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    Home»संपादकीय»इंडिया ही विश्व चैंपियन
    संपादकीय

    इंडिया ही विश्व चैंपियन

    chhattisgarhrajya.inBy chhattisgarhrajya.inMarch 10, 2026
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    दरअसल क्रिकेट की टीम इंडिया ही विश्व चैंपियन है। चाहे टी-20 क्रिकेट हो या महिलाओं की एकदिनी क्रिकेट हो अथवा अंडर-19 की दोनों लैंगिक क्रिकेट हो या दृष्टिबाधित महिला टी-20 विश्व खिताब हो और अंतत: चैम्पियंस ट्रॉफी का खिताब हो, टीम इंडिया ही क्रिकेट की स्वाभाविक विश्व चैम्पियन है। ये तमाम वैश्विक खिताब टीम इंडिया की झोली में हैं। बेशक यह टीम करिश्माई और कमाल की है। टीम इंडिया ने टी-20 विश्व कप लगातार दूसरी बार जीता है। वह इकलौती टीम है। अपनी घरेलू जमीन पर, मेजबानी करते हुए, वह एकमात्र विश्व विजेता है। टी-20 के कुल तीन विश्व खिताब (2007, 2024, 2026) जीतने वाली टीम इंडिया ही इकलौती टीम है। विश्व चैम्पियन रही टीमों को धराशायी इसी टीम ने किया। विश्व कप फाइनल का अभी तक का सर्वोच्च स्कोर, 255/5 रन, भी टीम इंडिया के हिस्से दर्ज हो गया। ‘प्लेयर ऑफ दि टूर्नामेंट’ संजू सैमसन रहे, जिन्होंने 321 रन बनाए। लगातार तीन अद्र्धशतक ठोंके। ‘प्लेयर ऑफ दि मैच’ बुमराह रहे, जिन्होंने टूर्नामेंट में कुल 14 विकेट उखाड़े। बुमराह ने फाइनल में सिर्फ 15 रन देकर न्यूजीलैंड के स्थापित 4 बल्लेबाजों को आउट किया और विरोधी टीम को घुटनों पर ला दिया। बुमराह वरुण चक्रवर्ती के साथ ‘सर्वश्रेष्ठ गेंदबाज’ रहे। यकीनन बुमराह ही बुमराह है, जो टीम इंडिया को ईश्वर का ‘अप्रतिम तोहफा’ हैं। उन्हें खेलने का मतलब है कि आप धुरंधर बल्लेबाज हैं। बहरहाल टी-20 का लगातार दूसरी बार विश्व चैम्पियन बनकर टीम इंडिया ने कई ‘मील-पत्थर’ पार किए हैं और स्थापित भी किए हैं। टी-20 विश्व कप में टीम इंडिया के बल्लेबाज इस तरह खेले मानो कोई वीडियो गेम खेल रहे हों! बल्लेबाजों ने टूर्नामेंट में कुल 106 छक्के उड़ाए, ऐसा करने वाली टीम इंडिया ही है। यकीनन अद्वितीय खेल, अतुलनीय हुनर, शानदार छक्के…! वाकई यह मुख्य कोच गौतम गंभीर समेत सभी कोचों की रणनीति और ‘शांत’ कप्तान सूर्यकुमार यादव के सटीक और सार्थक फैसलों की अद्भुत, अविस्मरणीय, अतुलनीय और बेशकीमती जीत है। देश जश्न में है, नाच रहा है, मिठाइयां खाई जा रही हैं और टीम के हुनर, जज्बे पर गर्व महसूस कर रहा है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री मोदी समेत असंख्य हस्तियों ने बधाइयां दी हैं। यह विश्व चैम्पियन बनना इसलिए भी बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह नई पीढ़ी की युवा टीम इंडिया है।

    इसमें विराट कोहली, रोहित शर्मा, रवींद्र जडेजा, श्रेयस अय्यर, शुभमन गिल सरीखे विख्यात खिलाड़ी नहीं थे। संजू सैमसन, इशान किशन, तिलक वर्मा, शिवम दुबे, रिंकू सिंह आदि खिलाड़ी कई मैचों तक पेवेलियन की कुर्सियों पर बैठे रहे। उनका चयन अंतिम एकादश में नहीं किया जाता था। वे ‘वैकल्पिक खिलाड़ी’ थे। संजू को 4 मैच बैठे रहना पड़ा। अंतत: विश्व कप में उन्हें मौका मिला, तो उन्होंने गेंद के धुएं उड़ा दिए। चौकों-छक्कों की बौछार से सजी पारियां खेलीं। अभिषेक टूर्नामेंट में लगातार तीन बार शून्य पर आउट हुए, लेकिन फाइनल में 18 गेंद पर अद्र्धशतक जड़ दिया। बेशक ये नौजवान खिलाड़ी टीम इंडिया के ‘नगीने’ हैं, लिहाजा इन्हें सजा कर रखना चाहिए। संजू ने 8 छक्कों की 89 रन की पारी फाइनल में खेली, जो विश्व कप क्रिकेट का सर्वोच्च, सर्वश्रेष्ठ निजी स्कोर है। उन्होंने महान विराट कोहली के 77 और 76 रनों के विश्व कप फाइनल के कीर्तिमानों को भी बेहतर किया। यहां सवाल कोच, चयनकर्ताओं और प्रबंधकों की निष्पक्षता, ईमानदारी, पूर्वाग्रही मानसिकता पर है। इस विश्व विजयी उपलब्धि के साथ ही यह सब कुछ बदलना, खत्म होना चाहिए, क्योंकि टीम इंडिया हमारी राष्ट्रीय पहचान भी है। आज टी-20 क्रिकेट में हम दुनिया की ‘नंबर वन’ टीम हैं। यह सर्वोच्चता बरकरार रहनी चाहिए। टीम इंडिया के ये विश्व चैम्पियन खिलाड़ी भी गली-मुहल्ले की क्रिकेट खेल कर इस स्तर तक पहुंचे हैं। आज क्रिकेट से ‘अजेय’ रहने की राष्ट्रीय अपेक्षाएं ऐसी हैं, जैसी ब्राजील वाले अपनी फुटबॉल टीम से करते थे कि उसे खेल में ‘नंबर दो’ भी नहीं होना है। बहरहाल यह ज्यादती और अतिशयोक्ति है, क्योंकि खेल में जीत और हार अपरिहार्य हैं। आज भारत ऐसा देश है, जिसमें क्रिकेट के विश्व चैम्पियनों की पूरी फौज है। उन्हें सलाम और शाबाश! टीम इंडिया को बधाइयों का तांता लग गया है। देशभर में इस जीत पर जश्न मनाए जा रहे हैं।

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