तमिलनाडु विधानसभा में मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने बुधवार को ऐसे कई फैसलों का ऐलान किया, जिनका असर सीधे किसानों, मरीजों और विधायकों के कामकाज पर पड़ सकता है। सरकार ने दूध उत्पादकों को मिलने वाली खरीद कीमत बढ़ाकर 42 रुपये प्रति लीटर करने का फैसला किया है। साथ ही मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना का सालाना कवरेज 5 लाख से बढ़ाकर 25 लाख रुपये करने की घोषणा की गई। विधायकों को सरकारी वाहन देने की योजना भी सामने आई है।
एक ही दिन में तीन बड़े फैसले दूध उत्पादकों की आय बढ़ाने से लेकर इलाज का खर्च घटाने तक सरकार का फोकस साफ नजर आया। दूध की कीमत से विधानसभा की गाड़ी तक, विजय सरकार ने ऐसे फैसले रखे हैं जिन पर सियासी बहस के साथ-साथ आम लोगों की नजर भी टिक गई है।
दूध का बढ़ा दाम, बढ़ती लागत के बीच राहत
तमिलनाडु सरकार के फैसले के मुताबिक दूध उत्पादकों से खरीद की कीमत अब 42 रुपये प्रति लीटर की जाएगी। यह घोषणा ऐसे समय हुई है जब राज्य के दुग्ध उत्पादक लंबे समय से लागत बढ़ने और मौजूदा खरीद दर से दबाव की शिकायत कर रहे थे। इससे पहले जून में दूध उत्पादक संगठनों ने खरीद कीमत में पर्याप्त बढ़ोतरी की मांग की थी। उस समय किसानों ने चारा, पशु आहार, मजदूरी और पशु चिकित्सा पर बढ़ते खर्च का हवाला देते हुए कीमत संशोधन की मांग उठाई थी।
दरअसल, दूध उत्पादन में किसान की सबसे बड़ी चुनौती सिर्फ दूध का बाजार भाव नहीं, बल्कि रोजाना बढ़ने वाली उत्पादन लागत है। ऐसे में खरीद कीमत में बढ़ोतरी से सहकारी दुग्ध व्यवस्था से जुड़े उत्पादकों को कुछ अतिरिक्त राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि, मंगलवार को ही तमिलनाडु मिल्क प्रोड्यूसर्स वेलफेयर एसोसिएशन ने खरीद कीमत और बढ़ाने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया था। संगठन ने गाय के दूध के लिए 43 रुपये और भैंस के दूध के लिए 60 रुपये प्रति लीटर की मांग रखी थी तथा 24 अगस्त से दूध आपूर्ति रोकने की चेतावनी भी दी थी।
यानी सरकार की नई घोषणा से तत्काल राहत का रास्ता तो खुला है, लेकिन दुग्ध क्षेत्र की बाकी मांगें अभी भी चर्चा में रहेंगी।
अब हर विधायक के पास होगी सरकारी गाड़ी
मुख्यमंत्री विजय ने विधानसभा में कहा कि सभी विधायकों को सरकारी वाहन उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि वे अपने विधानसभा क्षेत्रों में जनता से जुड़े काम बिना परिवहन की परेशानी के कर सकें। सरकार का तर्क है कि विधायक का काम केवल विधानसभा की कार्यवाही तक सीमित नहीं होता। उन्हें लगातार अपने क्षेत्रों का दौरा करना पड़ता है, अधिकारियों से बैठक करनी होती है और स्थानीय समस्याओं का जायजा लेना पड़ता है। ऐसे में सरकारी वाहन को जनसेवा की सुविधा के तौर पर पेश किया गया है।
इस फैसले पर राजनीतिक और सार्वजनिक बहस की गुंजाइश भी है। तमिलनाडु में विधायकों को पहले से वेतन और विभिन्न भत्ते मिलते हैं। उपलब्ध विवरण के अनुसार विधायक के वेतन ढांचे में वाहन भत्ता समेत कई मद शामिल हैं। विजय सरकार पहले ही प्रशासनिक और जमीनी स्तर की सेवाओं के लिए नए सरकारी वाहनों पर खर्च कर चुकी है। मई में मुख्यमंत्री ने 2.90 करोड़ रुपये की लागत वाले 40 नए सरकारी वाहनों को हरी झंडी दिखाई थी। अब सभी विधायकों के लिए वाहन सुविधा लागू करने का फैसला सरकारी खर्च, उपयोग और निगरानी को लेकर भी चर्चा में रह सकता है।
स्वास्थ्य बीमा की सीमा सीधे पांच गुना
सरकार की तीसरी बड़ी घोषणा स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़ी है। मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत मिलने वाली वार्षिक कवरेज सीमा को 5 लाख रुपये से बढ़ाकर 25 लाख रुपये करने का ऐलान किया है।
इसका महत्व इसलिए भी बड़ा है क्योंकि गंभीर बीमारी या महंगे ऑपरेशन की स्थिति में इलाज का खर्च परिवार की वर्षों की बचत पर भारी पड़ सकता है। 25 लाख रुपये तक का बढ़ा हुआ कवर ऐसे परिवारों के लिए बड़ा सुरक्षा कवच बन सकता है।
विजय के चुनावी रोडमैप में भी हर परिवार के लिए 25 लाख रुपये के स्वास्थ्य बीमा का वादा शामिल था। सरकार के आधिकारिक दस्तावेज में इसे सार्वभौमिक स्वास्थ्य सुरक्षा के तौर पर रखा गया है, जिसमें सरकारी और सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में उन्नत इलाज तक पहुंच का लक्ष्य बताया गया है।
सरकार के 100 दिन और फैसलों की दिशा
मुख्यमंत्री विजय की सरकार ने अपने शुरुआती कार्यकाल में कल्याणकारी योजनाओं के साथ प्रशासनिक सुधारों पर भी जोर दिया है। सरकार के 100 दिन पूरे होने के मौके पर महिला सुरक्षा, शिक्षा, रोजगार, किसान कल्याण और निवेश जैसे क्षेत्रों में उठाए गए कदमों को प्रमुखता से सामने रखा गया।
ऐसे में विधानसभा में हुई ताजा घोषणाएं भी उसी व्यापक रणनीति का हिस्सा दिखाई देती हैं—एक तरफ ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़े दूध उत्पादकों को राहत, दूसरी तरफ आम परिवारों के लिए स्वास्थ्य सुरक्षा और तीसरी ओर विधायकों के क्षेत्रीय कामकाज को आसान बनाने की कोशिश।
अब असली परीक्षा इन घोषणाओं को जमीन पर लागू करने की होगी। दूध किसानों को बढ़ी हुई खरीद कीमत कब से और किस व्यवस्था के तहत मिलेगी, स्वास्थ्य योजना में 25 लाख रुपये की नई सीमा का लाभ किन प्रक्रियाओं के जरिए मिलेगा और विधायकों को मिलने वाली सरकारी गाड़ियों पर कितना सरकारी खर्च आएगा—इन सवालों के जवाब आने वाले दिनों में तस्वीर और साफ करेंगे।

