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    Home»धर्म आस्था»पद्मिनी एकादशी : 3 साल बाद बना दुर्लभ संयोग, व्रत का महत्व और पूजा विधि
    धर्म आस्था

    पद्मिनी एकादशी : 3 साल बाद बना दुर्लभ संयोग, व्रत का महत्व और पूजा विधि

    chhattisgarhrajya.inBy chhattisgarhrajya.inMay 25, 2026
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    Padmini Ekadashi 2026: सनातन धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व माना गया है, लेकिन अधिकमास में पड़ने वाली पद्मिनी एकादशी को अत्यंत दुर्लभ और महापुण्यदायी बताया गया है. इसे कमला एकादशी के नाम से भी जाना जाता है. यह एकादशी केवल अधिकमास के शुक्ल पक्ष में आती है, इसलिए इसका संयोग लगभग तीन साल बाद बनता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक भगवान विष्णु तथा माता लक्ष्मी की पूजा करने से व्यक्ति को अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है और जीवन के कष्ट दूर होते हैं.

    कब रखा जाएगा पद्मिनी एकादशी व्रत?

    पद्मिनी एकादशी तिथि की शुरुआत 26 मई को सुबह 5 बजकर 10 मिनट से होगी और इसका समापन 27 मई को सुबह 6 बजकर 21 मिनट पर होगा. उदयातिथि के अनुसार वर्ष 2026 में यह व्रत 27 मई को रखा जाएगा. वहीं व्रत का पारण 28 मई की सुबह किया जाएगा. धार्मिक दृष्टि से सही समय पर व्रत और पारण करना बेहद शुभ माना जाता है.

    क्यों खास मानी जाती है यह एकादशी?

    वैदिक मान्यताओं के अनुसार अधिकमास भगवान विष्णु का प्रिय महीना माना गया है. इसी कारण इस महीने में किए गए जप, तप, दान और व्रत का फल कई गुना बढ़ जाता है. पद्मिनी एकादशी का व्रत व्यक्ति के जाने-अनजाने पापों का नाश करने वाला माना गया है. विशेष रूप से संतान सुख की कामना रखने वाले दंपतियों के लिए यह व्रत अत्यंत फलदायी बताया गया है. मान्यता है कि इस दिन व्रत कथा सुनने और भगवान विष्णु की आराधना करने से परिवार में सुख-समृद्धि आती है.

    ऐसे करें पूजा और व्रत

    इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और साफ पीले वस्त्र धारण करें. घर के मंदिर की सफाई कर एक चौकी पर पीला वस्त्र बिछाएं और भगवान विष्णु व माता लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करें. गंगाजल से अभिषेक करने के बाद भगवान को पीले अक्षत, पीले फल और माता लक्ष्मी को लाल पुष्प अर्पित करें. धूप-दीप जलाकर आरती करें और दिनभर “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें.

    दान से मिलेगा शुभ फल

    पद्मिनी एकादशी पर दान का विशेष महत्व बताया गया है. इस दिन जरूरतमंदों को चावल, दाल, आटा, घी, नमक, फल और वस्त्रों का दान करने से शुभ फल प्राप्त होता है. यह दान एकादशी के दिन या पारण से पहले किया जा सकता है.

    अस्वीकरण- यहाँ दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओ पर आधारित हैं किसी भी उपाय को अपनाने से पहले संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ से सलाह अस्वय ले।

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