Close Menu
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Trending
    • किसकोड़ो, जहां कभी लगती थी नक्सलियों की चौपाल, वहीं उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने लगाई जनचौपाल
    • रायपुर शहर-ग्रामीण क्षेत्रीय सम्मेलन 28 जून को, सेवानिवृत्त विद्युत कर्मियों की समस्याओं पर होगी चर्चा
    • रात भर जागने की आदत बना सकती है बीमार, नींद का है कैंसर से गहरा कनेक्शन
    • पुलिस का बड़ा खुलासा, शादी टालने के लिए की मंगेतर केतन की हत्या, ताकी 3 साल तक मिले समय और प्रेमी से करले शादी
    • खालिस्तानी आतंकी खतरे को लेकर अलर्ट जारी, मंदिर, सरकारी ऑफिस और रेलवे स्टेशन निशाने पर 
    • जबरन वसूली और छेड़छाड़ के आरोप में पूर्व TMC पार्षद गिरफ्तार
    • प्राकृतिक चिकित्सा योग एवं अनुसंधान केंद्र,प्रकृति के वरदान से ठीक हो रहे देश-विदेश के लोग,’स्वास्थ्य मंदिर’ की कहानी…
    • साली से करना चाहता था निकाह, पत्नी ने किया विरोध तो करदी हत्या
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Chhattisgarh RajyaChhattisgarh Rajya
    Saturday, June 27
    • खानपान-सेहत
    • फीचर
    • राशिफल
    • लेख-आलेख
    • व्यापार
    • बिलासपुर
    • रायपुर
    • भिलाई
    • राजनाँदगाँव
    • कोरबा
    Chhattisgarh RajyaChhattisgarh Rajya
    Home»लेख-आलेख»पूर्व का ग्रोथ केंद्र बन सकता है बंगाल
    लेख-आलेख

    पूर्व का ग्रोथ केंद्र बन सकता है बंगाल

    chhattisgarhrajya.inBy chhattisgarhrajya.inJune 23, 2026
    Facebook Twitter WhatsApp Email Telegram
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn Pinterest Email

    सरकार बदलने के बाद आज परिस्थिति बदली है और आशा की जा सकती है कि भाजपा की स्थायी सरकार बनने के बाद निवेशक पश्चिम बंगाल की तरफ आकर्षित होंगे। 1991 के बाद अनुकूल वातावरण के कारण अन्य राज्यों को विदेशी और घरेलू निवेश प्राप्त हुआ…

    हाल ही के चुनाव में पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की तृणमूल पार्टी को हराकर भारतीय जनता पार्टी ने दो तिहाई से ज्यादा जनमत प्राप्त कर सरकार का गठन किया है। भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनते ही पश्चिम बंगाल ही नहीं पूरे देश में यह आशा बलवती हुई है कि पश्चिम बंगाल पुन: अपने ऐतिहासिक गौरव को प्राप्त कर विकास के मार्ग पर अग्रसर होगा। वर्ष 2024-25 में चालू कीमतों पर पश्चिम बंगाल की प्रति व्यक्ति आय 1.63 लाख रुपए थी, जबकि प्रति व्यक्ति आय का राष्ट्रीय औसत 2.05 लाख रुपए था। इस प्रकार, वर्ष 2024-25 में पश्चिम बंगाल की प्रति व्यक्ति आय राष्ट्रीय औसत का लगभग 79.5 प्रतिशत रही, और राष्ट्रीय स्तर पर सालाना प्रतिव्यक्ति आय और पश्चिम बंगाल में प्रतिव्यक्ति आय में 42000 रुपए का अंतर रहा। लेकिन पश्चिम बंगाल की स्थिति हमेशा से ऐसी नहीं रही। वर्ष 1960-61 में पश्चिम बंगाल की प्रतिव्यक्ति आय राष्ट्रीय औसत का 127.5 प्रतिशत थी। 1970-71 में भी वो राष्ट्रीय औसत से 18 प्रतिशत अधिक थी। लेकिन 1980-81 तक आते-आते उसकी प्रतिव्यक्ति आय राष्ट्रीय औसत का 97 प्रतिशत और 2010-11 तक मात्र 84 से 86 प्रतिशत रह गई थी, और यह प्रवृत्ति अभी तक जारी है। 1970 के दशक में जहां भारत की जीडीपी 3.0 से 3.5 प्रतिशत प्रतिवर्ष की दर से बढ़ रही थी, पश्चिम बंगाल की जीडीपी वृद्धि दर सिर्फ 1.5 से 2.0 प्रतिशत ही थी। 1980 के दशक में हालांकि पश्चिम बंगाल में जीडीपी ग्रोथ 5.5 प्रतिशत तक पहुंच गई, लेकिन औद्योगिक विकास की गति अत्यंत धीमी रही। 1990 के दशक में पश्चिम बंगाल की वृद्धि दर राष्ट्रीय संवृद्धि दर से अधिक थी।

    2000 से लेकर 2011 के बीच हालांकि औद्योगिक उठाव तो नहीं आया, लेकिन सेवा क्षेत्र के विस्तार के कारण पश्चिम बंगाल ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया। 2011 और 2025 के बीच भी पश्चिम बंगाल की ग्रोथ राष्ट्रीय औसत से कम थी, और यह 6.5 से 7.0 प्रतिशत रही। चूंकि पश्चिम बंगाल देश के अन्य हिस्सों से कम गति से विकास कर रहा था, देश की कुल जीडीपी में इसका हिस्सा 1960 में 10.5 प्रतिशत से घटता हुआ वर्ष 2024-25 में मात्र 5.6 प्रतिशत रह गया। इसका कारण यह है कि पश्चिम बंगाल में सेवा क्षेत्र, कंस्ट्रक्शन, व्यापार, ट्रांसपोर्ट और सरकारी खर्च की बदौलत जीडीपी में वृद्धि तो हुई लेकिन गुजरात, तमिलनाडु, कर्नाटक, महाराष्ट्र और कई नए औद्योगिक प्रदेशों की तुलना में पश्चिम बंगाल का औद्योगिक विकास अत्यंत धीमा रहा। गौरतलब है कि 1970 और 1990 के बीच में पश्चिम बंगाल को सबसे ज्यादा नुकसान औद्योगिक गिरावट के कारण हुआ, जिसके चलते पश्चिम बंगाल का हिस्सा भारत की जीडीपी में नीचे गिर गया। उसके उपरांत पश्चिम बंगाल में जीडीपी ग्रोथ पहले से बेहतर होने के बावजूद, पश्चिम बंगाल का हिस्सा राष्ट्रीय जीडीपी में कम बना रहा। प्रश्न यह है कि क्या पश्चिम बंगाल पुन: अपना वह गौरव प्राप्त कर पाएगा? क्या एक समय का औद्योगिक राज्य, जहां अन्यान्य कारणों से उद्योग विमुख हो गए, पुन: उद्योगों की स्थापना कर पाएगा? क्या पश्चिम बंगाल की प्रतिव्यक्ति आय जो आज राष्ट्रीय औसत का मात्र 79.5 प्रतिशत ही है, पुन: राष्ट्रीय औसत के बराबर या उससे ज्यादा हो पाएगी? ये सभी यक्ष प्रश्न देश के सामने हैं और भाजपा की नवगठित सरकार के सामने यह चुनौती भी प्रस्तुत कर रहे हैं। प्रश्न यह है कि एक राज्य जो पूर्व में आर्थिक विकास की दृष्टि से भारत के अग्रणी राज्यों में से एक था, जहां प्रतिव्यक्ति आय राष्ट्रीय औसत से 27 प्रतिशत से भी ज्यादा बेहतर थी, उसे वापस पटरी पर कैसे लाया जाए। सबसे पहले पश्चिम बंगाल की आर्थिक बदहाली के कारणों की जांच करनी होगी और उनके समाधान का खाका तैयार करना होगा। यह भी स्पष्ट है कि जब आर्थिक गिरावट आती है तो न तो एक कारण होता है और न ही एक समाधान। सर्वप्रथम हम देखते हैं कि पश्चिम बंगाल की आर्थिक बदहाली का कारण वहां औद्योगिक क्षेत्र के विकास में व्यवधान रहा। औद्योगिक विकास हेतु सर्वप्रथम इन्फ्रास्ट्रक्चर का निर्माण जरूरी होता है। इन्फ्रास्ट्रक्चर की दृष्टि से पश्चिम बंगाल काफी पिछड़ गया। सडक़, बिजली आदि का तो अभाव रहा ही, साथ ही औद्योगिक विकास के लिए प्रोत्साहन भी न्यूनतम रहा। गौरतलब है कि पूर्व में साम्यवादी शासन में निवेश घटा और निवेशक हड़ताल और श्रम विवादों के चलते पश्चिम बंगाल से विमुख हो गए।

    जब पश्चिम बंगाल की वामपंथी सरकार ने टाटा को सिंगूर में नैनो कार प्लांट लगाने की इजाजत देकर पिछली गलतियों को सुधारने की कोशिश की, तो इस बार विपक्ष की नेता ममता बनर्जी ने टाटा को जमीन देने के खिलाफ आंदोलन कर दिया, जिसके कारण वो प्रस्तावित कारखाना टाटा ने गुजरात स्थानांतरित कर दिया। हालांकि यह विवाद तो मीडिया की चर्चा में रहा, लेकिन पिछले 60-70 सालों में ऐसे कई अवसर आए, जिसके कारण उद्योग पश्चिम बंगाल से विमुख होते गए। बिरला, टाटा आदि समेत कई उद्योग समूहों ने अपना मुख्यालय कोलकाता से अन्य स्थानों की ओर स्थानांतरित कर दिया। श्रम विवादों के राजनीतिकरण और आधुनिकीकरण और ऑटोमेशन की खिलाफत ने राज्य की अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान पहुंचाया है। ऐसे में यह समझना होगा कि पश्चिम बंगाल अपने भूगोल, मानव संसाधनों एवं सांस्कृतिक और औद्योगिक परंपराओं के चलते औद्योगिकीकरण के लिए अत्यंत उपयुक्त राज्य है। कोलकाता और हल्दिया बंदरगाह पश्चिम बंगाल के लिए एक बहुत बड़ी देन है, जो आसियान देशों के लिए भारत के पूर्वी क्षेत्र के लिए व्यापार का प्रमुख द्वार बन सकता है। कृषि की उच्च उत्पादकता, कोलकाता जैसा शहर और उस पर पढ़ी-लिखी जनसंख्या पश्चिमी बंगाल को ग्रोथ हब बना सकता है। यदि शहरी इन्फ्रास्ट्रक्चर बने और मैट्रो कनैक्टिविटी हो सके तो कोलकाता को एक आईटी हब के नाते विकसित किया जा सकता है। यहां उच्च कोटि और अधिक उत्पादकता वाली कृषि के चलते बागवानी, मछली पालन और फूलों के उत्पादन की संभावनाएं हैं ही, और साथ ही साथ यदि वहां खाद्य प्रसंस्करण उद्योग लगें, और कोल्ड चेन को मजबूत किया जाए और निर्यात को बढ़ावा मिले तो ग्रामीण क्षेत्रों की आमदनी को बढ़ाने में एक बड़ी छलांग लग सकती है। कौशल विकास और श्रम सुधार पश्चिम बंगाल के लिए वरदान साबित हो सकते हैं।

    हमें वहां औद्योगिक संबंधों के लिए वातावरण को बेहतर करना होगा और साथ ही महिलाओं की कार्यबल में भागीदारी को भी बढ़ाना होगा। साम्यवादी शासन के दौरान शासक वर्ग की विचारधारा का बड़ी कंपनियों के प्रति संशय का भाव, नियामक वातावरण और विकास से पहले ही पुनर्वितरण के प्रयासों ने विकास को नुकसान पहुंचाया। परंपरागत उद्योगों के ह्रास ने भी पश्चिम बंगाल के विकास को बाधित किया। खासतौर पर तब जब नए उद्योगों का प्रादुर्भाव वहां नहीं हो पाया। सरकार बदलने के बाद आज परिस्थिति बदली है और आशा की जा सकती है कि भाजपा की स्थायी सरकार बनने के बाद निवेशक पश्चिम बंगाल की तरफ आकर्षित होंगे। 1991 के बाद अनुकूल वातावरण के कारण अन्य राज्यों को विदेशी और घरेलू निवेश प्राप्त हुआ। इन राज्यों ने आईटी और इन्फ्रास्ट्रक्चर को विकसित किया। लेकिन पश्चिम बंगाल इस प्रकार के निवेश को आकर्षित नहीं कर पाया और पश्चिम बंगाल की सरकारों ने भी इन्फ्रास्ट्रक्चर को प्राथमिकता नहीं दी। सरकार को विभिन्न प्रकार के अनुपादक खर्चों को कम करते हुए पूंजीगत खर्च को बढ़ाना होगा, प्रशासन में डिजीटलीकरण बढ़ाकर सरकारी धन के रिसाव को कम करना होगा। पश्चिम बंगाल में दार्जिलिंग की पहाडिय़ों और सुंदरवन के प्राकृतिक टूरिज्म को तो बढ़ावा दिया जा सकता है, साथ ही दुर्गा पूजा को सांस्कृतिक ब्रांड के रूप में विकसित करना होगा।-डा. अश्वनी महाजन

    Share. Facebook Twitter Telegram WhatsApp Email
    chhattisgarhrajya.in
    chhattisgarhrajya.in
    • Website

    Related Posts

    ‘नीली क्रांति’ से समृद्धि की ओर: मछली पालन बना ग्रामीण विकास, रोजगार और आत्मनिर्भरता का नया आधार

    June 27, 2026

    मोदी की व्यापार दृष्टि ने भारत को बदलने के लिए विश्व-स्तर पर अवसरों के द्वार खोले

    June 24, 2026

    स्वस्थ बुढ़ापे के लिए योग : जिंदगी में जीवंतता का समावेश

    June 21, 2026

    Address - Gayatri Nagar, Near Ashirwad Hospital, Danganiya, Raipur C.G.

    Chandra Bhushan Verma
    Owner & Editor
    Mobile - 9826237000 Email - chhattisgarhrajya.in@gmail.com
    Facebook X (Twitter) Instagram Pinterest
    • About Us
    • Contact Us
    • Privacy Policy
    • Terms and Conditions
    • Disclaimer
    © 2026 ThemeSphere. Designed by ThemeSphere.

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.