Close Menu
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Trending
    • कल का मौसम : आ रहा चक्रवाती तूफान! 48 घंटे इन राज्यों के लिए IMD ने जारी किया अलर्ट…
    • छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल की OTS-2 योजना को बड़ी सफलता, अब तक 62.5 प्रतिशत संपत्तियों का विक्रय
    • मारकंडी नदी से शहर तक पहुंचेगा पानी, बस्तर जलप्रदाय योजना के लिए 57.71 करोड़ मंजूर
    • केंद्र सरकार ने आईएएस अधिकारी डॉ. सज्जन सिंह यादव को किया जम्मू-कश्मीर का नया मुख्य सचिव नियुक्त…
    • गढ़फुलझर में बाबा बिशासहे कुल कोलता समाज के वार्षिक स्नेह सम्मेलन एवं बंधु मिलन में शामिल हुए मुख्यमंत्री श्री साय
    • दूसरे T20I मैच में भारत ने न्यूजीलैंड को चार विकेट से हराया साथ पांच मैचों की सीरीज में 2-0 की बढ़त…
    • पिनाकोटा के पास सड़क निर्माण स्थल पर आग लगने से 5 लोगों की मौत…
    • राष्ट्र प्रथम—नारी शक्ति एवं वरिष्ठजन सम्मान के संकल्प के साथ होगा महिला सीनियर सिटीजन पेंशनर्स सम्मेलन
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Chhattisgarh RajyaChhattisgarh Rajya
    Saturday, October 24
    • खानपान-सेहत
    • फीचर
    • राशिफल
    • लेख-आलेख
    • व्यापार
    • बिलासपुर
    • रायपुर
    • भिलाई
    • राजनाँदगाँव
    • कोरबा
    Chhattisgarh RajyaChhattisgarh Rajya
    Home»लेख-आलेख»जिम्मेदारी के कानून से रुकेंगे भगदड़ के हादसे
    लेख-आलेख

    जिम्मेदारी के कानून से रुकेंगे भगदड़ के हादसे

    chhattisgarhrajya.inBy chhattisgarhrajya.inOctober 24, 2026
    Facebook Twitter WhatsApp Email Telegram
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn Pinterest Email

    भीड़ की वास्तविक समय में निगरानी के लिए ड्रोन, सीसीटीवी कैमरे, पीए (पब्लिक एड्रेस) सिस्टम और स्मार्ट कंट्रोल रूम का उपयोग किया जाना चाहिए। भगदड़ अक्सर झूठी अफवाहों या अचानक घबराहट से होती है। इसके लिए लाउडस्पीकर के जरिए लगातार सही और स्पष्ट सूचनाएं दी जानी चाहिए। हाल ही में ब्यूरो ऑफ पुलिस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ने भीड़ नियंत्रण और सामूहिक समारोहों के प्रबंधन के लिए वैज्ञानिक और निवारक रणनीतियों पर ध्यान केंद्रित करते हुए व्यापक नए दिशानिर्देश जारी किए हैं। इसका उद्देश्य पुलिस बल को आधुनिक और मनोवैज्ञानिक तरीकों से भीड़ संभालने के लिए प्रशिक्षित करना है। लेकिन इन दिशा निर्देशों की देशभर में धज्जियां उड़ाई जा रही हैं…

    देश में हादसों की पुनरावृत्ति से यही लगता है कि देश के नेताओं और अफसरों को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। नेताओं की निगाहें वोट बैंक और अफसरों की सिर्फ अपनी कुर्सी बचाने में लगी रहती हैं। यही वजह है कि हादसे दर हादसे होते रहते हैं और देश की नौकरशाही पर इसका कोई प्रभाव नजर नहीं आता। इसका कारण है कि अभी तक देश में ऐसे हादसों की जिम्मेदारी का कोई कानून नहीं बना है। उत्तर कोलकाता के चोरबागान सार्वजनिक दुर्गापूजा पंडाल में 17 अक्टूबर की शाम तेज बारिश के बीच पंडाल के गिरने की एक चेतावनी के बाद मची भगदड़ में 19 लोगों की जान चली गई, जबकि 25 लोग घायल हो गए। अब इस हादसे के बाद जांच के नाम पर लीपापोती की जा रही है। इसकी न्यायिक जांच की घोषणा की गई है। दरअसल इस देश में नौकरशाह सबसे सुरक्षित हैं। देश में आज तक जितने भी बड़े हादसे हुए हैं, इनकी लापरवाही और गैर जिम्मेदारी से हुए हैं। लेकिन व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं आया। भारत में धार्मिक आयोजनों, मंदिरों, मेलों और रेलवे स्टेशनों पर समय-समय पर कई बड़ी भगदड़ की घटनाएं आजादी के बाद से होने लग गई थी। आजादी के बाद पहली बार कुंभ मेले में 3 फरवरी 1954 को, इलाहाबाद (अब प्रयागराज) में स्नान करने के दौरान भगदड़ मचने से 800 लोग नदी में डूबकर मर गए थे। इसी तरह 1986 में हरिद्वार में कुंभ मेले में 200 लोगों की जान चली गई।

    यह अराजकता तब फैली जब तत्कालीन उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री वीर बहादुर सिंह कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों और सांसदों के साथ हरिद्वार पहुंचे। जब सुरक्षाकर्मियों ने आम लोगों को नदी के किनारे जाने से रोक दिया, तो बेकाबू हो गई और भगदड़ मच गई। साल 2003 में महाराष्ट्र के नासिक कुंभ मेले में भगदड़ मचने से 39 लोग मारे गए थे। फरवरी 2013 में कुंभ मेले के दौरान इलाहाबाद रेलवे स्टेशन पर एक फुटब्रिज के ढह जाने की त्रासदी में 42 लोगों की जान चली गई थी। इन हादसों से नेताओं और अफसरों ने कोई सबक नहीं सीखा। फलस्वरूप हादसों की पुनरावृत्ति देश में होती रही। प्रयागराज में हादसे में 30 लोगों की मौत हो गई। वहीं, 90 लोग घायल हो गए। इंदौर में एक प्राचीन बावड़ी के ऊपर बनी स्लैब ढह जाने से 36 लोगों की मौत हो गई थी। इसी तरह जनवरी 2022 में जम्मू-कश्मीर स्थित प्रसिद्ध माता वैष्णो देवी मंदिर में भगदड़ में 12 लोगों की मौत हो गई थी। साल 2015 में आंध्र प्रदेश में गोदावरी नदी के स्नान स्थल पर भगदड़ से 27 तीर्थयात्रियों की मृत्यु हो गई। साल 2014 में पटना के गांधी मैदान में भगदड़ मचने से 32 लोगों की मौत हो गई। 13 अक्टूबर 2013 को मध्य प्रदेश के दतिया जिले में रतनगढ़ मंदिर के पास भगदड़ में 115 लोगों की मौत हो गई। हादसों की इस श्रृंखला में 19 नवंबर 2012 पटना में छठ पूजा के दौरान एक अस्थायी पुल के ढह जाने से मची भगदड़ में लगभग 20 लोगों की मौत हो गई। 8 नवंबर 2011 को हरिद्वार में गंगा नदी के तट पर हरकी पौड़ी घाट पर मची भगदड़ में कम से कम 20 लोगों की मौत हो गई। इसी तरह 14 जनवरी 2011 को केरल के इडुक्की जिले के पुलमेडु में एक जीप के सबरीमाला मंदिर के दर्शन कर लौट रहे तीर्थयात्रियों से टकरा जाने के कारण मची भगदड़ में कम से कम 104 श्रद्धालुओं की मौत हो गई और 40 से अधिक घायल हो गए। हादसे लगातार पूरे देश में होते रहे हैं, राज्यों की सरकारों ने दूसरे प्रदेशों में हुए हादसों से कुछ नहीं सीखा। 4 मार्च 2010 को उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले में कृपालु महाराज के राम जानकी मंदिर में भगदड़ मचने से लगभग 63 लोगों की मौत हो गई। लोग स्वयंभू धर्मगुरु द्वारा दान किए जा रहे कपड़े और भोजन लेने पहुंचे थे। वर्ष 2008 में राजस्थान के जोधपुर शहर में चामुंडा देवी मंदिर में बम विस्फोट की अफवाह के कारण मची भगदड़ में लगभग 250 श्रद्धालु मारे गए और 60 से अधिक घायल हो गए।

    साल 2008 में हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले में नैना देवी मंदिर में चट्टान खिसकने की अफवाह के कारण मची भगदड़ में 162 लोगों की मौत हो गई, 47 घायल हो गए। महाराष्ट्र में मंधारदेवी मंदिर में 340 से अधिक श्रद्धालुओं की कुचलकर मौत हो गई थी। भारत में भगदड़ जैसे हादसों को रोकने के लिए एक व्यापक राष्ट्रीय नीति और कानूनी ढांचा मौजूद है। मुख्य रूप से आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 के तहत राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) को इस दिशा में नीतियां और दिशानिर्देश बनाने की वैधानिक जिम्मेदारी दी गई है। एनडीएमए ने विशेष रूप से बड़े आयोजनों, त्योहारों और धार्मिक स्थलों पर भीड़ को संभालने के लिए ‘मैनेजिंग क्राउड एट इवेंट्स एंड वेन्यूज ऑफ मास गैदरिंग’ नाम से एक विस्तृत गाइडलाइन जारी की है। इसमें कार्यक्रम आयोजित करने से पहले उस जगह की अधिकतम क्षमता का आकलन करना अनिवार्य है, ताकि क्षमता से अधिक लोग वहां न जुटें। आयोजन स्थलों पर आने और जाने के रास्ते बिल्कुल अलग और स्पष्ट होने चाहिए। इसके अलावा आपातकालीन निकास की भी उचित व्यवस्था अवश्य ही होनी चाहिए।

    भीड़ की वास्तविक समय में निगरानी के लिए ड्रोन, सीसीटीवी कैमरे, पीए (पब्लिक एड्रेस) सिस्टम और स्मार्ट कंट्रोल रूम का उपयोग किया जाना चाहिए। भगदड़ अक्सर झूठी अफवाहों या अचानक घबराहट से होती है। इसके लिए लाउडस्पीकर के जरिए लगातार सही और स्पष्ट सूचनाएं दी जानी चाहिए। हाल ही में ब्यूरो ऑफ पुलिस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ने भीड़ नियंत्रण और सामूहिक समारोहों के प्रबंधन के लिए वैज्ञानिक और निवारक रणनीतियों पर ध्यान केंद्रित करते हुए व्यापक नए दिशानिर्देश जारी किए हैं। इसका उद्देश्य पुलिस बल को आधुनिक और मनोवैज्ञानिक तरीकों से भीड़ संभालने के लिए प्रशिक्षित करना है। लेकिन इन दिशा निर्देशों की देशभर में धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। देश की अदालतें भी ऐसे हादसों की पुनरावृत्ति रुकवाने में नाकाम रही हैं। जनवरी 2026 में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने धार्मिक व राजनीतिक आयोजनों में भगदड़ रोकने के लिए व्यापक निर्देश जारी करने से इनकार कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को इस मामले में केंद्रीय गृह मंत्रालय और चुनाव आयोग के समक्ष अपनी बात रखने की छूट दी थी। ऐसे हादसों के बाद सरकारें सिर्फ घडिय़ाली आंसू बहाती हैं। मृतकों और घायलों को मुआवजा देकर अपनी जिम्मेदारी पूरी कर लेती हैं। इन हादसों की जांच रिपोर्टों को आयोजनों पर कभी लागू नहीं किया जाता। कई बार तो यह भी पता नहीं चलता कि इन रिपोर्टों में क्या कारण और सुझाव दिए गए हैं। वक्त के साथ ऐसी रिपोर्टें फाइलों के ढेर में दफन हो जाती हैं। यह निश्चित है कि जब तक अफसरों की जिम्मेदारी के लिए कठोर कानून नहीं बनेंगे, ऐसे हादसे कभी नहीं रुकेंगे।-योगेंद्र योगी

    Share. Facebook Twitter Telegram WhatsApp Email
    chhattisgarhrajya.in
    chhattisgarhrajya.in
    • Website

    Related Posts

    पानी बचाना अब सबसे बड़ी जिम्मेदारी

    October 24, 2026

    मोनालिसा से सीखें जिंदगी का सबक, दूसरों की राय से तय न करें अपनी काबिलियत

    October 23, 2026

    रियलिटी शोज : युवाओं को बेचा जा रहा लोकप्रियता का नशा

    October 23, 2026

    Address - Gayatri Nagar, Near Ashirwad Hospital, Danganiya, Raipur C.G.

    Chandra Bhushan Verma
    Owner & Editor
    Mobile - 9826237000 Email - chhattisgarhrajya.in@gmail.com
    Facebook X (Twitter) Instagram Pinterest
    • About Us
    • Contact Us
    • Privacy Policy
    • Terms and Conditions
    • Disclaimer
    © 2026 ThemeSphere. Designed by ThemeSphere.

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.