Close Menu
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Trending
    • ड्यूटी पर तैनात डायल-112 के एक आरक्षक पर देर रात डंडे से हमला…
    • हरियाणा-राजस्थान में लाखों में बेचते थे बच्चे,दिल्ली में बच्चा चोर गिरोह का भंडाफोड़, 20 से ज्यादा बच्चे बेचे , 12 गिरफ्तार…
    • फर्जीवाड़ा:सॉल्वर से SSC परीक्षा और मेडिकल टेस्ट दिलवाकर कॉन्स्टेबल की नौकरी हासिल की,12 दिन की ट्रेनिंग के बाद पकड़ा गया…
    • ‘लिपस्टिक फ्री कैंपस’ अभियान, पहला कॉस्मेटिक मुक्त कैंपस जिला बना कोल्लम
    • हाथों में आरती की थाली, साथ में घंटी बजाता पंडित, जम्मू कश्मीर के CM खीर भवानी मंदिर में की पूजा
    • अपने काफिले को रोका, सड़क पर खड़े लोगों से की मुलाकात, सीएम थलपति विजय का यह अंदाज
    • कर्नाटक MLC चुनाव में बीजेपी को बड़ा धक्का, दो विधायकों ने की क्रॉस वोटिंग
    • तेज रफ्तार कार से बचने के चक्कर में दो बाइकों की भीषण भिड़ंत, पूर्व सैनिक की मौत
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Chhattisgarh RajyaChhattisgarh Rajya
    Thursday, June 18
    • खानपान-सेहत
    • फीचर
    • राशिफल
    • लेख-आलेख
    • व्यापार
    • बिलासपुर
    • रायपुर
    • भिलाई
    • राजनाँदगाँव
    • कोरबा
    Chhattisgarh RajyaChhattisgarh Rajya
    Home»लेख-आलेख»12 के उत्तीर्ण में तीन प्रतिशत की गिरावट, ‘ऑनस्क्रीन मार्किंग’ पर पुनर्विचार करना चाहिए
    लेख-आलेख

    12 के उत्तीर्ण में तीन प्रतिशत की गिरावट, ‘ऑनस्क्रीन मार्किंग’ पर पुनर्विचार करना चाहिए

    chhattisgarhrajya.inBy chhattisgarhrajya.inMay 29, 2026
    Facebook Twitter WhatsApp Email Telegram
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn Pinterest Email

    13 मई को सी.बी.एस.ई. ने कक्षा 12 के परिणाम घोषित किए, जिसमें उत्तीर्ण प्रतिशत में तीन अंकों की गिरावट दर्ज की गई। यह गिरावट पिछले वर्ष के 88.39: से घटकर 85.20: हो गई है। कई छात्र पिछले वर्ष के छात्रों की तुलना में उत्तीर्ण प्रतिशत में पिछड़ गए होंगे। उत्तीर्ण प्रतिशत में यह भारी गिरावट इतनी तीव्र है कि  ‘‘इसे  इस वर्ष प्रश्नपत्र अधिक कठिन थे’’ जैसे सामान्य बहाने से टाला नहीं जा सकता।

    सी.बी.एस.ई. ने कक्षा 12 की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के लिए एक नया इंटरफेस, ऑनस्क्रीन मार्किंग (ओ.एस.एम.) सिस्टम पेश किया है, जिसकी औपचारिक घोषणा 9 फरवरी को एक विज्ञप्ति में की गई थी। इस प्रणाली के तहत, भौतिक उत्तर पुस्तिकाओं को स्कैन किया जाएगा, एक सुरक्षित डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपलोड किया जाएगा और मूल्यांकनकत्र्ताओं को सौंपा जाएगा जो कागज के बजाय कम्प्यूटर पर उनका मूल्यांकन कर सकेंगे। इस कदम को आधुनिकीकरण के प्रयास के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जिससे स्कोरिंग प्रक्रिया तेज, अधिक कुशल और अधिक पारदर्शी बनेगी। हममें से अधिकतर लोग मानते हैं कि पढऩा तो पढऩा ही होता है, चाहे वह छपे हुए पन्ने पर हों या डिजिटल स्क्रीन पर। यह धारणा किसी ट्वीट या समाचार शीर्षक के लिए तो तर्कसंगत लग सकती है। लेकिन जैसे ही आप कोई लंबा निबंध पढऩा शुरू करते हैं, यह धारणा गलत साबित होने लगती है, क्योंकि इसमें विषयवस्तु के लिए आपको तर्क को समझना, एक साथ कई बिंदुओं को ध्यान में रखना और गुणवत्ता के बारे में समग्र निर्णय लेना आवश्यक होता है।

    कक्षा 12 के मूल्यांकनकत्र्ता से ठीक यही काम करने के लिए कहा जाता है और वह भी सैंकड़ों बार, समय के दबाव में। ब्रिटिश जर्नल ऑफ एजुकेशनल टैक्नोलॉजी में 2010 में प्रकाशित एक अध्ययन में यह जांच की गई कि क्या विस्तारित निबंध उत्तरपत्रों का मूल्यांकन करते समय अंकन विधि विश्वसनीयता को प्रभावित करती है और पाया गया कि यद्यपि दोनों तरीकों में मार्कर की समग्र विश्वसनीयता काफी हद तक समान थी लेकिन कागज पर अंकन की तुलना में ऑनस्क्रीन अंकन में उल्लेखनीय रूप से अधिक भिन्नता थी। उस अध्ययन में केवल बारह परीक्षकों ने अपेक्षाकृत छोटे निबंधों की जांच की थी, लेकिन सी.बी.एस.ई. प्रणाली में लाखों उत्तर पुस्तिकाएं शामिल होती हैं, जिनका मूल्यांकन हजारों शिक्षकों द्वारा किया जाता है, जिनमें से कई शिक्षक मूल्यांकन के लिए इस इंटरफेस का पहली बार सामना कर रहे होंगे।

    हस्तलिखित उत्तरों को पढऩा काफी हद तक स्कैन की गुणवत्ता पर निर्भर करता है। एक लिखित पांडुलिपि जो अपने मूल रूप में पूरी तरह से पढऩे योग्य है, स्क्रीन पर एक धुंधली, अस्पष्ट छवि बन सकती है जिससे परीक्षक के लिए निष्पक्ष रूप से पढऩा मुश्किल हो जाता है, निष्पक्ष अंक देना तो दूर की बात है। स्क्रीन से होने वाली थकान भी एक प्रमुख कारण है। साथ ही, नए इंटरफेस को समझने और इस्तेमाल करने में लगने वाला मानसिक बोझ भी एक अहम कारक है।

    इस प्रणाली को और अधिक लागू करने से पहले, सी.बी.एस.ई. को जो करना चाहिए था, और जो वह अभी भी कर सकता है, वह है एक उचित मूल्यांकन करना। उत्तर पुस्तिकाओं का एक सांख्यिकीय रूप से महत्वपूर्ण नमूना लें। एक समूह को कागज पर और दूसरे समूह को स्क्रीन पर मूल्यांकन करने दें। न केवल अंतिम अंकों की तुलना करें, बल्कि अंकों के वितरण, असामान्य अंकों की आवृत्ति और उदार और सख्त मूल्यांकनकर्ताओं के बीच के अंतर की भी तुलना करें।

    इस तरह के अध्ययन से आपको पता चल जाएगा कि सिस्टम इच्छानुसार काम कर रहा है या नहीं। जिस वर्ष नई मूल्यांकन प्रणाली लागू की गई, उसी वर्ष उत्तीर्ण होने की दर में तीन प्रतिशत अंकों की गिरावट आना, कारण, कार्य संबंध का प्रमाण नहीं है। इसमें अन्य कारक भी शामिल हैं। परीक्षा की कठिनाई मायने रखती है। छात्रों की तैयारी मायने रखती है। लाखों युवाओं का शैक्षणिक भविष्य इन अंकों से जुड़ा है, क्योंकि कक्षा 12 की बोर्ड परीक्षा का स्कोर कॉलेज में प्रवेश और छात्रवृत्ति पात्रता का द्वार है, जो साधारण पृष्ठभूमि के छात्रों के पूरे जीवन पथ को आकार देगा। बोर्ड का यह दायित्व है कि वह पूरी निष्ठा और पारदर्शिता के साथ यह सिद्ध करे कि उसकी मूल्यांकन प्रणाली निष्पक्ष परिणाम दे रही है।-जॉन जेवियर

    Share. Facebook Twitter Telegram WhatsApp Email
    chhattisgarhrajya.in
    chhattisgarhrajya.in
    • Website

    Related Posts

    बेमानी होतीं डिग्रियां…

    June 18, 2026

    नारी शक्ति का दशक, विकसित भारत का उत्कर्ष

    June 18, 2026

    भारत से शिकागो और फिर हुगली तक : स्वामी विवेकानंद के योग संदेश की वैश्विक यात्रा

    June 18, 2026

    Address - Gayatri Nagar, Near Ashirwad Hospital, Danganiya, Raipur C.G.

    Chandra Bhushan Verma
    Owner & Editor
    Mobile - 9826237000 Email - chhattisgarhrajya.in@gmail.com
    Facebook X (Twitter) Instagram Pinterest
    • About Us
    • Contact Us
    • Privacy Policy
    • Terms and Conditions
    • Disclaimer
    © 2026 ThemeSphere. Designed by ThemeSphere.

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.