से 1 नवंबर को रामलीला मैदान में आयोजित राहुल गांधी के कार्यक्रम में शामिल नहीं हो सके। उन्होंने बताया कि संगठन की ओर से न तो उनसे कोई संपर्क किया गया और न ही उनकी पारिवारिक स्थिति जानने की कोशिश हुई। उन्हें अपने निलंबन की जानकारी भी सोशल मीडिया के जरिए मिली। राजोरिया ने कहा कि इस कार्रवाई से उन्हें काफी मायूसी हुई है। परिवार में पहले से दुख का माहौल था और संगठन के इस फैसले ने उनकी मानसिक परेशानी और बढ़ा दी।
बिना नोटिस और जवाब का मौका दिए निलंबन पर उठाए सवाल
रोहित राजोरिया ने संगठन की कार्रवाई की प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि किसी भी कार्यकर्ता के खिलाफ कार्रवाई करने से पहले उसे कारण बताओ नोटिस दिया जाना चाहिए। संबंधित व्यक्ति का पक्ष सुनने और उसके कारणों की जांच करने के बाद ही कोई फैसला लिया जाना चाहिए। यदि कोई कार्यकर्ता बार-बार नोटिस मिलने के बावजूद संगठन के प्रति निष्क्रिय रहता है, तभी उसे संगठन से अलग करने की प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए। राजोरिया ने सवाल उठाया कि आखिर बिना जवाब मांगे और बिना कारण बताओ नोटिस जारी किए करीब 60 लोगों को निलंबित कैसे कर दिया गया? उन्होंने कहा कि यह सिर्फ उनके साथ नहीं, बल्कि उन सभी कार्यकर्ताओं के साथ अन्याय है, जिन्होंने संगठन के लिए लंबे समय तक काम किया है। उन्होंने इस मामले को हाईकमान के सामने उठाने और अपने साथ न्याय की मांग करने की बात कही।

