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मेरे प्यारे देशवासियो… स्पेस स्टेशन से शुभांशु शुक्ला ने देश के नाम भेजा स्पेशल मेसेज

भारत के लाल शुभांशु शुक्ला ने अंतरिक्ष में इतिहास बना दिया है. 28 घंटे की सफर के बाद भारतीय अतंरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला का ड्रैगन कैप्शूल गुरुवार शाम करीब 4 बजे इंटरनेशनल स्पेश स्टेशन पर पहुंचा. शुभांशु के कैप्शूल की डॉकिंग की प्रक्रिया जारी है. शुभांशु शुक्ला और तीन अन्य अंतरिक्ष यात्रियों के Axiom-4 मिशन को लेकर SpaceX के ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट ने बुधवार, 25 जून को फ्लोरिडा में नासा के कैनेडी स्पेस सेंटर से सफल उड़ान भरी थी. उन्हें SpaceX के ही फाल्कन 9 रॉकेट से लॉन्च किया गया था. 

शुभांशु शुक्ला टीम के इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पहुंचने की तस्वीरें आई सामने

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ISS में शुभांशु शुक्ला और टीम के अन्य सदस्य.

ISS डॉकिंग: डॉकिंग का मतलब है ड्रैगन अंतरिक्ष यान का इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पहुंचने के बाद उससे जुड़ जाना. लगभग 28 घंटे की यात्रा के बाद Axiom-4 मिशन को लेकर ड्रैगन अंतरिक्ष यान भारतीय समयानुसार गुरुवार, 26 जून को शाम करीब 4 बजे ISS पर डॉक कर गया.

ISS पर एक्सपेरिमेंट: मिशन क्रू के चारों सदस्य इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर लगभग 14 दिन रहेंगे और इस दौरान वो 60 एक्सपेरिमेंट भी करेंगे. यह आज तक इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर Axiom स्पेस मिशन पर आयोजित सबसे अधिक शोध और विज्ञान से संबंधित गतिविधियां होंगी.

इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन से शुभांशु शुक्ला ने भेजा मेसेज

इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन से शुभांशु शुक्ला ने देशवासियों के लिए मैसेज भेजा है. उन्होंने कहा कि  मेरे प्‍यारे देशवासियों… मैं यहां पर पहुंच चुका हूं. यहां पर खड़े रहना मुश्किल है… सर थोड़ा भारी हो रहा है लेकिन आप सबकी शुभकामनाएं साथ हैं. चक्कर आ रहा है, लेकिन अगले 14 दिनों के लिए उत्साहित हूं.

एक्सिओम-4 की सफल डॉकिंग पर केंद्रीय मंत्री बोले- दुनिया में भारत की छवि बदली

ISS में AxiomMission4 की सफल डॉकिंग पर केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा, “अभी डॉकिंग हो गई है. सारी प्रक्रिया बहुत सक्षम है और इतने आत्मविश्वास के साथ की जा रही है कि निर्धारित समय से 30-40 मिनट पहले ही डॉकिंग की प्रक्रिया हो गई. बार-बार उनको रिहर्सल कराया गया है. वहां जितने भी प्रयोग होने वाले हैं, उन सबकी सामग्री भारत में विकसित की गई है, तो हो गया आत्मनिर्भर भारत. वहां से जो प्रयोग होंगे, जो नतीजे निकलेंगे वो दूसरे देशों के काम आएंगे, तो हो गया विश्वबंधु भारत और जिस प्रकार से भारत इन सब प्रक्रियाओं में अब अगुवाई करने लगा है, तो वो हो गया विकसित भारत. मुझे लगता है कि यह दुनिया के लिए एक बहुत बड़ा संकेत है और इससे दुनिया के आगे भारत की छवि बदली है…”

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