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    Home»लेख-आलेख»सात अपीलें सरकार कीं…
    लेख-आलेख

    सात अपीलें सरकार कीं…

    chhattisgarhrajya.inBy chhattisgarhrajya.inMay 24, 2026
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    पीएम मोदी
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    प्रधानमंत्री जी ने हमें 7 सरल अपीलें की हैं। ये केवल सरकारी आदेश नहीं, ये हर परिवार, हर घर के लिए एक रोडमैप हैं। जहां तक संभव हो, घर से काम करें। मैट्रो और बस का उपयोग करें, पैट्रोल-डीजल बचाएं। एक साल तक सोना खरीदने और विदेश यात्रा से बचें। खाने के तेल का उपयोग कम करें। प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ें, रासायनिक खाद कम इस्तेमाल करें और विदेशी ब्रांड की बजाय स्वदेशी उत्पाद चुनें। इन सातों की एक ही आवाज है, एक ही संदेश है-राष्ट्र प्रथम। ये सात बिंदू हमारे दैनिक जीवन के हर पहलू को छूते हैं।  हम कैसे यात्रा करते हैं, क्या खाते हैं, क्या खरीदते हैं और कैसे खेती करते हैं। 

    इनका निशाना एक बड़ी समस्या पर है। भारत कच्चा तेल, सोना, खाद्य तेल, रासायनिक खाद और विदेशी सामान खरीदने के लिए भारी मात्रा में पैसा विदेश भेजता है। अगर हम अपनी आदतों में थोड़ा भी बदलाव लाएं, तो हम देश के करोड़ों रुपए बचा सकते हैं। यही आत्मनिर्भर भारत है, जो हमारी रसोई से, हमारे दफ्तरों से और हमारी सड़कों से शुरू होता है। लेकिन नागरिक होने के नाते, हम इस सूची में एक और अपील जोड़ सकते हैं। एक आठवीं अपील, जो हमारे अपने सामाजिक मूल्यों और रोजमर्रा के अनुभवों से जन्मी हो। जरा अपने पारिवारिक रीति-रिवाजों के बारे में सोचिए। जब किसी का निधन होता है, हम श्रद्धांजलि सभा में शामिल होने के लिए लंबी दूरी तय करते हैं। जब कोई रिश्तेदार बीमार पड़ता है या हादसे का शिकार होता है, हम व्यक्तिगत रूप से खबर लेने के लिए दौड़ पड़ते हैं। यही हमारी संस्कृति है। हमारा प्यार और हमारी परवाह सच्ची है। कोई भी इन भावनाओं को बदलना नहीं चाहता। लेकिन कभी-कभी दूरी बहुत अधिक होती है। हम घंटों सड़क पर बिताते हैं, लीटरों पैट्रोल जलाते हैं, टिकटों पर पैसे खर्च करते हैं, थोड़ी देर की उपस्थिति दर्ज कराने के लिए। इसे देशभर के लाखों परिवारों से गुणा करें, तो ईंधन में छिपी लागत बहुत बड़ी है। 

    अब, एक छोटे-से बदलाव की कल्पना कीजिए। जब भौतिक उपस्थिति वास्तव में संभव न हो, या जब यह एक बहुत लंबी, ईंधन जलाने वाली यात्रा बन जाए, तो हम ऑनलाइन जुडऩे का विकल्प चुन सकते हैं। एक गरिमामयी वीडियो कॉल पर श्रद्धांजलि सभा, जहां परिवार के सभी सदस्य अपने-अपने घरों से जुड़ें, एक साथ स्क्रीन पर दीया जलाएं और प्रार्थना करें, क्या इसमें वही हाॢदक भावना नहीं है? एक बीमार रिश्तेदार को गर्मजोशी भरी वीडियो कॉल, जहां वे आपका चेहरा देख सकें और आपकी आवाज सुन सकें। क्या यह खबर लेना अपने सबसे सच्चे रूप में नहीं है? यह हमारे संस्कारों को बदलने की बात नहीं, उन्हें टिकाऊ बनाने की है। देखिए, यह छोटा-सा बदलाव हमारे देश के लिए क्या कर सकता है।

    1. पैट्रोल-डीजल की बचत : हर टाली गई लंबी यात्रा का मतलब है ईंधन भारत के टैंक में बचा रहा, सड़क पर नहीं जला। यह सीधे प्रधानमंत्री जी की ईंधन खपत कम करने की अपील को साकार करता है। 
    2. विदेशी मुद्रा की बचत : कम ईंधन जलाने का मतलब है कम कच्चा तेल आयात होना। हमारे देश के कीमती डॉलर घर पर रहते हैं। 
    3. धन की बचत : टिकट का वह पैसा, ईंधन की वह लागत आपकी जेब में आपके परिवार की जरूरतों के लिए बच जाती है। 
    4. प्रदूषण में कमी : सड़कों पर कम वाहन, हमारे बच्चों के सांस लेने के लिए स्वच्छ हवा। 
    5. समय की बचत : घंटों की यात्रा मिनटों के सार्थक जुड़ाव में बदल जाती है। टैक्नोलॉजी सिर्फ ऑफिस के काम और मनोरंजन के लिए नहीं, यह हमारे देश की सेवा कर सकती है। वहीं वर्क फ्रॉम होम का तर्क, जो प्रधानमंत्री जी ने दफ्तरों के लिए सुझाया, हमारे सामाजिक कत्र्तव्यों पर भी लागू हो सकता है। 

    यही स्वदेशी का सही अर्थ है-अपने संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग करना, तेल के लिए विदेशों में पैसा नहीं भेजना। प्रधानमंत्री की 7 अपीलें तब चमत्कार दिखाएंगी, जब सरकार इन पर अमल करेगी। लेकिन ये तब करिश्मा बन जाएंगी, जब हम, आम जनता इन्हें अपनाएंगे और अपने विचार इनसे जोड़ेंगे। एक ऑनलाइन शोक सभा परंपरा का अपमान नहीं है। यह कहने का एक जिम्मेदार, विचारशील तरीका है, कि मुझे परवाह है, अपने परिवार की भी और अपने देश की अर्थव्यवस्था की भी। 
    तो आइए, आज हम सब चुपचाप इस आठवीं अपील को अपना बना लें। जहां तक संभव हो, मैं सामाजिक जुड़ाव के लिए डिजिटल साधनों का उपयोग करूंगा, ताकि परिवार के प्रति मेरा प्रेम और राष्ट्र के प्रति मेरा कर्तव्य, दोनों कंधे से कंधा मिलाकर चलें। छोटे-छोटे बदलाव। करोड़ों लोग। एक महान राष्ट्र। यही राष्ट्र प्रथम है। यही हमारा भारत है।-निभी बांसल 

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