Close Menu
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Trending
    • लोक निर्माण विभाग के सचिव ने सड़क एवं भवन निर्माण कार्यों की प्रगति की समीक्षा की
    • किसानों की समृद्धि से ही समृद्ध होगा छत्तीसगढ़ : मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय
    • छत्तीसगढ़: जीजामगांव के नवीन आईटीआई में शुरू हुआ ‘मैकेनिक इलेक्ट्रिक व्हीकल’ ट्रेड; युवाओं के लिए रोजगार के खुलेंगे नए द्वार
    • 2026 में नहीं होंगे बिहार पंचायत चुनाव? परिसीमन में ही लगेंगे 6 महीने से ज्यादा
    • उत्तराखंड में दलबदल का खेल?, कांग्रेस BJP के सामने क्या हैं चुनौतियां
    • अचानक आई बाढ़, तेज बहाव में बह गई महिला
    • विदिशा में Gen Alpha का प्रदर्शन, बस किराया बढ़ने पर आक्रोश
    • चांदीपुरा वायरस का आतंक, महीसागर में 7 साल की बच्ची ने तोड़ा दम
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Chhattisgarh RajyaChhattisgarh Rajya
    Wednesday, August 12
    • खानपान-सेहत
    • फीचर
    • राशिफल
    • लेख-आलेख
    • व्यापार
    • बिलासपुर
    • रायपुर
    • भिलाई
    • राजनाँदगाँव
    • कोरबा
    Chhattisgarh RajyaChhattisgarh Rajya
    Home»संपादकीय»युवाओं का ‘नया इंकलाब’
    संपादकीय

    युवाओं का ‘नया इंकलाब’

    chhattisgarhrajya.inBy chhattisgarhrajya.inAugust 12, 2026
    Facebook Twitter WhatsApp Email Telegram
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn Pinterest Email

    यह ‘नया इंकलाब’ है, नए युग और नई पीढ़ी का ‘इंकलाब’ है। यदि ये युवा और छात्र संसद भवन के करीब जा सकते हैं अथवा रांची में विधानसभा की दहलीज पर जाकर बैठ सकते हैं और कुछ युवा विधानसभा भवन के परिसर तक पहुंच सकते हैं, तो ऐ सत्ताधीशो! सावधान, सचेत, सतर्क हो जाओ। यह पीढ़ी कहीं तक भी घुस सकती है! किसी भी सत्ता की चूलें हिला सकती है! कोई अप्रत्याशित घटना सामने आ सकती है! आप चुने हुए मुख्यमंत्री हो या मंत्री अथवा विधायक-सांसद हो, जनता ने ही आपको चुना है, जनता के ही नए प्रतिनिधि आपका निर्वाचन खारिज कर आपको ‘सत्ता’ से बेदखल कर सकते हैं! झारखंड की राजधानी रांची के युवा, छात्र आंदोलन ने साबित कर दिया है कि कंटीली तारों वाले बैरिकेड्स भी इस पीढ़ी के उग्र कदमों को रोकने में असमर्थ हैं। उन पर पानी की तेज, मोटी बौछार करो, तो ये युवा शैंपो के साथ नहाने लगते हैं, ‘होली’ का आनंद लूटने लगते हैं, मस्ती में नाचने लगते हैं। पुलिस का खौफ और आंसू गैस के गोलों की चुभन, दहशत और चोट की आशंकाएं सब कुछ ‘हवा’ हो रहा है। इस पीढ़ी को पुलिसिया लाठियां झेलने का अभ्यास हो गया है। अब एक लाठी शरीर पर पड़ती है, तो ये युवा ‘जन गण मन’ गाने लगते हैं, लेकिन रांची की जेन जी ने यह भी साबित कर दिया है कि वे ‘वर्दी’ का सम्मान करेंगे, पुलिसवालों को घेर कर नहीं पीटेंगे, उनके सिरों पर जानलेवा हमले नहीं करेंगे। हालांकि कुछ जूते-चप्पल और पानी की बोतलें रांची आंदोलन में भी पुलिसियों की ओर उछाली गईं। अलबत्ता दिल्ली के जंतर-मंतर और रांची के छात्र आंदोलन में यही बुनियादी, व्यावहारिक और मानसिक फर्क है। रांची के छात्र, युवा आंदोलन की खूबसूरती यह रही है कि जेन जी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन या किसी भी मंत्री का इस्तीफा नहीं मांगा। एक ही बुनियादी मांग है कि झारखंड लोक सेवा आयोग, कर्मचारी चयन आयोग में जिस तरह नौकरियों का बाजार सजा है, सरकारी पदों की बाकायदा रेटलिस्ट मौजूद, घोषित है, उसके मद्देनजर सीबीआई जांच कराई जाए। हालांकि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने खुद संज्ञान लेकर इस बाजार और आर्थिक लूटमारी की जांच करना तय किया है। नतीजतन दलालों और भ्रष्टाचारी चेहरों के बैंक खातों, अर्जित आय, लाखों-करोड़ों के लेन-देन, खरीद-फरोख्त के तमाम काले सच सामने आ सकते हैं! शायद मुख्यमंत्री सोरेन इन केंद्रीय जांच एजेंसियों की रणनीति जानते हैं, वह कुछ माह जेल में बिता चुके हैं, लेकिन आंदोलन के मद्देनजर सोरेन सरकार की राजनीतिक प्रतिष्ठा दांव पर है।

    सरकार के ‘इकबाल’ और उसकी न्यायशीलता पर सवाल उठ रहे हैं। मुख्यमंत्री खुद शिक्षा मंत्री भी हैं, लिहाजा क्या वह सीबीआई जांच में बेनकाब होने से डर रहे हैं? नौकरियों के बाजार में 20 लाख से 1 करोड़ रुपए तक की जो रेटलिस्ट सार्वजनिक हुई है, मुख्यमंत्री उस पर स्पष्टीकरण अथवा खंडन जारी क्यों नहीं कर रहे? एक चुनाव जीत कर और मुख्यमंत्री बनकर कोई ‘राजा-महाराजा’ नहीं बन सकता और जनता को ‘कीड़े-मकौड़े’ समझने की गलती नहीं कर सकता। इस आंदोलित पीढ़ी ने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को देश छोड़ कर भागने को विवश किया है। बेशक भारत में ऐसे उदाहरण नहीं हैं, लेकिन अब देश के विभिन्न हिस्सों में उग्र और गुस्सैल युवा पीढ़ी के आंदोलनों की खबरें आ रही हैं। कल भारत में भी, कुछ भी, अप्रत्याशित और अनहोनी घटनाएं सामने आ सकती हैं। क्या इन हालात को नजरअंदाज किया जा सकता है। रांची में युवा, छात्र सरकार के फैसलों को सतही, दिखावा मान रहे हैं, तो खुद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन आंदोलनकारी युवाओं के पास क्यों नहीं चले जाते? अहंकार किस बात का है। आवास और सिंहासन ‘अस्थायी’ हैं। विधानसभा भवन तक के मार्च में बिहार, बंगाल से लाए गए भाजपा कार्यकर्ता भी शामिल थे, ऐसे उथले, कुतर्की बयानों से युवाओं का यह ‘इंकलाब’ अब शांत नहीं किया जा सकता। ये सभी देश के नागरिक और बच्चे हैं, लिहाजा उन्हें दुत्कारा नहीं जा सकता। बेरोजगारी ऐसा विकराल मुद्दा है कि युवा, छात्र इंसाफ हासिल करने को कुछ भी करने की नौबत तक बढ़ सकते हैं। मुख्यमंत्री सोरेन और जिन राज्यों में ऐसे ‘इंकलाब’ दपदपा रहे हैं, वे होश में आएं और इस जेन जी को न्याय देने की सार्थक कोशिशें करें। युवाओं की मांगों को संबोधित किया जाना चाहिए, यही देश के हित में होगा।

    Share. Facebook Twitter Telegram WhatsApp Email
    chhattisgarhrajya.in
    chhattisgarhrajya.in
    • Website

    Related Posts

    क्यों उबल रही जेन जी?

    August 10, 2026

    ‘जेलें हैं या गैस्ट हाऊस’ पैसा दो…

    August 7, 2026

    …अग्निकांडों से’ जा रहे अनमोल प्राण!

    August 5, 2026

    Address - Gayatri Nagar, Near Ashirwad Hospital, Danganiya, Raipur C.G.

    Chandra Bhushan Verma
    Owner & Editor
    Mobile - 9826237000 Email - chhattisgarhrajya.in@gmail.com
    Facebook X (Twitter) Instagram Pinterest
    • About Us
    • Contact Us
    • Privacy Policy
    • Terms and Conditions
    • Disclaimer
    © 2026 ThemeSphere. Designed by ThemeSphere.

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.