Close Menu
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Trending
    • रविशंकर जलाशय की सुरक्षा के लिए गेटों की मरम्मत एवं आवश्यक कार्यों हेतु 65.50 करोड़ रुपए की मिली प्रशासनिक स्वीकृति
    • सफलता की कहानी-बिना केमिकल, बंपर मुनाफाः डोलनारायण की जैविक मिर्च ने बाजार में मचाई धूम
    • सायंतन बनर्जी जन्म से नेत्रहीन,लेकिन उन्होंने हौसले से बड़ी मिसाल कायम की आज वह शिक्षक, RJऔर सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में कर रहे काम…
    • आईपीएल2026:रायपुर में होटलों की बुकिंग 10-10 हजार रुपए तक हुई महंगी, हवाई टिकटों की कीमतें भी बढ़ीं
    • बड़ा अपडेट:तमिलनाडु में विजय सरकार का रास्ता साफ, VCK के समर्थन से मिला बहुमत
    • शुभेन्दु अधिकारी के पीए के कत्ल की गुत्थी सुलझाने गुजरात से बुलाई गई जांच टीम
    • भोपाल के 90 डिग्री ब्रिज केस के सस्पेंड किए सभी 7 इंजीनियर बहाल
    • साइबर अपराध पर हाईकोर्ट सख्त, FIR रद्द करने से किया इनकार
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Chhattisgarh RajyaChhattisgarh Rajya
    Saturday, May 9
    • खानपान-सेहत
    • फीचर
    • राशिफल
    • लेख-आलेख
    • व्यापार
    • बिलासपुर
    • रायपुर
    • भिलाई
    • राजनाँदगाँव
    • कोरबा
    Chhattisgarh RajyaChhattisgarh Rajya
    Home»BREKING NEWS»लखपति दीदी नीलम सोनी : स्वाद, संस्कृति और सशक्तिकरण की एक प्रेरक कहानी
    BREKING NEWS

    लखपति दीदी नीलम सोनी : स्वाद, संस्कृति और सशक्तिकरण की एक प्रेरक कहानी

    chhattisgarhrajya.inBy chhattisgarhrajya.inJuly 22, 2025
    Facebook Twitter WhatsApp Email Telegram
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn Pinterest Email

    कोरबा । कहते हैं परिस्थितियाँ चाहे जैसी भी हों, अगर इरादे मजबूत हों तो हर मुश्किल राह आसान बन जाती है। जिले की नीलम सोनी ने यह साबित कर दिखाया कि अगर जुनून हो तो साधारण सी जिंदगी भी एक असाधारण मिसाल बन सकती है। घरेलू जिम्मेदारियों में बंधकर बैठने के बजाय उन्होंने बदलाव को चुनाकृखुद के लिए, अपने परिवार के लिए और उन सैकड़ों महिलाओं के लिए जो कभी समाज की सीमाओं में सिमटी थीं। चुनौतियों से लड़कर उन्होंने न सिर्फ अपना आर्थिक और सामाजिक कद ऊँचा किया, बल्कि दूसरों के जीवन में भी उम्मीद की किरण जगाई। आज वे केवल एक सफल उद्यमी ही नहीं, बल्कि महिला सशक्तिकरण की प्रेरणादायक प्रतीक बन चुकी हैं।

    कोरबा जिले के कटघोरा में रहने वाली सोनी के घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी। पति अकेले कमाने वाले थे और घर खर्च चलाना मुश्किल हो रहा था। अपने बच्चों के भविष्य और अपने आत्मसम्मान के लिए नीलम ने ठान लिया कि कुछ करना है। उन्होंने अपनी बेटी ’श्रिया’ के नाम पर ’श्रिया स्व-सहायता समूह’ से जुड़कर अपनी नई यात्रा की शुरुआत की। यही वह मोड़ था जहाँ से उन्होंने अपने जीवन को नए रंगों से रंगना शुरू किया। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (छत्स्ड) के अंतर्गत  सरकार द्वारा संचालित ‘बिहान’ योजना से जुड़कर नीलम सोनी को एक नई दिशा और पहचान मिली। उन्होंने शासन की सहायता से छह लाख रुपये का ऋण प्राप्त किया और कटघोरा में ‘गढ़ कलेवा’ नामक एक परंपरागत छत्तीसगढ़ी भोजनालय की शुरुआत की। शुरुआत में राह आसान नहीं थी, लेकिन दृढ़ निश्चय और परिश्रम ने उन्हें पीछे मुड़कर देखने का मौका नहीं दिया। 

    उन्होंने गढ़ कलेवा में छत्तीसगढ़ी व्यंजनों जैसे चीला, फरा, ठेठरी, खुरमी, अईरसा, चौसेला, तसमई, करी लड्डू, सोहारी आदि के साथ-साथ मिलेट्स (मोटा अनाज) से बने पारंपरिक पकवानों को परोसना शुरू किया। गढ़ कलेवा सिर्फ एक व्यवसाय नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को संजोने और आगे बढ़ाने का एक माध्यम बन गया। यहाँ आने वाले लोगों को न केवल स्वादिष्ट छत्तीसगढ़ी खाना मिलता है, बल्कि वहाँ की सजीवता और पारंपरिक सजावट भी उन्हें अपनेपन का अहसास कराती है। वो बताती हैं कि उन्होंने अपने व्यवसाय के साथ-साथ बांस की कलाकृतियाँ, हस्तनिर्मित सजावटी वस्तुएँ भी बनाना शुरू किया, जिससे अतिरिक्त आय के साथ-साथ राज्य की लोककला को भी बढ़ावा मिला। आज समूह से लगभग 200 महिलाएं जुड़ी हुई हैं, जिनमें से 20 महिलाएं सीधे गढ़ कलेवा में कार्यरत हैं। इतना ही नहीं, उन्होंने अपने समूह में पीवीटीजी बिरहोर जनजाति की महिलाओं को भी जोड़ा है, जो पहले आजीविका के अवसरों से वंचित थीं। आज वे भी आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ा रही हैं।

    नीलम जी कहती हैं, “आज मेरे लिए सबसे बड़ा संतोष इस बात का है कि मैं अकेली नहीं बढ़ी, मेरे साथ मेरी बहनों का पूरा परिवार भी आगे बढ़ा है।“ चार साल पहले जिस महिला ने महज आत्मनिर्भर बनने की चाह में कदम बढ़ाया था, आज वह हर महीने लगभग 1.5 लाख रुपये का टर्नओवर करती हैं। उनका सालाना टर्नओवर अब 12 लाख रुपये के करीब पहुंच चुका है। उनका यह सफर इस बात का सजीव उदाहरण है कि महिलाएं यदि ठान लें तो हर क्षेत्र में बदलाव की मिसाल बन सकती हैं। 

    छत्तीसगढ़ शासन, बिहान मिशन और विशेषकर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय व जिला प्रशासन कोरबा  का धन्यवाद देते हुए कहा, “यदि शासन की योजनाएं और अधिकारियों का सहयोग न मिला होता, तो मैं और मेरे जैसी सैकड़ों महिलाएं शायद अभी भी घर की चार दीवारों तक सीमित रहतीं। बिहान ने हमें न केवल आत्मनिर्भर बनाया, बल्कि अपने सामर्थ्य पर विश्वास करना भी सिखाया।” अब नीलम चाहती हैं कि उनका गढ़ कलेवा राज्य के हर जिले में फैले, ताकि स्थानीय व्यंजनों और छत्तीसगढ़ी संस्कृति को देशभर में पहचान मिले। वह अपने व्यवसाय को एक मॉडल बनाकर अन्य महिलाओं को ट्रेनिंग भी देना चाहती हैं, ताकि और भी “लखपति दीदी” इस राज्य से निकलें और आत्मनिर्भर भारत के सपने को सच करें।

    Share. Facebook Twitter Telegram WhatsApp Email
    chhattisgarhrajya.in
    chhattisgarhrajya.in
    • Website

    Related Posts

    रविशंकर जलाशय की सुरक्षा के लिए गेटों की मरम्मत एवं आवश्यक कार्यों हेतु 65.50 करोड़ रुपए की मिली प्रशासनिक स्वीकृति

    May 9, 2026

    सफलता की कहानी-बिना केमिकल, बंपर मुनाफाः डोलनारायण की जैविक मिर्च ने बाजार में मचाई धूम

    May 9, 2026

    आईपीएल2026:रायपुर में होटलों की बुकिंग 10-10 हजार रुपए तक हुई महंगी, हवाई टिकटों की कीमतें भी बढ़ीं

    May 9, 2026

    Address - Gayatri Nagar, Near Ashirwad Hospital, Danganiya, Raipur C.G.

    Chandra Bhushan Verma
    Owner & Editor
    Mobile - 9826237000 Email - chhattisgarhrajya.in@gmail.com
    Facebook X (Twitter) Instagram Pinterest
    • About Us
    • Contact Us
    • Privacy Policy
    • Terms and Conditions
    • Disclaimer
    © 2026 ThemeSphere. Designed by ThemeSphere.

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.