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इंदौर में जहरीला पानी पीने से अब तक 8 लोगोंं की मौत, जांच कमेटी गठित

इंदौर: देशभर में स्वच्छता के लिए मिसाल माने जाने वाले इंदौर में ऐसा मामला सामने आया है, जिसने हर किसी को झकझोर कर रख दिया है. नर्मदा से आने वाला शुद्ध पानी ही लोगों की बीमारी और मौत की वजह बन गया. शहर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी पीने से अब तक 8 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि सैकड़ों लोग उल्टी-दस्त और पेट दर्द से जूझ रहे हैं.

नर्मदा जल सप्लाई बनी ज़हर

भागीरथपुरा की संकरी गलियों में रहने वाले लोगों की सुबह उस वक्त डर में बदल गई, जब एक-एक कर घरों से बीमार पड़ने की खबरें आने लगीं. महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों सभी की शिकायत एक जैसी थी. नल से आया नर्मदा का पानी पीते ही पेट दर्द शुरू हो गया, फिर उल्टी और दस्त. अस्पतालों में अचानक मरीजों की संख्या बढ़ गई. डॉक्टरों के अनुसार यह गंभीर जलजनित संक्रमण का मामला है. ओआरएस और दवाओं की मांग तेजी से बढ़ी और कई मरीजों को भर्ती करना पड़ा.

जांच में सामने आया चौंकाने वाला सच

नगर निगम ने हालात बिगड़ते देख तुरंत जांच शुरू की. शुरुआती जांच में जो सामने आया, उसने सभी को हैरान कर दिया. भागीरथपुरा पुलिस चौकी के टॉयलेट के ठीक नीचे नर्मदा की मुख्य पाइपलाइन में लीकेज मिला. इस लीकेज के कारण गंदा पानी सीधे नर्मदा की सप्लाई लाइन में मिल रहा था, जिससे पूरे वार्ड में दूषित पानी पहुंच गया. यानी जिस पानी को लोग “अमृत” समझकर पी रहे थे, वही उनके लिए ज़हर बन गया.

अस्पतालों में अफरा-तफरी

घटना के बाद पूरे वार्ड में डर का माहौल है. कई परिवारों ने नल का पानी पूरी तरह बंद कर दिया है. लोग बोतलबंद पानी पर निर्भर हो गए हैं. अस्पतालों के बाहर मरीजों और उनके परिजनों की भीड़ लगी हुई है. नगर निगम की लापरवाही पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं. सवाल यह भी है कि इतनी अहम पाइपलाइन के नीचे टॉयलेट कैसे बना? समय रहते लीकेज क्यों नहीं पकड़ा गया? अगर जांच देर से होती तो और कितनी जानें जातीं?

नगर निगम की कार्रवाई शुरू

नगर निगम ने प्रभावित इलाके की जल सप्लाई बंद कर दी है, पाइपलाइन की मरम्मत की जा रही है और टैंकरों से साफ पानी सप्लाई किया जा रहा है. स्वास्थ्य विभाग की टीमें घर-घर जाकर मरीजों की जांच कर रही हैं. स्वच्छता के शिखर पर बैठे इंदौर में यह घटना एक कड़वी चेतावनी बनकर सामने आई है साफ दिखने वाला शहर तब तक सुरक्षित नहीं, जब तक उसकी बुनियादी व्यवस्थाएं मजबूत न हों.

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