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    Home»छत्तीसगढ़»एनआईटी रायपुर में डेटा साइंस और इंटेलिजेंट नेटवर्क कंप्यूटिंग ICDSINC 2025 पर तीन दिवसीय प्रथम अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का हुआ शुभारंभ
    छत्तीसगढ़

    एनआईटी रायपुर में डेटा साइंस और इंटेलिजेंट नेटवर्क कंप्यूटिंग ICDSINC 2025 पर तीन दिवसीय प्रथम अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का हुआ शुभारंभ

    chhattisgarhrajya.inBy chhattisgarhrajya.inDecember 10, 2025
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    राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान रायपुर के कंप्यूटर विज्ञान एवं अभियांत्रिकी विभाग द्वारा 9 दिसंबर 2025 को प्रथम IEEE डेटा साइंस एंड इंटेलिजेंट नेटवर्क कंप्यूटिंग (ICDSINC 2025) पर आधारित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन समारोह का आयोजन किया गया। समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. जी. एस. तोमर, चेयरपर्सन, IEEE MP सेक्शन, और डॉ. सोमित्र सनाढ्य, निदेशक, C3iHUB, IIT कानपुर उपस्थित रहे। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रो. एन. वी. रमना राव, निदेशक, एनआईटी रायपुर ने शिरकत की। इसी के साथ विशेष अतिथियों में डॉ. नरेंद्र डी. लोंढे, रजिस्ट्रार, एनआईटी रायपुर, तथा डॉ. प्रदीप सिंह, चेयरमैन, ICDSINC एवं विभागाध्यक्ष (प्रभारी), सीएसई विभाग उपस्थित रहे। आयोजन समिति में प्रो. नरेश कुमार नागवानी, डॉ. आकांक्षा शराफ, डॉ. नितेश के. भारद्वाज और डॉ. मधुकृष्णा प्रियदर्शिनी शामिल हैं। सम्मेलन को ANRF, DRDO और NexTechno Gen Pvt. Ltd. द्वारा वित्तीय सहयोग प्राप्त हुआ है।।

    दीप प्रज्ज्वलन और अतिथियों के स्वागत के उपरांत, अपने स्वागत भाषण में डॉ. आकांक्षा शराफ ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का स्वागत किया, उन्होंने एआई-चालित स्वायत्त प्रणालियों की बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डाला और देश विदेश से प्राप्त अंतरराष्ट्रीय सहभागिता का उल्लेख किया।

    डॉ. प्रदीप सिंह ने आयोजन समिति की ओर से आभार व्यक्त करते हुए आधुनिक युग में डेटा के अभूतपूर्व उत्पादन पर चर्चा की। उन्होंने मेटाडेटा और मल्टीमॉडल डेटा के महत्व को रेखांकित करते हुए बताया कि सम्मेलन को 100 से अधिक उच्च-स्तरीय शोधपत्र प्राप्त हुए हैं। डॉ. नरेश नागवानी ने कार्यक्रम के सफल आयोजन की आशा व्यक्त की और युवाओं को बुनियादी शोध प्रश्नों पर कार्य करने तथा इस मंच का सार्थक उपयोग करने के लिए प्रेरित किया। डॉ. नरेंद्र डी. लोंढे ने डिजिटल तकनीकों को “डिसरप्टिव” बताते हुए कहा कि तेजी से हो रही डिजिटाइजेशन के बीच अब एआई इंजीनियरिंग प्रगति का केंद्र बन चुका है। उन्होंने ऐसे आयोजनों को जागरूकता और सहयोग बढ़ाने के लिए आवश्यक बताया।

    प्रो. एन. वी. रमना राव ने एनआईटी रायपुर में डेटा साइंस पर प्रथम अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित होने पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने ट्रैफिक प्रबंधन, हेल्थकेयर मॉनिटरिंग, फिनटेक, हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडिंग और फ्रॉड डिटेक्शन जैसे क्षेत्रों में इंटेलिजेंट सिस्टम्स के उपयोग पर प्रकाश डालते हुए गोपनीयता और सुरक्षा से जुड़े चुनौतियों का उल्लेख करते हुए इसे वर्तमान समय की आवश्यकता बताया |

    साइबर सुरक्षा एवं क्रिप्टोग्राफी विशेषज्ञ डॉ. सोमित्र सनाढ्य ने तेजी से विकसित होती एआई तकनीक के दोहरे प्रभाव पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि एआई अब स्वायत्त रूप से मल्टी-स्टेज साइबरअटैक संचालित करने में सक्षम हो रही है, जो खतरे के परिदृश्य में बड़ा बदलाव है। उन्होंने “वाइब कोडिंग” और “वाइब हैकिंग” जैसे नए विचार साझा किए, जिनमें नेचुरल लैंग्वेज निर्देशों के माध्यम से एआई सिस्टम का उपयोग कर साइबरअटैक तैयार किए जाते हैं। उन्होंने ऐसे शक्तिशाली उपकरणों की क्षमताओं और खतरों पर प्रकाश डालते हुए उन्नत सुरक्षा उपायों की आवश्यकता पर बल दिया।

    ऑनलाइन संबोधन में डॉ. जी. एस. तोमर ने अपने अनुभव साझा किए और सम्मेलन का हिस्सा बनने पर गर्व व्यक्त किया। उन्होंने सुरक्षा क्षेत्र में वर्तमान चुनौतियों पर चर्चा की और कहा कि यह सम्मेलन जर्नल की तुलना में अधिक सशक्त और संवादात्मक प्लेटफॉर्म प्रदान करते हैं। उन्होंने सामाजिक समस्याओं की पहचान करने हेतु समाज-उन्मुख आयोजनों को बढ़ावा देने की सलाह दी और भविष्य के प्रयासों के लिए पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया।

    सभी संबोधनों के पश्चात अतिथियों द्वारा स्मारिका (Souvenir Book) का विमोचन किया गया। उसके उपरांत सभी अतिथियों को मोमेंटो प्रदान किये गए। कार्यक्रम के अंत में डॉ. नितेश के. भारद्वाज ने औपचारिक धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।

    तीन दिवसीय यह सम्मेलन छात्रों और शोधकर्ताओं को उभरती प्रौद्योगिकियों के बारे में जानने, बहु-विषयी सीख को बढ़ावा देने और वास्तविक दुनिया की चुनौतियों का समाधान करने वाले प्रभावी शोध हेतु प्रेरित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

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