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    Home»धर्म आस्था»रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग का रहस्य, पाप मुक्ति के लिए भगवान राम ने यहां की थी भगवान शिव की पूजा?
    धर्म आस्था

    रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग का रहस्य, पाप मुक्ति के लिए भगवान राम ने यहां की थी भगवान शिव की पूजा?

    chhattisgarhrajya.inBy chhattisgarhrajya.inFebruary 6, 2026
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    Rameshwaram Jyotirlinga: रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग तमिलनाडु के रामनाथपुरम जिले में रामेश्वरम द्वीप पर स्थित है. यह भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है. यह मंदिर अपनी भव्य वास्तुकला, 22 पवित्र कुंडों और लंबे गलियारों के लिए जाना जाता है. मान्यता है कि यहां जो भी श्रद्धालु महादेव की सच्चे मन से आराधना करता है, उसके सभी पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है. कहा जाता है कि स्वयं भगवान राम ने पाप मुक्ति के लिए इस स्थान पर भगवान शिव की स्थापना और पूजा की थी. अब आपके मन में सवाल आ रहा होगा कि भगवान राम तो मर्यादा पुरुषोत्तम हैं, उनसे भला कौन सा पाप हुआ होगा? और क्या उन्हें पापों से मुक्ति मिली थी? आइए, एक पौराणिक कथा के माध्यम से जानते हैं इन सभी सवालों के जवाब.

    पौराणिक कथा

    ब्रह्महत्या का दोष

    पौराणिक कथा के अनुसार, त्रेतायुग में भगवान राम ने लंकापति रावण का वध कर अधर्म पर धर्म की स्थापना की थी. रावण भले ही एक अत्याचारी राक्षस था, लेकिन वह महादेव का परम भक्त और महाज्ञानी पंडित भी था. उसके ज्ञान के सामने बड़े-बड़े विद्वान भी घुटने टेक देते थे. चूंकि महाबलशाली रावण एक पंडित था, ऐसे में जब प्रभु श्रीराम ने लंकापति का वध किया, तो उन पर ब्रह्महत्या का दोष लग गया. इसके बाद ऋषि-मुनियों के सुझाव पर भगवान श्रीराम ने ब्रह्महत्या के पाप से मुक्ति के लिए भगवान शंकर की आराधना करने का संकल्प लिया.

    रेत से बना शिवलिंग

    प्रभु श्रीराम ने भगवान हनुमान से कैलाश जाकर शिवलिंग लाने का अनुरोध किया. अपने आराध्य की बात मानते हुए हनुमान जी कैलाश गए. भगवान श्रीराम ने समुद्र तट पर उनका बहुत देर तक इंतजार किया, लेकिन हनुमान जी को देर हो रही थी. तब समुद्र तट पर माता सीता ने स्वयं रेत की मदद से एक शिवलिंग बनाया, जिसे ‘रामलिंग’ या रामेश्वरम कहा गया.

    भगवान राम को मिला ब्रह्महत्या दोष से मुक्ति

    इसके बाद पूजा आरंभ हुई. तभी भगवान हनुमान भी शिवलिंग लेकर वहां पहुंच गए. हनुमान जी ने देखा कि पूजा शुरू हो चुकी है, तो उनका मन थोड़ा उदास हो गया कि वे देर से पहुंचे. भगवान राम ने हनुमान जी के मन की बात समझ ली. उन्होंने हनुमान जी द्वारा लाए गए शिवलिंग की भी वहीं स्थापना कर साथ में पूजा की. इस शिवलिंग को ‘हनुमदीश्वर’ कहा गया. इस तरह भगवान राम को ब्रह्महत्या के पाप से मुक्ति मिली और रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग की स्थापना हुई.

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