4,500 वर्ष पुरानी हड़प्पाई समुद्री परंपरा को आधुनिक तकनीक और अनुभवात्मक प्रस्तुतियों से दुनिया के सामने लाएगा राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर
छत्तीसगढ़ के पत्रकारों ने किया राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर का अवलोकन; 400 एकड़ में विकसित हो रहा है महत्वाकांक्षी विरासत एवं पर्यटन परिसर
लोथल (गुजरात)- भारत की लगभग 4,500 वर्ष पुरानी समुद्री विरासत, हड़प्पा सभ्यता के उन्नत नगर नियोजन और प्राचीन समुद्री व्यापार की गौरवशाली परंपरा को आधुनिक संग्रहालय तकनीक एवं अनुभवात्मक प्रस्तुतियों के माध्यम से देश-दुनिया के सामने लाने के उद्देश्य से गुजरात के ऐतिहासिक लोथल में राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर (National Maritime Heritage Complex–NMHC) विकसित किया जा रहा है। पत्र सूचना कार्यालय, रायपुर द्वारा आयोजित मीडिया अध्ययन दौरे के अंतर्गत छत्तीसगढ़ के पत्रकारों के प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को परिसर का अवलोकन किया और इसकी परिकल्पना, निर्माणाधीन संग्रहालय, दीर्घाओं तथा प्रस्तावित विभिन्न थीम आधारित सुविधाओं की जानकारी प्राप्त की।
नेशनल मैरीटाइम हेरिटेज म्यूजियम, लोथल के महाप्रबंधक अमित राठौड़ ने पत्रकारों को परिसर की विशेषताओं और परियोजना की परिकल्पना की जानकारी देते हुए बताया कि राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर केवल एक पारंपरिक संग्रहालय नहीं, बल्कि भारत की समुद्री यात्रा को प्राचीन काल से आधुनिक युग तक समग्रता और अनुभवात्मक स्वरूप में प्रस्तुत करने वाला एक व्यापक विरासत परिसर है। उन्होंने बताया कि लगभग 400 एकड़ क्षेत्र में विकसित किए जा रहे इस परिसर में संग्रहालय के साथ हड़प्पाई नगर का पुनर्निर्माण, तटीय राज्यों के पवेलियन, जेट्टी, जलमार्ग, विभिन्न थीम पार्क, समुद्री एवं नौसैनिक विरासत से जुड़े आकर्षण तथा पर्यटकों के लिए आवासीय सुविधाएं विकसित करने की योजना है।

14 विषयगत दीर्घाओं में दिखेगी भारत की समुद्री यात्रा
अमित राठौड़ ने बताया कि राष्ट्रीय समुद्री विरासत संग्रहालय में भारत की समुद्री यात्रा के विभिन्न कालखंडों और आयामों को दर्शाने वाली 14 विषयगत दीर्घाएं विकसित की जा रही हैं। इनमें समुद्र और महासागरों से जुड़ी मौखिक परंपराओं से लेकर हड़प्पाई सभ्यता के अग्रणी समुद्री यात्रियों, प्राचीन भारत की समुद्री विरासत, यूनानी-रोमन विश्व से भारत के संपर्क, यूरोपीय शक्तियों के आगमन, समुद्री व्यापार एवं सांस्कृतिक संबंध, गुजरात की समुद्री परंपराओं, मराठा नौसैनिक शक्ति तथा भारतीय नौसेना और भारतीय तटरक्षक बल के विकास को प्रदर्शित किया जाएगा।
इनके अलावा दक्षिण-पूर्व एशिया और उससे आगे के क्षेत्रों के साथ भारत के व्यापारिक एवं सांस्कृतिक संबंध, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव, पारंपरिक जहाज निर्माण एवं नौवहन तकनीक, स्वतंत्रता के बाद भारतीय नौवहन तथा बच्चों के लिए विशेष दीर्घा भी संग्रहालय की प्रमुख विषयवस्तुओं में शामिल हैं।
उन्होंने बताया कि संग्रहालय का उद्देश्य केवल इतिहास की जानकारी देना नहीं, बल्कि आगंतुकों को भारत की समुद्री सभ्यता और उसके विकास की यात्रा का इंटरैक्टिव एवं अनुभवात्मक अनुभव प्रदान करना है।
हड़प्पाई नगर में महसूस होगी 4,500 वर्ष पुरानी जीवनशैली
परिसर में प्राचीन लोथल की जीवनशैली को समझने के लिए जीवन आकार (Life-size) हड़प्पाई नगर का पुनर्निर्माण किया जा रहा है। लगभग 80×80 मीटर क्षेत्र में विकसित किए जा रहे इस नगर में प्राचीन लोथल की नगर नियोजन प्रणाली, सड़कें, आवास, बाजार और जल निकासी व्यवस्था को दर्शाया जा रहा है।
अमित राठौड़ ने बताया कि हड़प्पाई नगर के इस पुनर्निर्माण का उद्देश्य आगंतुकों को लगभग 4,500 वर्ष पुराने सुव्यवस्थित नगर जीवन का प्रत्यक्ष अनुभव कराना है। प्रस्तावित लोथल टाउन में उस काल की शैली से प्रेरित बाजार भी विकसित किया जाएगा, जहां संग्रहालय भ्रमण के बाद पर्यटकों के लिए भोजन, कैफे और स्मृति चिह्नों की खरीदारी जैसी सुविधाएं उपलब्ध होंगी।
लोथल का प्राचीन पुरातात्विक स्थल राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर से लगभग 3 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यहां मिले मनके, औजार और आभूषण सहित अन्य पुरातात्विक अवशेष इस क्षेत्र की प्राचीन सभ्यता और समुद्री व्यापारिक गतिविधियों की समृद्ध परंपरा को रेखांकित करते हैं।

जेट्टी और जलमार्ग से जुड़ेगा संग्रहालय परिसर
परिसर की परिकल्पना में संग्रहालय और अन्य सुविधाओं को एक विशिष्ट अनुभव के रूप में जोड़ने के लिए जेट्टी और जलमार्ग भी महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार पर्यटक परिसर के विभिन्न हिस्सों से जलमार्ग के माध्यम से संग्रहालय तक पहुंच सकेंगे। जेट्टी के ऊपरी स्तर से संग्रहालय में प्रवेश की व्यवस्था होगी, जबकि निचले स्तर पर जलाशय की ओर खुलने वाली सीढ़ियों से पर्यटक शाम के समय जल क्षेत्र का आनंद ले सकेंगे।
परिसर में संग्रहालय और लाइटहाउस पर प्रस्तावित साउंड एंड लाइट शो भी आगंतुकों के अनुभव को और आकर्षक बनाएगा।
लाइटहाउस म्यूजियम और 5-डी थिएटर होंगे प्रमुख आकर्षण
राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर के आगामी चरणों में लाइटहाउस म्यूजियम, 5-डी डोम थिएटर और ‘लोथल नी-वाव’ जैसे आकर्षण विकसित किए जाने की योजना है। परिसर के साझा क्षेत्रों—रेस्तरां, कैफे, प्लाजा और अन्य सार्वजनिक स्थानों—की थीमिंग भी समुद्री एवं हड़प्पाई स्थापत्य प्रभावों को ध्यान में रखते हुए की जाएगी।
परियोजना में पर्यटकों के लिए म्यूजोटेल और समुद्री थीम पर आधारित इको-रिसॉर्ट की भी परिकल्पना की गई है। इको-रिसॉर्ट में समुद्री प्रेरणा से तैयार कॉटेज तथा सामुदायिक गतिविधियों के लिए स्थान विकसित किए जाने की योजना है।
तटीय राज्यों की समुद्री विरासत को मिलेगा मंच
परिसर में विभिन्न तटीय राज्यों की विशिष्ट समुद्री एवं सांस्कृतिक परंपराओं को प्रदर्शित करने के लिए कोस्टल पवेलियन विकसित किए जा रहे हैं। गुजरात और महाराष्ट्र सहित विभिन्न राज्यों के पवेलियन के माध्यम से देश की विविध समुद्री परंपराओं, संस्कृति और विरासत को एक ही परिसर में प्रस्तुत करने की योजना है।
इसके साथ ही मैरीटाइम एंड नेवल पार्क, मॉन्यूमेंट्स थीम पार्क, क्लाइमेट चेंज थीम पार्क तथा एडवेंचर एंड एम्यूजमेंट थीम पार्क जैसी सुविधाएं भी परियोजना के विभिन्न चरणों में विकसित की जानी प्रस्तावित हैं।

35 देशों के साथ अंतरराष्ट्रीय सहयोग की योजना
अमित राठौड़ ने बताया कि भारत की समुद्री विरासत को वैश्विक संदर्भ में प्रस्तुत करने के लिए विभिन्न देशों के साथ अंतरराष्ट्रीय सहयोग की योजना बनाई गई है। परियोजना के तहत 35 देशों के साथ अंतरराष्ट्रीय सहयोग प्रस्तावित है। इनमें पुर्तगाल, संयुक्त अरब अमीरात, वियतनाम, थाईलैंड, नीदरलैंड, डेनमार्क, जर्मनी, ओमान और इजराइल सहित कई देशों के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए जा चुके हैं।
उन्होंने बताया कि इस अंतरराष्ट्रीय सहयोग से भारत और विश्व के अन्य समुद्री देशों के बीच साझा समुद्री इतिहास, ज्ञान, परंपराओं और विरासत के आदान-प्रदान को बढ़ावा मिलेगा।
लोथल क्षेत्र को समग्र पर्यटन गंतव्य के रूप में विकसित करने की दिशा में प्रयास
राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर के साथ पूरे लोथल क्षेत्र के समग्र विकास की भी योजना बनाई जा रही है। इसके लिए गुजरात सरकार द्वारा लोथल एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (LADA) का गठन किया गया है और पूरे लोथल क्षेत्र के लिए मास्टर प्लान विकसित किया जा रहा है, ताकि भविष्य में अनियोजित विकास से बचते हुए क्षेत्र का सुनियोजित विस्तार किया जा सके।
क्षेत्र में स्वास्थ्य केंद्र, पुलिस पोस्ट और हेलिपैड जैसी आवश्यक सुविधाओं के विकास के लिए स्थान चिन्हित किए गए हैं। गुजरात के पर्यटन सर्किट में राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर को शामिल करने का प्रस्ताव भी है। इसके अतिरिक्त भावनगर पोर्ट से थीम आधारित फेरी सेवा तथा अलंग स्थित शिप-ब्रेकिंग म्यूजियम के उन्नयन पर भी विचार किया जा रहा है।
विरासत और पर्यटन के नए सर्किट से जुड़ेगा लोथल
परियोजना के तहत लोथल को गुजरात के प्रमुख पर्यटन स्थलों से जोड़ने की व्यापक परिकल्पना की गई है। प्रस्तावित इको-टूरिज्म सर्किट में अहमदाबाद, थोल बर्ड सेंचुरी, नलसरोवर वेटलैंड, लोथल और ब्लैकबक नेशनल पार्क को जोड़े जाने की योजना है। इसी प्रकार हेरिटेज टूरिज्म सर्किट के अंतर्गत अहमदाबाद, वडनगर, सिद्धपुर, रानी की वाव, मोढेरा सूर्य मंदिर, मुली, लिम्बडी और लोथल को जोड़ने की परिकल्पना है।
भविष्य में समुद्री पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए प्रस्तावित क्रूज पर्यटन सर्किट तथा लोथल की कनेक्टिविटी मजबूत करने के लिए रेल संपर्क विकसित करने की योजनाएं भी परियोजना की व्यापक परिकल्पना का हिस्सा हैं। इसके अंतर्गत लोथल बुर्खी रेलवे स्टेशन के पुनरुद्धार, मास रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (MRTS) कनेक्टिविटी और प्रमुख शहरों से लोथल तक हेरिटेज ट्रेन चलाने की संभावनाओं पर भी विचार किया जा रहा है।
विकास भी, विरासत भी’ की अवधारणा को साकार करता परिसर
अमित राठौड़ ने बताया कि राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकास भी, विरासत भी’ के दृष्टिकोण के अनुरूप भारत की प्राचीन समुद्री उपलब्धियों और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को आधुनिक तकनीक, पर्यटन और शिक्षा से जोड़ने का महत्वपूर्ण प्रयास है।
उन्होंने कहा कि परिसर के पूर्ण रूप से विकसित होने के बाद लोथल के वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर एक प्रमुख विरासत एवं समुद्री पर्यटन केंद्र के रूप में उभरने की व्यापक संभावनाएं हैं। यह परियोजना भारत की प्राचीन समुद्री परंपरा को दुनिया के सामने प्रस्तुत करने के साथ-साथ सांस्कृतिक पर्यटन, शिक्षा, अनुसंधान और रोजगार के क्षेत्र में भी नए अवसरों का सृजन कर सकती है।
राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर के माध्यम से लोथल की 4,500 वर्ष पुरानी समुद्री विरासत को आधुनिक संग्रहालय अवधारणा, डिजिटल तकनीक और अनुभवात्मक प्रस्तुतियों से जोड़कर नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। प्राचीन हड़प्पाई नगर नियोजन, जल प्रबंधन और समुद्री व्यापार की विरासत से लेकर भारतीय नौसेना और आधुनिक समुद्री क्षेत्र तक की यात्रा को एक ही परिसर में समेटने वाली यह परियोजना भारत की समुद्री सभ्यता को समझने और अनुभव करने के लिए एक महत्वपूर्ण वैश्विक केंद्र के रूप में विकसित होने की दिशा में अग्रसर है।

