Close Menu
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Trending
    • नई दिल्ली में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से की सौजन्य भेंट
    • शासन की संवेदनशीलता और जनभागीदारी का अनूठा उदाहरण​​‘जन भागीदारी सबसे दूर, सबसे पहले’ अभियान बना ग्रामीणों की उम्मीदों का नया सवेरा
    • ग्रीष्म काल में स्वच्छ और नियमित पेयजल पहुंचाने लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग सतर्क
    • बदलता इंफ्रास्ट्रक्चर, बढ़ता भारतः रायपुर-विशाखापट्टनम कॉरिडोर से खुलेगा तरक्की का द्वार
    • MLC Election: सीटों के बंटवारे पर CM का बड़ा बयान, ‘मुझे भरोसा है कि…’
    • महिला कांग्रेस की अध्यक्ष अलका लांबा इस मामले में दोषी करार
    • बिना फिल्में किए भी दीपिका,आलिया और पति अभिषेक से ज्यादा अमीर हैं ऐश्वर्या राय
    • सालों तक पार्टनर की तलाश करते हैं सांप, 10 साल तक करते हैं इंतजार
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Chhattisgarh RajyaChhattisgarh Rajya
    Monday, May 25
    • खानपान-सेहत
    • फीचर
    • राशिफल
    • लेख-आलेख
    • व्यापार
    • बिलासपुर
    • रायपुर
    • भिलाई
    • राजनाँदगाँव
    • कोरबा
    Chhattisgarh RajyaChhattisgarh Rajya
    Home»लेख-आलेख»गंभीर भूजल संकट की आहट…
    लेख-आलेख

    गंभीर भूजल संकट की आहट…

    chhattisgarhrajya.inBy chhattisgarhrajya.inMay 23, 2026
    Facebook Twitter WhatsApp Email Telegram
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn Pinterest Email

    देश में जल भंडारों की स्थिति दिनों-दिन चिंताजनक होने के साथ जबरदस्त दबाव में है। ऐसे अनगिनत क्षेत्र बढ़ते ही जा रहे हैं, जहां गर्मियों के दस्तक देते ही जबरदस्त जल संकट दिखने लगता है। केन्द्रीय जल आयोग की बीते महीने 30 अप्रैल को जारी रिपोर्ट और चिंता बढ़ाती है।

    166 प्रमुख जलाशयों में वर्तमान क्षमता घटकर महज 38.72 प्रतिशत रह गई है, जबकि इसी 9 अप्रैल को यह 44.71 प्रतिशत थी। इसी से भयावहता का अंदाजा लगाया जा सकता है। अगर राज्यवार बात करें तो असम, त्रिपुरा, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश और गोवा में जलाशयों का स्तर न केवल बीते वर्ष से, बल्कि सामान्य औसत से भी नीचे जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, दक्षिण भारत में 36 जलाशय 40 प्रतिशत से कम भरे हैं। महज आंकड़ों से ही चिंता बहुत ज्यादा बढ़ती है क्योंकि असम, त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल में रिपोर्ट सामान्य से 40 प्रतिशत से अधिक की कमी दर्शाती है। वहीं खांडोंग, चंदन, पेरियार, वैगई और कांगसबाती जैसे बड़े जलाशय अपनी क्षमता से 50 प्रतिशत से भी नीचे हैं। निश्चित रूप से इसका असर पेयजल पर तो पड़ेगा ही, साथ ही सिंचाई और जलविद्युत उत्पादन परियोजनाएं भी गंभीर रूप से प्रभावित हो रही हैं जो और होंगी।

    इतना ही नहीं, देश की प्रमुख नदियों के बेसिन में भी अप्रैल की तुलना में पानी का स्तर घटना दूसरी बड़ी चिंता का सबब बना हुआ है। बेसिन वास्तव में पृथ्वी की सतह का वह भू-भाग होता है, जहां बारिश का पानी और पिघली हुई बर्फ बहकर एक मुख्य नदी और उसकी सहायक नदियों में मिल जाती है। सरल शब्दों में, यह एक बड़े कटोरे के समान वह पूरा क्षेत्र होता है, जिसका पानी एक ही जल प्रणाली से होकर गुजरता है। गंगा बेसिन 53.8 प्रतिशत से गिरकर लगभग 50.01 प्रतिशत, गोदावरी 47.58 प्रतिशत से घटकर 40.69 प्रतिशत और नर्मदा 46.09 प्रतिशत से 38.82 प्रतिशत की गिरावट पर पहुंच गया है। 

    इस सारी स्थिति को एक ही नक्शे पर देखें तो समझ आता है कि भारत भर में मुख्य जलाशयों की कुल क्षमता 40 प्रतिशत से भी नीचे आ गई है। यह स्थिति की गंभीरता को समझने के लिए काफी है। वहीं यदि जल आयोग की साप्ताहिक विज्ञप्तियां देखें तो स्थिति की नजाकत और समझ आती है। देश में 166 जलाशयों की मौजूदा भंडारण क्षमता 183.565 घन मीटर है, जिनमें हालिया रिपोर्ट के अनुसार 71.082 घन मीटर ही पानी रह गया है। इनमें 20 वे जलाशय भी हैं, जो जलविद्युत परियोजनाओं से संबद्ध हैं और इनकी कुल मिलाकर क्षमता 35.299 घन मीटर है। यदि दीर्घकालीन स्थिति में देखें, सन् 2030 तक देश की 40 प्रतिशत आबादी के समक्ष गंभीर जल संकट उत्पन्न हो सकता है। इसका मतलब यह कतई नहीं है कि अभी देश में कोई संकट नहीं है। इस संकट की प्रमुख वजहों में सबसे बड़ा कारण भूजल का अंधाधुंध दोहन है। यह भी ध्यान रखना होगा कि भारत विश्व में भूजल का सबसे ज्यादा उपयोग करने वाला देश है और जल गुणवत्ता सूचकांक में भारत 122 देशों में 120वें स्थान पर है। इसमें चिंताजनक यह कि 70 प्रतिशत जल स्रोत प्रदूषित हैं। नीति आयोग खुद मानता है कि शहरी जल संकट तेजी से बढ़ रहा है। 21 प्रमुख भारतीय शहर भूजल समाप्ति की कगार पर हैं। देश में 75 प्रतिशत से अधिक जल सिंचाई के लिए कृषि क्षेत्र में कहीं सही, कहीं गलत ढंग से उपयोग होता है। 

    भारत में दुनिया की आबादी का लगभग 18 प्रतिशत हिस्सा है, जबकि उपलब्ध पीने लायक पानी केवल 4 प्रतिशत ही है। इसी से स्थिति समझ आती है। अक्सर जलाशयों या जल संग्रह स्थलों पर पानी दिखता तो है लेकिन ऐसे स्तर पर पहुंच चुका होता है, जहां से सामान्यत: निकालना संभव नहीं होता। यह इतना नीचे चला जाता है कि गुरुत्वाकर्षण आधारित सामान्य निकासी संभव नहीं होती। विशेष पंपिंग की जरूरत पड़ती है, जो महंगी और सीमित होती है। इसलिए, जलाशयों का बड़ा हिस्सा डैड स्टोरेज में चला जाता है। समय के साथ यही हिस्सा गाद और तलछट की वजह बनता है। अक्सर दिखते हुए भी पानी उपयोग योग्य नहीं रहता। इन्हीं हालातों से 30 से 40 प्रतिशत दिख रहे पानी का उपयोग नहीं हो पाता।

    समय के साथ भूजल स्तर बढ़ाने और दोहन सीमित करने की दिशा में गंभीरता से सोचना होगा। अनियमित रेत खनन, नदी तल का क्षरण, रियल एस्टेट के आक्रामक यांत्रिक उत्खनन के चलते प्राकृतिक तटीय अवरोध और नदी जल संरचनाएं छिन्न-भिन्न हो जाती हैं। इससे व्यवस्थित और प्राकृतिक जल प्रवाह और पारिस्थितिकी तंत्र प्रणाली अत्यंत गंभीर रूप से प्रभावित होती है। नदियों की आधुनिक चक्रीय उपयोगिता व्यवस्था में अपशिष्ट जल पुन: उपयोगी बनाने की बजाय खुले अपशिष्ट निस्तारण माध्यम के रूप में उपयोग करना देश के उपलब्ध सतही जल संसाधनों को स्वयं नष्ट करने के समान है, जो बेखौफ करते हैं। निश्चित रूप से समय रहते जल की उपयोगिता और भूतल जल बढ़ाने के लिए तरह-तरह की और पूरे देश में वाटर रिचार्ज प्रणालियों पर गंभीरता से सोचना होगा। अभी इसका खामियाजा पानी की कमी के रूप में है। भविष्य में निदान में तत्परता नहीं दिखाई तो आने वाला कल बिना पेयजल का भी हो सकता है। तब क्या हालात होंगे सोचकर ही सिहरन होती है। काश, जन और तंत्र दोनों इस दिशा में गंभीरता से सोचते!-ऋतुपर्ण दवे

    Share. Facebook Twitter Telegram WhatsApp Email
    chhattisgarhrajya.in
    chhattisgarhrajya.in
    • Website

    Related Posts

    बदलता इंफ्रास्ट्रक्चर, बढ़ता भारतः रायपुर-विशाखापट्टनम कॉरिडोर से खुलेगा तरक्की का द्वार

    May 25, 2026

    नए श्रम कानून व्यापार समझौतों में फूंकेंगे जान…

    May 25, 2026

    सात अपीलें सरकार कीं…

    May 24, 2026

    Address - Gayatri Nagar, Near Ashirwad Hospital, Danganiya, Raipur C.G.

    Chandra Bhushan Verma
    Owner & Editor
    Mobile - 9826237000 Email - chhattisgarhrajya.in@gmail.com
    Facebook X (Twitter) Instagram Pinterest
    • About Us
    • Contact Us
    • Privacy Policy
    • Terms and Conditions
    • Disclaimer
    © 2026 ThemeSphere. Designed by ThemeSphere.

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.