Close Menu
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Trending
    • कोर्ट ने उठाया सख्त कदम बार-बार समन के बावजूद गैर-हाजिरी:महुआ मोइत्रा के खिलाफ जारी किया अरेस्ट वारंट
    • नवा रायपुर में ई-बसों के संचालन, कार्यालय भवन निर्माण सहित सड़क परियोजनाओं के प्रस्तावों पर हुआ विचार-विमर्श
    • मुख्यमंत्री ने ‘स्रोत महोत्सव 2026’ एवं राज्य स्तरीय कार्यशाला का किया शुभारंभ
    • समाज कल्याण मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े एवं स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल ने ली संयुक्त बैठक
    • उपराष्ट्रपति के 2 सितंबर को प्रस्तावित छत्तीसगढ़ प्रवास की तैयारियों की मुख्य सचिव ने की समीक्षा
    • प्राकृतिक खेती – सतत कृषि और आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम
    • कल है सावन मासिक दुर्गाष्टमी, पूजा की जरूरी सामग्री
    • BPSC AEDO परीक्षा धांधली, बायोमेट्रिक ऑपरेटर अतुल राज पांडे गिरफ्तार
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Chhattisgarh RajyaChhattisgarh Rajya
    Wednesday, August 19
    • खानपान-सेहत
    • फीचर
    • राशिफल
    • लेख-आलेख
    • व्यापार
    • बिलासपुर
    • रायपुर
    • भिलाई
    • राजनाँदगाँव
    • कोरबा
    Chhattisgarh RajyaChhattisgarh Rajya
    Home»लेख-आलेख»अराजकता का तुष्टिकरण, करदाता की उपेक्षा
    लेख-आलेख

    अराजकता का तुष्टिकरण, करदाता की उपेक्षा

    chhattisgarhrajya.inBy chhattisgarhrajya.inAugust 19, 2026
    Facebook Twitter WhatsApp Email Telegram
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn Pinterest Email

    यदि यह नई कुव्यवस्था इसी प्रकार प्रसारित-प्रचारित होती रही, तो आगामी पीढिय़ां न केवल अपनी जड़ों से कटेंगी, बल्कि वे उस अराजकता को ही अपना राष्ट्रीय चरित्र मान बैठेंगी, जिसे आज ‘युवा शक्ति’ और ‘जनरेशन जीनियस’ का आवरण पहनाया जा रहा है…

    वैसे तो अधिकांश अवसरों पर इस देश की राजनीति को अपरिपक्व राजनीति के रूप में ही देखा गया है, किंतु पहले के और आज के शासकों की राजनीतिक अपरिपक्वता में अनेक प्रकार के अंतर हैं। संभवत: ब्रिटिश राज से सांकेतिक स्तर पर मुक्त होने के बाद तत्कालीन शासन संभालने वाले राजनीतिक दल को बहुसंख्यक हिंदुओं के हितों के अनुरूप न चलने के लिए दोषी ठहरा कर लोकतांत्रिक न्यायालय में खड़ा किया जा सकता है। करने वालों ने ऐसा किया भी, किंतु तब भी बहुसंख्यक हिंदू जनों के हित में कोई भी लोकतांत्रिक न्याय नहीं हुआ। इसी परिप्रेक्ष्य में आज लगता है कि जिस राजनीतिक दल ने स्वतंत्रता के बाद से लेकर 2014 तक, इस देश पर, जिन लोगों के मतों के बल पर शासन किया, उसने उन्हीं बहुसंख्यक लोगों की लोकतांत्रिक इच्छाओं, अपेक्षाओं एवं महत्त्वाकांक्षाओं का अतिक्रमण कर निजी स्वार्थों व विदेशी षड्यंत्र के वशीभूत होकर शासन चलाया। था तो यह सब कुछ अनुचित, परंतु देखा जाए तो इसके लिए गुप्त, गहन एवं व्यापक राजनीतिक सूझबूझ की आवश्यकता थी। इतनी दीर्घावधि तक लोकतंत्र, संसद एवं संविधान की आड़ लेकर बहुसंख्यक लोगों का मताधिकार प्राप्त करना तथा उन्हीं की लोकतांत्रिक, संसदीय एवं सांविधानिक इच्छाओं का बिना ढोल पीटे दमन करना, वास्तव में येन-केन-प्रकारेण शासन करने की यही युक्ति साम-दाम-दंड-भेद कहलाती है। जनसंचार, न्यायालय, कार्यपालिका, विधायिका इन चारों स्तंभों को अपने हितानुरूप चलाने के लिए, जो कुछ किया जा सकता था, वह सब किया गया।

    धीरे-धीरे यह कुव्यवस्था सामान्य व्यवस्था में परिणत होती चली गई। सडक़ के नागरिकों से लेकर देश के शीर्ष पदों पर विराजित पदाधिकारियों ने इस कुव्यवस्था को पूरी तरह आत्मसात कर लिया। सैद्धांतिक रूप में ऐसी कुव्यवस्था, कुव्यवस्था न रही। एक मानव के लघु जीवनकाल में तीस-चालीस वर्षों की ऐसी कुव्यवस्था को चलाना और इसे ही आगामी समय के लिए एक स्थापित शासकीय मानदंड के रूप में प्रस्थापित कर देना, वास्तव में बहुत बड़ी उपलब्धि थी। अनुचित, अन्यायपूर्ण एवं लोकविरोधी ऐसी कुव्यवस्था आज तीसरी पीढ़ी के भारतीय नागरिकों तथा ऐसे नागरिकों के मतबल पर शासन में विराजित नए राजनीतिक दल के नेतृत्वकर्ताओं में भी प्रतिरूपक अनुपयोगी सिद्धांत बनकर गहरे पैठ चुकी है। इसी का दुष्परिणाम रहा जो तिलचट्टे बनकर आए कुछ लोग देश की राजधानी दिल्ली में एकत्र हुए, अराजकता फैलाई, असभ्यता प्रदर्शित की और बहुसंख्यक जनता द्वारा चयनित दल के केंद्रीय शासन में पदस्थापित एक शिक्षामंत्री का त्यागपत्र लेकर माने। इस प्रकरण में स्पष्ट रूप से कहा जा सकता है कि केंद्र में बारह वर्ष पूर्व स्थापित शासन विचित्र राजनीतिक निर्णयों के आधार पर अनुचित प्रतीत होता है। अराजकता, अभद्रता, असभ्यता प्रदर्शित करने तथा लोकविरोधी शासन के नीति-नियमों के विरुद्ध लगभग हर प्रकार का खटकर्म करने के बाद भी अधेड़ आयु के अधिसंख्य तिलचट्टों को चारों ओर से एक स्वर में ‘देश का युवा’ कहकर संबोधित किया जा रहा है। जिन न्यायाधीश महोदय ने ऐसी अराजक भीड़ को आरंभ में तिलचट्टा बोलकर संबोधित किया था, वे भी अब अकस्मात ऐसे युवा तिलचट्टों के समर्थन में अपने नए सकारात्मक वक्तव्य देने लगे हैं। शासन के अनेक नेता, राष्ट्रीय स्वयंसेवक प्रमुख, शासन पर विराजने के लिए गले तक आतुर विपक्ष के नेता, विपक्षी नेताओं के समर्थक डीप स्टेट गिरोह, स्वयं प्रधानमंत्री, न्यायाधीश, विभिन्न क्षेत्रों के प्रसिद्ध-प्रतिष्ठित लोग तथा देश का जनसंचार अर्थात मीडिया, ये सभी अकस्मात तिलचट्टों के सहायक बन चुके हैं।

    उनके समर्थक, उनके प्रति चिंता प्रदर्शित करने वाले तथा उनका महत्त्व समझने वाले बन चुके हैं। यदि ये सभी लोग वास्तविक रूप में संघर्षशील, संवेदनशील, अवसरों की प्राप्ति के लिए लालायित तथा देशभक्त युवाओं के बारे में सोचकर ऐसा हृदय-परिवर्तन प्रदर्शित करते तो प्रदर्शन समझने योग्य होता। यदि ये सभी शासकीय शक्तियां देश के उपयोगी लोगों के बारे में विचार करते हुए ऐसा विचार-परिवर्तन करते तो विचार स्वागत योग्य होता। दुर्भाग्य है कि ये सभी युवाओं की आड़ में अराजकता प्रदर्शित करते अराजक तत्वों के लिए अपना हृदय-परिवर्तन एवं विचार-परिवर्तन कर रहे हैं। लोकराज की व्यवस्था में कोई इन लोकतांत्रिक पदाधिकारियों से पूछे कि इन्हें लोकतंत्र में पदाधिकृत होने का अवसर जिन मतदाताओं के मतदान से प्राप्त हुआ है, वे तथाकथित जनरेशन जीनियस का हिस्सा नहीं हैं। वे विशुद्ध रूप से प्राकृतिक व्यक्ति हैं। एक सुव्यवस्थित लोकतांत्रिक व्यवस्था के पक्षसमर्थक हैं। परिश्रम करके अपनी जीविका चलाते हैं। देश की हर प्रकार की उन्नति में अपने परिश्रम का, कर्मदान का, आयकर आदि का सहयोग करते हैं। आज जो शासकीय शक्तियां, जनरेशन जीनियस के भेष में एकत्र और देशभर में फैले, अराजक तत्वों के प्रति चिंता प्रदर्शित कर रही हैं, उन शक्तियों को शक्तिसंपन्न बनाने में जेड-जी का नहीं, बल्कि देश के परिश्रमी नागरिकों एवं करदाताओं का योगदान है। शासन की प्रमुख शक्ति और अन्य शक्तियां यह भूल जाती हैं। यह सब देख, सुन, समझ और अनुभव करके यही विचार उभरता है कि इस देश की पिछले बारह वर्षों की केंद्रीय शासकीय शक्ति अर्थात राजनीतिक दल, राजनीतिक रूप से विवेकसंपन्न नहीं है। इस विवेकहीनता का सबसे दुखद पहलू यह है कि वर्तमान शासन प्रणाली भी उसी पुरानी तुष्टिकरण और आत्मसमर्पण की नीति का पुनरावर्तन कर रही है जिसे ध्वस्त करने के नाम पर उसने सत्ता का यह सिंहासन प्राप्त किया था। जब कोई व्यवस्था अपने निष्ठावान समर्थकों, मूक करदाताओं और संयमित बहुसंख्यक समाज के अधिकारों की बलि देकर सडक़ पर उपद्रव मचाने वाले अराजक समूहों के समक्ष नतमस्तक होने लगे, तब समझ लेना चाहिए कि उस सत्ता का पतन नैतिक रूप से आरंभ हो चुका है। अतीत के शासक जहां विदेशी षड्यंत्रों और छल-छद्म के बल पर बहुसंख्यकों को छलते रहे, वहीं वर्तमान शासक अपनी वैचारिक दुर्बलता और क्षणिक राजनीतिक लाभ के मोह में उसी छल को नए कलेवर में दोहरा रहे हैं। लोकतंत्र के नाम पर चलने वाला यह तमाशा वास्तव में देश के उस वास्तविक युवा और परिश्रमी वर्ग के मुंह पर तमाचा है, जो दिन-रात देश के निर्माण में अपना पसीना बहाता है, किंतु जिसकी लोकतांत्रिक समुचित वाणी को सत्ता के गलियारों में अनसुना कर दिया जाता है। इसके विपरीत, जनसामान्य को सुरक्षा प्रदान करने का दायित्व उठाने वाले प्रशासनिक और न्यायिक अंग भी जब लोक-लुभावन प्रतिक्रियाओं और मीडिया प्रायोजित आख्यानों के दास बन जाएं, तो न्याय की अंतिम आशा भी धूमिल होने लगती है।

    यह स्थिति मात्र एक राजनीतिक विफलता नहीं, बल्कि संपूर्ण राष्ट्र की सांस्कृतिक और सामाजिक चेतना के लिए एक गंभीर चेतावनी है। यदि यह नई कुव्यवस्था इसी प्रकार प्रसारित-प्रचारित होती रही, तो आगामी पीढिय़ां न केवल अपनी जड़ों से कटेंगी, बल्कि वे उस अराजकता को ही अपना राष्ट्रीय चरित्र मान बैठेंगी, जिसे आज ‘युवा शक्ति’ और ‘जनरेशन जीनियस’ का भ्रामक आवरण पहनाया जा रहा है। सत्ता और विपक्ष का यह गठजोड़, जिसमें डीप स्टेट से लेकर मुख्यधारा का मीडिया तक शामिल है, देश के बहुसंख्यक वर्ग को एक ऐसे अंतहीन भ्रमजाल की स्थिति में ढकेल रहा है जहां से बाहर निकलने का कोई सरल लोकतांत्रिक मार्ग शेष नहीं बचता। अंतत:, यदि देश के प्रबुद्ध और परिश्रमशील नागरिकों ने इस राजनीतिक अपरिपक्वता और तुच्छ स्वार्थों की राजनीति के विरुद्ध अपनी निष्क्रियता को भंग नहीं किया, तो यह देश हित में नहीं होगा।

    विकेश कुमार बडोला

    Share. Facebook Twitter Telegram WhatsApp Email
    chhattisgarhrajya.in
    chhattisgarhrajya.in
    • Website

    Related Posts

    प्राकृतिक खेती – सतत कृषि और आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम

    August 19, 2026

    इटली की प्रधानमंत्री मेलोनी पर अभद्र शब्द, बेहद शर्मनाक

    August 18, 2026

    स्टील फ्रेम का पुनर्निर्माण : शासन करने से लेकर सेवा तक, समयबद्ध सुधारों का सिलसिला

    August 18, 2026

    Address - Gayatri Nagar, Near Ashirwad Hospital, Danganiya, Raipur C.G.

    Chandra Bhushan Verma
    Owner & Editor
    Mobile - 9826237000 Email - chhattisgarhrajya.in@gmail.com
    Facebook X (Twitter) Instagram Pinterest
    • About Us
    • Contact Us
    • Privacy Policy
    • Terms and Conditions
    • Disclaimer
    © 2026 ThemeSphere. Designed by ThemeSphere.

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.