सरकारी आदेश हवा में! किसी भी बैंक से जीवन प्रमाण पत्र जमा करने की सुविधा से पेंशनर वंचित — स्टेट बैंक के पेंशनर सबसे अधिक परेशान

भारतीय राज्य पेंशनर्स महासंघ, छत्तीसगढ़ प्रदेश के प्रांताध्यक्ष वीरेन्द्र नामदेव ने कहा है कि केंद्र सरकार ने स्पष्ट आदेश जारी किए हैं कि सभी पेंशनभोगी किसी भी राष्ट्रीयकृत बैंक के माध्यम से अपना डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र (Jeevan Pramaan) जमा कर सकते हैं। इसके बावजूद जमीनी हकीकत यह है कि कई बैंक इस सेवा से पेंशनरों को वंचित कर रहे हैं।
स्टेट बैंक (SBI) के पेंशनर सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं, क्योंकि पेंशनरों की सर्वाधिक संख्या SBI में है। लेकिन अन्य राष्ट्रीयकृत बैंक यह कहकर सहयोग नहीं कर रहे कि “यह हमारा पेंशन खाता नहीं है।” इस कारण पेंशनरों को “मैं जीवित हूँ” जैसे साधारण प्रमाण के लिए भी भटकना पड़ रहा है।
सिर्फ कुछ दिन शेष — 30 नवंबर अंतिम तिथि
जीवन प्रमाण पत्र जमा करने हेतु 30 नवंबर तक ही समय है। इसके बाद पेंशन रुक सकती है, इसलिए यह समस्या और गंभीर हो जाती है।
तकनीकी बाधाएँ भी भारी
- डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र जमा करने के लिए एंड्रॉयड स्मार्टफोन आवश्यक है।
- सभी पेंशनरों के पास एंड्रॉयड मोबाइल उपलब्ध नहीं है।
- प्रक्रिया में ओटीपी (OTP) अनिवार्य है — मोबाइल न होने पर OTP प्राप्त नहीं हो सकता।
- ऐसे वरिष्ठ पेंशनरों के लिए न मोबाइल, न डिजिटल माध्यम उपलब्ध है, इसलिए वे बैंक-बैंक भटक रहे हैं और किसी भी बैंक से मदद नहीं मिल रही।
नामदेव ने आगे बताया है कि यह स्थिति अत्यंत चिंताजनक है। सरकार की मंशा पेंशनरों को राहत देने की थी, लेकिन बैंकों की लापरवाही और असहयोग से यह सुविधा उल्टा पेंशनरों के लिए परेशानी का कारण बन गई है।
महासंघ की प्रमुख माँगें
- सभी राष्ट्रीयकृत बैंकों को स्पष्ट, अनिवार्य निर्देश जारी हों — वे किसी भी पेंशनर का डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र बनाएं, चाहे उसका खाता उनके यहाँ न हो।
- प्रत्येक बैंक शाखा में “पेंशनर सहायता डेस्क” स्थापित हो।
- वरिष्ठ नागरिकों के लिए मोबाइल/OTP-सम्बंधित समस्याओं के लिए विशेष सहायता सुविधा उपलब्ध कराई जाए।
- 30 नवंबर की अंतिम तिथि को देखते हुए, सरकार और बैंकिंग विभाग तत्काल निरीक्षण कर यह सुनिश्चित करें कि किसी भी पेंशनर की पेंशन बाधित न हो।
महासंघ का स्पष्ट कहना है कि पेंशनर समाज ने पूरे जीवन देश-प्रदेश की सेवा की है। जीवन प्रमाण पत्र जैसी सामान्य प्रक्रिया में भी उन्हें अपमानजनक स्थिति से गुजरना पड़े—यह किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं।
महासंघ जल्द ही इस संबंध में विस्तृत ज्ञापन केंद्र सरकार, वित्त मंत्रालय तथा बैंकिंग नियंत्रण प्राधिकरण को प्रेषित करेगा।



