यौन उत्पीड़न के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे आसाराम को राजस्थान हाईकोर्ट से एक बार फिर राहत मिली है. कोर्ट ने मेडिकल ग्राउंड पर दी गई अंतरिम जमानत को 25 मई 2026 तक बढ़ा दिया है, या फिर उनकी अपील पर अंतिम फैसला आने तक जो भी पहले हो.
जमानत बढ़ाने की मांग क्यों?
आसाराम की ओर से पेश याचिका में उनकी बढ़ती उम्र, गंभीर बीमारियों और करीब 12 साल जेल में बिताने का हवाला दिया गया. उनके वकीलों ने अदालत को बताया कि वह 29 अक्टूबर 2025 से अंतरिम जमानत पर बाहर हैं और इलाज करा रहे हैं. यदि जमानत अवधि आगे नहीं बढ़ाई जाती है, तो उनका उपचार अधूरा रह जाएगा और उन्हें वापस जेल में सरेंडर करना पड़ेगा.
कोर्ट में क्या हुई बहस?
मामले की सुनवाई एक्टिंग चीफ जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस संगीता शर्मा की डिवीजन बेंच में हुई. आसाराम की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता देवदत्त कामत और अधिवक्ता यशपाल सिंह राजपुरोहित ने पैरवी करते हुए स्वास्थ्य स्थिति को गंभीर बताते हुए राहत की मांग की.
वहीं, राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता दीपक चौधरी ने विरोध करते हुए कहा कि जेल प्रशासन द्वारा समय-समय पर उनका उचित इलाज कराया जा रहा है और मेडिकल सुविधाओं की कमी नहीं है.
हाईकोर्ट का फैसला
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने अंतरिम जमानत को 25 मई 2026 तक या अपील पर फैसला आने तक बढ़ा दिया. साथ ही सुप्रीम कोर्ट द्वारा पूर्व में लगाई गई शर्तों को लगभग यथावत रखा गया है, हालांकि तीन कांस्टेबल की तैनाती की शर्त हटा दी गई है.
जमानत की शर्तें
01 इलाज के लिए बाहर रह सकते हैं
02 किसी धार्मिक सभा में शामिल नहीं होंगे
03 भीड़ एकत्र नहीं करेंगे
04 देश से बाहर नहीं जा सकेंगे
आगे क्या होगा?
महत्वपूर्ण बात यह है कि आसाराम की सजा के खिलाफ दाखिल अपील पर 20 अप्रैल 2026 को सुनवाई पूरी हो चुकी है और अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया है. ऐसे में अब सभी की नजर हाईकोर्ट के अंतिम फैसले पर टिकी है, जो इस मामले में आगे की दिशा तय करेगा.
दरअसल, आसाराम वर्ष 2013 से जोधपुर की सेंट्रल जेल में बंद है. वर्ष 2018 में उन्हें नाबालिग से रेप के मामले में दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी. इसके बाद से वह लगातार कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं और सजा के खिलाफ उनकी अपील राजस्थान हाईकोर्ट में लंबित है.

