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    Home»knowledge»सावधान! AI से ठगी का नया रास्ता आपका मुस्कुराना पड़ सकता हैं भारी…
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    सावधान! AI से ठगी का नया रास्ता आपका मुस्कुराना पड़ सकता हैं भारी…

    chhattisgarhrajya.inBy chhattisgarhrajya.inJune 12, 2026
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    आज के समय में टेक्नोलॉजी जितनी तेजी से आगे बढ़ रही है, साइबर ठग भी लोगों को चूना लगाने के उतने ही तरीके निकाल रहे हैं. अब ठगों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का सहारा लेना शुरू कर दिया है. इसी खतरे को देखते हुए गृह मंत्रालय के तहत काम करने वाले भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र ने एक अहम एडवाइजरी जारी की है.

    एडवाइजरी के मुताबिक, अगर कोई अनजान व्यक्ति नौकरी का ऑफर देकर आपसे वीडियो कॉल करने को कहे और बातचीत के दौरान आपको कैमरे की तरफ देखने, सिर घुमाने, पलक झपकाने या कुछ बोलने के लिए कहे, तो सावधान हो जाइए. आपकी यही छोटी-सी लापरवाही साइबर ठगों के लिए बड़ा हथियार बन सकती है. साइबर अपराधी अब AI की मदद से डीपफेक वीडियो और नकली डिजिटल पहचान बना रहे हैं. इनके जरिए फिर वे लोगों के बैंक खातों और वित्तीय सेवाओं तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं.

    कैसे काम करते हैं साइबर ठग, जानिए पूरा खेल

    सबसे पहले करते हैं संपर्क

    ठग सोशल मीडिया, व्हाट्सऐप और अन्य मैसेजिंग ऐप, जॉब पोर्टल, डेटिंग प्लेटफॉर्म या फोन कॉल के जरिए लोगों से संपर्क करते हैं. कई बार नौकरी का ऑफर या किसी जरूरी काम का बहाना बनाकर वीडियो कॉल भी की जाती है.

    चेहरे की जानकारी करते हैं इकट्ठा

    इसके बाद बातचीत के दौरान वे लोगों को स्क्रीन की तरफ देखने, सिर घुमाने, मुस्कुराने, पलक झपकाने या कुछ बोलने के लिए कहते हैं. इन गतिविधियों को चुपके से रिकॉर्ड कर लिया जाता है. कई मामलों में ठग सोशल मीडिया से भी लोगों की तस्वीरें और वीडियो जुटा लेते हैं.

    AI से तैयार होता है डीपफेक

    रिकॉर्ड किए गए वीडियो और आवाज को AI आधारित टूल्स में प्रोसेस किया जाता है. इसके बाद ठग व्यक्ति का ऐसा फर्जी वीडियो तैयार कर लेते हैं, जो बिल्कुल असली जैसा दिखाई देता है. इसमें चेहरे के हाव-भाव, आंखों की गतिविधियां और आवाज तक की नकल कर ली जाती है.

    सुरक्षा सिस्टम को दिया जाता है धोखा

    अगर किसी बैंक, फिनटेक कंपनी या डिजिटल प्लेटफॉर्म के पास डीपफेक पहचानने की मजबूत तकनीक नहीं है, तो ऐसे नकली वीडियो का इस्तेमाल कर फेस ऑथेंटिकेशन, लाइवनेस वेरिफिकेशन और वीडियो-केवाईसी को धोखा दिया जा सकता है.

    अपराधी वीडियो-केवाईसी कर बैंक खाते खुलवा सकते हैं, डिजिटल वॉलेट एक्टिव कर सकते हैं या वित्तीय खातों तक भी पहुंच हासिल कर सकते हैं. इसका इस्तेमाल आर्थिक धोखाधड़ी और अन्य आपराधिक गतिविधियों में किया जा सकता है.

    खुद को ऐसे रखें सुरक्षित

    • गृह मंत्रालय ने सलाह दी है कि सबसे पहले अनजान लोगों के साथ वीडियो कॉल पर सावधानी बरतें. 
    • किसी के कहने पर बार-बार चेहरे की मूवमेंट न करें या वीडियो कॉल पर सामने वाले की सारी बातें न मानें.
    • अपनी बायोमेट्रिक जानकारी को लॉक करके रखें.
    • ईमेल और मोबाइल पर आने वाले लॉगिन या ऑथेंटिकेशन अलर्ट पर नजर रखें.
    • मोबाइल नेटवर्क अचानक बंद हो जाए तो तुरंत अपने टेलीकॉम ऑपरेटर से संपर्क करें. यह सिम स्वैप फ्रॉड का संकेत हो सकता है.
    • इसके अलावा बैंक खाते या डिजिटल वॉलेट में किसी भी संदिग्ध गतिविधि को नजरअंदाज न करें.

    गृह मंत्रालय की एडवाइजरी में फाइनेंशियल इंस्टीट्यूट्स और फिनटेक कंपनियों को भी कस्टमर वेरिफिकेशन प्रोसेस को और मजबूत बनाने के निर्देश दिए गए हैं. उन्हें डीपफेक और AI से तैयार किए गए कंटेंट की पहचान करने वाले सिस्टम अपनाने की सलाह दी गई है.

    ठगी का शक हो तो तुरंत करें शिकायत

    वहीं, अगर आप अनजाने में इस तरह की ठगी का शिकार हो जाएं या आपको धोखाधड़ी, पहचान चोरी या किसी संदिग्ध लेनदेन का शक हो, तो बिना देरी किए राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल https://cybercrime.gov.in/ पर शिकायत दर्ज करें. शिकायत करते समय ठग का मोबाइल नंबर, वीडियो लिंक और अन्य उपलब्ध जानकारी जरूर शेयर करें. समय पर शिकायत करने से ठगी की रकम को रोका जा सकता है.

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