Close Menu
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Trending
    • मंत्रालय कर्मचारी संघ ने किया मुख्यमंत्री और वित्त मंत्री का भव्य स्वागत; कर्मचारियों के लिए ‘वेतन के विरुद्ध अल्पावधि ऋणयोजना’ का हुआ ऐतिहासिक शुभारंभ…
    • महादेव ऐप का संचालक सौरभ चंद्राकर ओमान में गिरफ्तार: फर्जी पासपोर्ट से प्रवेश का आरोप,भारत लाने की तैयारी शुरू…
    • दिल्ली के रोहिणी में गिरी बिल्डिंग, लोगों के दबे होने की आशंका, मलबे में फंसा दिखा शख्स…
    • मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व एवं वित्त मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी के प्रयासों से रायगढ़ में आधारभूत सुविधाओं का लगातार हो रहा विस्तार
    • सीएम योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के शिक्षकों और उनके परिवारों के लिए पांच लाख रुपए तक की मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना का किया शुभारंभ…
    • लोक निर्माण विभाग के सचिव ने रेलवे ओवर-ब्रिज एवं रेलवे अंडर-ब्रिज कार्यों की समीक्षा की
    • बिलासपुर में सनसनीखेज वारदात, शख्स पर कुल्हाड़ी से जानलेवा हमला
    • रात में हाईवे किनारे खड़ी गाड़ी में टायर बदलते समय हुआ रोंगटे खड़े कर देने वाला हादसा…4 की मौत
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Chhattisgarh RajyaChhattisgarh Rajya
    Wednesday, July 8
    • खानपान-सेहत
    • फीचर
    • राशिफल
    • लेख-आलेख
    • व्यापार
    • बिलासपुर
    • रायपुर
    • भिलाई
    • राजनाँदगाँव
    • कोरबा
    Chhattisgarh RajyaChhattisgarh Rajya
    Home»लेख-आलेख»हम भारत के लोग और हमारा सतत दायित्व-राजनाथ सिंह
    लेख-आलेख

    हम भारत के लोग और हमारा सतत दायित्व-राजनाथ सिंह

    chhattisgarhrajya.inBy chhattisgarhrajya.inJanuary 26, 2026
    Facebook Twitter WhatsApp Email Telegram
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn Pinterest Email

    आर्टिकल – भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद ने 16 मई 1952 को पहली लोकसभा को संबोधित करते हुए, संसद सदस्यों को उनके लोकतांत्रिक दायित्वों की गंभीरता का स्मरण कराया था। उन्होंने स्पष्ट किया था कि संविधान के लागू होते ही, राष्ट्रपति के निर्वाचन और पहले आम चुनाव के साथ स्वतंत्र भारत की लोकतांत्रिक यात्रा का प्रथम चरण पूरा हो चुका है और देश अब ऐसे दूसरे चरण में प्रवेश कर रहा है, जिसमें कोई विराम नहीं होगा। उनके अनुसार दूसरे चरण की लोकतान्त्रिक यात्रा तभी सफल होगी जब राज्य और शासन व्यवस्था जन-आकांक्षाओं की पूर्ति के लिए पूरी तरह समर्पित होगा।
    हमारे संविधान निर्माताओं ने शासन व्यवस्था के केंद्र में इस नैतिक दायित्व को स्थापित करके, राज्य और नागरिकों के बीच के संबंध को पुनः परिभाषित किया था। अब भारत के लोग किसी शासक की प्रजा नहीं, बल्कि अधिकारों से युक्त नागरिक बन चुके थे।
    लोकतंत्र की एक परिभाषा के अनुसार, लोकतंत्र का अर्थ होता है “ऑफ द पीपल, बाय द पीपल और फॉर द पीपल” यानि “जनता का, जनता द्वारा और जनता के लिए” शासन।
    हमारे संविधान की प्रस्तावना में यह साफ है कि हमारे देश में संप्रभुता जनता के हाथों में हैं और यह संविधान भारत के लोगो ने ही स्वयं के लिए गढ़ा हैं। इसलिए संविधान के अंगीकरण के साथ ही ‘ऑफ द पीपल’ का सिद्धांत, साकार हो गया था।
    दूसरा सिद्धांत- बाय द पीपल, वर्ष 1952 के पहले आम चुनावों के साथ स्थापित हुआ जब लोकसभा और विधानसभाओं के सदस्यों का निर्वाचन वयस्क मताधिकार के आधार पर हुआ।
    लेकिन लोकतंत्र का तीसरा महत्वपूर्ण सिद्धांत- फॉर द पीपल, एक निरंतर प्रक्रिया है। इसी निरंतर प्रक्रिया की बात डॉ राजेन्द्र प्रसाद ने की थी जब उन्होंने भारत की दूसरे चरण की यात्रा में कोई विराम न होने की बात कही थी।
    इन सारे तथ्यों से यह पूरी तरह स्पष्ट हो जाता है कि संविधान और लोकतंत्र की पूरी व्यवस्था के केंद्र में ‘हम भारत के लोग’ हैं और उनके सामाजिक और आर्थिक उत्थान का ध्येय है।
    यह ध्येय हमेशा भारत की राजनीतिक चेतना का अभिन्न अंग रहा है। प्राचीन भारत में “योग-क्षेम” का सिद्धांत व्यक्ति के कल्याण और सुरक्षा से जुड़ा हुआ था। महात्मा गांधी के “सर्वोदय” के विचार के केंद्र में भी सभी का उत्थान है। पंडित दीनदयाल उपाध्याय का “एकात्म मानववाद” और “अंत्योदय” के सिद्धांत भी व्यक्ति के सम्पूर्ण विकास और वंचित वर्गों के उत्थान पर केंद्रित हैं। विकास के केंद्र में नागरिकों को रखने की यह परंपरा वर्तमान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीति “सबका साथ, सबका विकास” में भी निहित है।
    वर्ष 2014 से प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में जनता केंद्रित शासन व्यवस्था की यह सोच सरकार की नीतियों और कार्यों में स्पष्ट दिखायी देती है। इससे संवैधानिक उद्देश्यों की पूर्ति को गति और शक्ति मिली है।
    संविधान में मौजूद नीति निदेशक तत्वों के अंतर्गत राज्य पर श्रमिकों के लिए मानवीय और न्यायपूर्ण परिस्थितियाँ सुनिश्चित करने का दायित्व है। इसी दिशा में कार्य करते हुए हाल में ही केंद्र सरकार ने 29 श्रम कानूनों को चार श्रम संहिताओं में पिरोया है। यह श्रमिकों के लिए बेहतर आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने की दिशा में बड़ा कदम है।
    संविधान राज्य को यह निर्देश देता है कि वह आर्थिक असमानताओं को कम करने के लिए निरंतर प्रयासरत रहे। इस उद्देश्य की पूर्ति तभी संभव है, जब समाज के हर वर्ग को शिक्षा और रोजगार के समान अवसर उपलब्ध हों। पिछले वर्षों में लिए गए कई महत्वपूर्ण नीतिगत फैसलों के चलते आज अवसरों की यह समानता हर स्तर पर बढ़ी है।
    इसका एक उल्लेखनीय उदाहरण स्टार्टअप इंडिया पहल है, जिसके हाल ही में दस वर्ष पूरे हुए हैं। इसके अंतर्गत प्रदान किये जाने वाले नीतिगत सहयोग, आर्थिक मदद, और मेंटरशिप के माध्यम से, आज किसी भी व्यक्ति के लिए एक उद्योग शुरू करना बहुत आसान हुआ है। दिसंबर 2025 तक देश में दो लाख से अधिक DPIIT-मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स की स्थापना, इस बात का प्रमाण है कि समान अवसरों की नीति किस तरह समावेशी आर्थिक विकास को गति दे सकती है। इस पूरे क्रम में सबसे अधिक प्रेरक बात यह है कि इन स्टार्ट-अप्स को शुरू करने वालों में बड़ी संख्या में पहली पीढ़ी के उद्यमी हैं।
    आर्थिक प्रगति तभी समावेशी बनती है, जब अवसरों की समानता हो। यह आय असमानता को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। पिछले 12 वर्षों में सभी आर्थिक नीतियाँ इसी विचार से प्रेरित रही हैं। इसी का परिणाम है कि आज भारत की आर्थिक प्रगति का लाभ प्रत्येक नागरिक तक समान रूप से पहुंच रहा है।
    विश्व बैंक के स्प्रिंग 2025 पावर्टी एंड इक्विटी ब्रीफ के अनुसार, भारत ने पिछले दशक में 17.1 करोड़ लोगों को ‘अत्यधिक गरीबी’ (Extreme Poverty) से भी बाहर निकाला है। सामाजिक रूप से पिछड़े व्यक्तियों के साथ-साथ आर्थिक रूप से कमजोर व्यक्तियों को भी आरक्षण का लाभ दिया गया है।
    केंद्र सरकार ने समावेशी विकास के साथ-साथ लोगों के लिए गरिमापूर्ण जीवन और सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने पर भी निरंतर ध्यान केंद्रित किया है। दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 और मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) अधिनियम, 2019 जैसे कानूनों के माध्यम से सामाजिक न्याय को और भी मजबूती मिली है।
    गरिमापूर्ण जीवन सुनिश्चित करने की इसी भावना का एक अच्छा उदाहरण स्वच्छ भारत मिशन (SBM) भी है। इस मिशन का नेतृत्व लोग स्वयं कर रहे हैं। और उन्होंने इसे जनांदोलन का स्वरूप प्रदान किया है। यह केवल स्वच्छता तक सीमित पहल नहीं थी, बल्कि उन करोड़ों लोगों की गरिमा को पुनर्स्थापित करने का प्रयास था, जो दशकों तक खुले में शौच करने को मजबूर थे।
    जनकल्याण की यही भावना ‘प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना’ और ‘प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना’ जैसी पहलों में भी साफ दिखती है। ‘प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना’ के तहत 80 करोड़ से अधिक लोगों को निःशुल्क खाद्यान्न उपलब्ध कराया जा रहा है। वहीं, ‘प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना’ कठिन समय में लाखों भारतीय परिवारों के लिए आशा की किरण बनकर उभरी है। इस योजना की 53 प्रतिशत लाभार्थी महिलाएँ हैं और 72 प्रतिशत से अधिक लाभार्थी ग्रामीण भारत से आते हैं। यह सामाजिक सुरक्षा के समावेशी होने का प्रमाण है।
    जब प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने ‘आत्मनिर्भर भारत’ का आह्वान किया था, तो वह केवल अर्थव्यवस्था के स्तर तक ही सीमित नहीं था, बल्कि नागरिकों के अंदर आत्म निर्भरता की भावना बढ़ाने का भी प्रयास था। इसलिए मुद्रा योजना और स्किल इंडिया मिशन जैसी पहलों के माध्यम से नागरिकों को स्वावलंबी और उद्यमशील बनाने पर बल दिया गया है। इन योजनाओं के केंद्र में “आत्मनिर्भर नागरिक” बनाना है जो “आत्मनिर्भर भारत” का आधार भी बन रहे है।
    इसी क्रम में आयुष्मान भारत योजना एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुई है। इससे आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को बहुत लाभ हुआ है जो धन के अभाव में अच्छी स्वास्थ्य सेवा से वंचित थे। इसी तरह जन धन योजना ने बड़ी संख्या में नागरिकों को फॉर्मल बैंकिंग से जोड़कर वित्तीय सुरक्षा प्रदान की है।
    “नारी शक्ति वंदन अधिनियम” के माध्यम से लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया है। इस अधिनियम में लोकतंत्र के तीनों सिद्धांत सशक्त अभिव्यक्ति पाते हैं क्योंकि विधायी संस्थाओं में महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ने से संप्रभुता का सामाजिक आधार तो बढ़ेगा ही, नीति-निर्माण भी ज्यादा समावेशी होगा।
    यानि लोकतांत्रिक सिद्धांत का तीसरा सूत्र- फॉर द पीपल, जिसके केंद्र में जन-कल्याण है, एक सतत दायित्व है, जिसे हर पीढ़ी को अपने समय में निभाना पड़ता है। गणतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती सिर्फ इस बात पर ही नहीं निर्भर है कि उसकी संस्थाएं कितनी मजबूत और दीर्घजीवी है बल्कि इस बात पर भी निर्भर करती हैं कि शासन व्यवस्था जनता के जीवन में कैसा बदलाव लाती है। हमें यह स्मरण रखना है कि भारतीय गणतंत्र की यात्रा सतत जारी रहनी चाहिए। यह हमारी जिम्मेदारी भी है। यह 77वां गणतंत्र दिवस सिर्फ़ इस दायित्व को स्मरण करने का ही अवसर नहीं हैं, बल्कि उससे आगे बढ़ कर यह संकल्प लेने का भी है कि “हम भारत के लोग” अपने लोकतांत्रिक और गणतांत्रिक मूल्यों को और अधिक गहराई से आत्मसात करें, उन्हें आचरण में उतारें, और यह सुनिश्चित करें कि शासन की हर दिशा और हर निर्णय के केंद्र में जनता और उसका कल्याण ही सर्वोपरि रहे।

    Share. Facebook Twitter Telegram WhatsApp Email
    chhattisgarhrajya.in
    chhattisgarhrajya.in
    • Website

    Related Posts

    स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को प्रोत्साहन – विकासशील अर्थव्यवस्थाओं की प्रगति का व्यावहारिक रास्ता

    July 8, 2026

    मानसून की तबाही : हर साल वही कहानी

    July 8, 2026

    आधुनिक तकनीक से वन संरक्षण को नई दिशा

    July 7, 2026

    Address - Gayatri Nagar, Near Ashirwad Hospital, Danganiya, Raipur C.G.

    Chandra Bhushan Verma
    Owner & Editor
    Mobile - 9826237000 Email - chhattisgarhrajya.in@gmail.com
    Facebook X (Twitter) Instagram Pinterest
    • About Us
    • Contact Us
    • Privacy Policy
    • Terms and Conditions
    • Disclaimer
    © 2026 ThemeSphere. Designed by ThemeSphere.

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.