नई दिल्ली 05 दिसम्बर 2024। भूटान नरेश जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक दो दिवसीय दौरे पर भारत पहुंचे। गुरुवार को नई दिल्ली पहुंचने पर विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने गर्मजोशी से स्वागत किया। उनके साथ रानी जेटसन पेमा वांगचुक और वरिष्ठ अधिकारी भी थे। जयशंकर ने एक्स पर लिखा, आज नई दिल्ली पहुंचने पर भूटान के महामहिम राजा जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक का स्वागत करते हुए मैं सम्मानित महसूस कर रहा हूं। उन्होंने आगे लिखा, उनकी यात्रा हमारी दोस्ती के अनूठे बंधन को और मजबूत करेगी। अपनी यात्रा के दौरान, भूटान नरेश राजनयिक संबंधों की समीक्षा के लिए भारतीय नेतृत्व के साथ कई द्विपक्षीय बैठकें करेंगे। विदेश मंत्रालय (एमईए) द्वारा जारी आधिकारिक प्रेस बयान में कहा गया है कि शुक्रवार को समाप्त होने वाली यह उच्च स्तरीय यात्रा दोनों पड़ोसी देशों के बीच गहरे संबंधों और आपसी सम्मान का प्रतीक है। भूटान नरेश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मिलेंगे, जो दोनों देशों के बीच चल रही उच्च स्तरीय बैठकों में एक और अध्याय जोड़ेगा। इसके अलावा, जयशंकर और भारत सरकार के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भूटान नरेश से मुलाकात करने वाले हैं। प्रेस वक्तव्य के अनुसार, इन बैठकों का उद्देश्य मौजूदा सहयोग को मजबूत करना और द्विपक्षीय सहयोग के लिए नए रास्ते तलाशना है। भारत और भूटान के बीच असाधारण और अनुकरणीय संबंध हैं, जो आपसी विश्वास, सद्भावना और समझ पर आधारित हैं। इन संबंधों की नींव 1949 में पड़ी, जब दोनों देशों ने मैत्री और सहयोग की संधि पर हस्ताक्षर किए, जिसे फरवरी 2007 में विकसित गतिशीलता को दर्शाने के लिए रिन्यू किया गया। 1968 में औपचारिक राजनयिक संबंध स्थापित किए गए, जिसने इस स्थायी साझेदारी को और मजबूत किया।
दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों की एक उल्लेखनीय विशेषता उनकी आर्थिक परस्पर निर्भरता है। लगभग 50,000 भारतीय नागरिक भूटान में निर्माण, शिक्षा और विभिन्न प्रोजेक्ट्स में कार्यरत हैं। कुछ श्रमिक तो रोजाना भारत से भूटान के सीमावर्ती शहरों में अपनी नौकरी के लिए आते-जाते हैं।
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