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डरा रही है धराली की तस्वीरें, हर तरफ तबाही का मंजर, पढ़िए प्रमुख बातें

देहरादून:

उत्तरकाशी के धराली गांव में 5 अगस्त 2025 को हुई भीषण प्राकृतिक आपदा ने पहाड़ों की ताजगी में एक भयानक कोहरा बिखेर दिया. अचानक हुए बादल फटने की घटना ने खीर गंगा नदी को उफनाया और एक विशाल फ्लैश फ्लड के रूप में गांव पर टूट पड़ा.  कुछ ही क्षणों में पानी, मलबा, कीचड़ और चट्टानों की बाढ़ में 20‑25 होटल और होम‑स्टे बह गए.  कई घर, दुकानें और सड़कें मिनटों में खत्म हो गईं.  घटना की तीव्रता का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बचने की आशा में भागते दो लोगों की वीडियो रिकॉर्डिंग वायरल हुई.

भारी बारिश और भूस्खलन से राहत‑बचाव कार्य में परेशानी हो रही है.  सेना, NDRF, SDRF के अलावा स्थानीय प्रशासन ने जमीनी और हवाई अभियान चलाए. 150 से अधिक जवान तुरंत मौके पर पहुंचाए गए.  हर्षिल के पास सेना कैंप को भी क्षति पहुंची, जिसमें 11 जवान अब तक संपर्क से बाहर हैं. 

कैसे हुई घटना?

भोर के बाद, लगभग दोपहर तक, आस-पास के इलाकों में घने बादल जमा हो गए थे. अचानक बादल फटने के कारण हुई तेज बारिश ने नदी में मलबा और पानी भर दिया जिससे नदी का जलस्तर मिनटों में खतरनाक रूप से बढ़ गया. इस उफनती नदी ने धराली गांव को अपने साथ बहा लिया. होटल, दुकानें, घर, सड़कें सबकुछ बह गए. आस-पास के लोग चौंक गए, कई लोग फुटपाथ से भागते हुए देखे गए.

सरकारी और स्थानीय सूत्रों ने पुष्टि की है कि कम से कम चार लोग इस आपदा में मारे गए हैं. साथ ही, लगभग 50 से 100 लोग लापता बताए जा रहे हैं.  कई होटल टूट गए. धराली, जो गंगोत्री धाम जाने वाले यात्रियों के लिए एक प्रमुख पड़ाव है, में लगभग 20‑25 होटल और होम‑स्टे बह गए. पर्यटन व्यवसाय लगभग तबाह हो गया.

राहत और बचाव कार्य में हो रही है परेशानी

सेना ने मोर्चा संभाल लिया है. लगभग 150 जवान तुरंत धराली में पहुंच गए, साथ में ड्रोन, ट्रैकर कुत्ते और भारी मशीनरी भी लाई गई. SDRF, NDRF, स्थानीय प्रशासन की टीमें राहत अभियान में लगी हुई हैं. एक सेना अधिकारी ने बताया कि सेना कैंप भी बाढ़ की चपेट में आया, जिसमें करीब 11 सैनिक लापता हैं.  इसकी खोज अब भी जारी है. 

ग्राउंड जीरो पर पहुंचने में हो रही है परेशानी

गंगोत्री हाईवे पूरी तरह अवरुद्ध हो गया. कई पुल, सड़कें और संपर्क मार्ग क्षतिग्रस्त हुए हैं. मलबे की चादर ने पूरे क्षेत्र को ढक दिया है.  यह बाधा बचाव दलों की राह में बड़ी बाधा बन गई है.  कई गांव पूरी तरह से कट गए हैं. 

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