Close Menu
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Trending
    • मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी को इंडोनेशिया के सर्वोच्च नागरिक सम्मान से अलंकृत किए जाने पर दी बधाई
    • जीपीएम का ‘विष्णुभोग’ चावल बना महिलाओं की समृद्धि का नया ब्रांड, आधे घंटे में 45 हजार रुपये से अधिक की रिकॉर्ड बिक्री
    • छत्तीसगढ़ स्टेट वेयरहाउसिंग कार्पोरेशन के कर्मचारियों को उपहार
    • माननीय मुख्यमंत्री महोदय की गरिमामयी उपस्थिति में मनाया जाएगा “दीदी के गोठ” का वार्षिकोत्सव
    • मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय से झारखंड के वित्त मंत्री श्री राधाकृष्ण किशोर से की सौजन्य भेंट
    • रात भर चली जद्दोजहद, सुबह होते ही चोरों का बना ‘कार्टून’ शो…
    • स्वेच्छानुदान मद से सुदूर वनांचल स्थित स्वामी आत्मानंद स्कूल, मांझीगुडा को 10 कंप्यूटर प्रदत्त
    • क्या आपने कभी देखी ऐसी शादी-मेयर ने रचाई मगरमच्छ से शादी kiss करके पूरी की रस्म…
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Chhattisgarh RajyaChhattisgarh Rajya
    Tuesday, July 7
    • खानपान-सेहत
    • फीचर
    • राशिफल
    • लेख-आलेख
    • व्यापार
    • बिलासपुर
    • रायपुर
    • भिलाई
    • राजनाँदगाँव
    • कोरबा
    Chhattisgarh RajyaChhattisgarh Rajya
    Home»राष्ट्रीय»पहली बार गुजरात से श्रीलंका भेजे गए भगवान बुद्ध के अवशेष
    राष्ट्रीय

    पहली बार गुजरात से श्रीलंका भेजे गए भगवान बुद्ध के अवशेष

    chhattisgarhrajya.inBy chhattisgarhrajya.inFebruary 4, 2026
    Facebook Twitter WhatsApp Email Telegram
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn Pinterest Email

    अहमदाबाद/वडोदरा: गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने 63 साल में पहली बार भगवान बुद्ध से जुड़े अवशेषों को एमएस यूनवर्सिटी से बाहर निकालते हुए उन्हें श्रीलंका के लिए रवाना किया। इन अवशेषों को 14 जनवरी, 1963 को खोजे जाने के बाद महाराजा सयाजीराव यूनिवर्सिटी में रखा गया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पिछले साल श्रीलंका के बाद भारत ने वहां प्रदर्शनी में भेजने का फैसला किया था। इसी के तहत मंगलवार को एक कार्यक्रम में सीएम भूपेंद्र पटेल ने इन्हें रवाना किया। इस मौके पर गायकवाड़ परिवार से राजमाता शुभागिंनी राजे गायकवाड़ भी मौजूद रहीं। महाराजा सयाजीराव यूनिवर्सिटी गुजरात का प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय है।

    कोलंबो की प्रदर्शनी में रखे जाएंगे अवशेष
    श्रीलंका में भगवान बुद्ध के अवशेषों 4 से 10 फरवरी 2026 तक सार्वजनिक तौर पर प्रदर्शित किया जाएगा। कोलंबो में प्रदर्शनी के बाद यह अवशेष भारत वापस आ जाएंगे। भारत के इस कदम से दोनों देशों के बीच कटूनीतिक संबंधों के साथ आध्यामिक संबंध भी मजबूत होंगे। भगवान बुद्ध के पवित्र देवनीमोरी को श्रीलंका भेजना सांस्कृतिक कूटनीति का एक कदम है। राज्य सरकार के अनुसार गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत और गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे। पवित्र अवशेषों की प्रदर्शनी कोलंबो के गंगारामया मंदिर में 04-11 फरवरी, 2026 तक आयोजित की जाएगी।

    भावुक हो गया थे दलाई लामा
    भगवान बुद्ध से जुड़े ये अवशेष बेशकीमती हैं। इन अवशेषों को भारतीय वायु सेना के विमान से कोलंबो ले जाया जाएगा और इनके साथ गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत, उपमुख्यमंत्री हर्ष सांघवी, भिक्षुओं और वरिष्ठ अधिकारियों का एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी होगा। महाराजा सयाजीराव यूनिवर्सिटी के पुरातत्व विभाग की एक टीम भी इन अवशेषों के साथ जाएगी। एमएसयू के रजिस्ट्रार के एम चुडासमा ने कहा कि इन्हें आखिरी बार 2010 में सार्वजनिक प्रदर्शन के लिए रखा गया था। तब राज्य सरकार ने शहर में एक अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध सम्मेलन आयोजित किया था। सम्मेलन के मुख्य अतिथि दलाई लामा अवशेषों को देखकर भावुक हो गए थे। गौरतलब हो कि श्रीलंका में इन अवशेषों की यात्रा और प्रदर्शन पिछले साल अप्रैल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की श्रीलंका यात्रा के दौरान व्यक्त की गई आध्यात्मिक पहुंच और सांस्कृतिक कूटनीति का एक प्रतीक है।

    गुजरात में कहां पर मिले ये अवशेष?
    भगवान बुद्ध के यह अवशेष अरावल्ली जिले के शामलाजी के पास स्थित देवनी मोरी पुरातात्विक स्थल पर पाए गए थे। देवनी मोरी में खुदाई 1957 में एमएसयू के पुरातत्व विभाग के प्रोफेसर एस एन चौधरी के नेतृत्व में एक टीम द्वारा शुरू की गई थी। तब यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता जंगली जानवरों से खुद को बचाने के लिए बंदूकों से लैस होकर टेंट में रहते थे। 14 जनवरी 1963 को उन्हें एक छोटा सा ताबूत मिला और उस पर ब्राह्मी लिपि में ‘दशबल शरीर निलयः’ लिखा हुआ मिला। इसका मतलब था कि यह दशबल (बुद्ध) के अवशेषों का निवास स्थान है। यह ताबूत एक स्तूप के अंदर आधार से 24 फीट की ऊंचाई पर मिला था। इसमें एक तांबे का डिब्बा है, जिसमें पवित्र राख, रेशमी कपड़ा और मोतियों के साथ ऑर्गेनिक पदार्थ हैं। अब इन अवशेषों को एक एयर-टाइट डेसिकेटर में रखा गया है।

    Share. Facebook Twitter Telegram WhatsApp Email
    chhattisgarhrajya.in
    chhattisgarhrajya.in
    • Website

    Related Posts

    अरविंद केजरीवाल ने केंद्र से की अपील, पेट्रोल पंपों पर मिले E20, E10 और E0 फ्यूल का विकल्प

    July 7, 2026

    केंद्र सरकार को दिल्ली हाई कोर्ट से मिला झटका, कॉकरोच जनता पार्टी का एक्स अकाउंट बहाल करने का दिया आदेश

    July 7, 2026

    करूर भगदड़ मामले में गवाहों को प्रभावित करने के आरोपों पर सुप्रीम कोर्ट ने अपनाया सख्त रुख

    July 7, 2026

    Address - Gayatri Nagar, Near Ashirwad Hospital, Danganiya, Raipur C.G.

    Chandra Bhushan Verma
    Owner & Editor
    Mobile - 9826237000 Email - chhattisgarhrajya.in@gmail.com
    Facebook X (Twitter) Instagram Pinterest
    • About Us
    • Contact Us
    • Privacy Policy
    • Terms and Conditions
    • Disclaimer
    © 2026 ThemeSphere. Designed by ThemeSphere.

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.