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    Home»छत्तीसगढ़»3% डीआर पर चुप्पी क्यों? मध्यप्रदेश की सहमति के बाद भी आदेश लंबित—पेंशनरों के साथ खुला अन्याय”
    छत्तीसगढ़

    3% डीआर पर चुप्पी क्यों? मध्यप्रदेश की सहमति के बाद भी आदेश लंबित—पेंशनरों के साथ खुला अन्याय”

    chhattisgarhrajya.inBy chhattisgarhrajya.inApril 1, 2026
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    रायपुर, भारतीय राज्य पेंशनर्स महासंघ, छत्तीसगढ़ प्रदेश के प्रांताध्यक्ष वीरेन्द्र नामदेव ने राज्य सरकार पर तीखा प्रहार करते हुए पूछा है कि जब मध्यप्रदेश शासन से सहमति मिले 10 दिन बीत चुके हैं, तब भी पेंशनरों को 3% महंगाई राहत (डीआर) का आदेश जारी करने में आखिर किस बात का इंतजार किया जा रहा है? उन्होंने कहा कि यह केवल प्रशासनिक देरी नहीं, बल्कि पेंशनरों के साथ स्पष्ट भेदभाव और अन्याय है। एक ओर कर्मचारियों को 3% महंगाई भत्ता (डीए) का आदेश 12 जनवरी 2026 को तत्काल जारी कर दिया जाता है, वहीं पेंशनरों को अनावश्यक रूप से प्रतीक्षा में रखा जाना सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।

    महासंघ ने स्पष्ट किया कि पेंशनरों को डीआर देने हेतु 9 फरवरी 2026 को प्रस्ताव मध्यप्रदेश शासन को भेजा गया था, जिस पर 23 मार्च 2026 को मध्यप्रदेश कैबिनेट द्वारा सहमति प्रदान कर दी गई है। मध्यप्रदेश राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 2000 की धारा 49(6) के अंतर्गत आवश्यक प्रक्रिया पूर्ण हो चुकी है, इसके बावजूद आदेश जारी न होना असमझ और अस्वीकार्य है। महासंघ ने यह भी आरोप लगाया कि पेंशनरों के साथ लगातार उपेक्षा की जा रही है। 81 माह का लंबित डीआर एरियर अब तक नहीं दिया गया है, जिससे लाखों पेंशनरों में गहरा आक्रोश व्याप्त है।

    संयुक्त रूप से उठी जोरदार मांग

    महासंघ के प्रदेश पदाधिकारी क्रमशः
    वीरेन्द्र नामदेव (प्रांताध्यक्ष), जे.पी. मिश्रा (कार्यकारी प्रांताध्यक्ष), श्री मति द्रौपदी यादव (प्रदेश उपाध्यक्ष),अनिल गोल्हानी (महामंत्री), टी.पी. सिंह (प्रदेश संगठन मंत्री), बी.एस. दसमेर (कोषाध्यक्ष)

    संभागीय अध्यक्ष
    प्रवीण कुमार त्रिवेदी (रायपुर), राजेश कश्यप (बिलासपुर), गुरुचरण सिंह (अंबिकापुर), आर.एन. ताटी (जगदलपुर)

    प्रकोष्ठ संयोजक
    सुरेश मिश्रा (केंद्रीय सेवानिवृत अधिकारी कर्मचारी प्रकोष्ठ, रायपुर), अनिल पाठक (सेवानिवृत दैनिक वेतनभोगी/कार्यभारित प्रकोष्ठ, रायपुर) लता चावड़ा, प्रदेश संयोजक , सेवानिवृत महिला प्रकोष्ठ

    तथा जिला अध्यक्ष क्रमशः
    खोड़स राम कश्यप (बलौदाबाजार), आर.जी. बोहरे (रायपुर), आई.सी. श्रीवास्तव (राजनांदगांव), राकेश जैन (बिलासपुर), परमेश्वर स्वर्णकार (जांजगीर-चांपा), रमेश नंदे (जशपुर), अभय शंकर गौराहा (रायगढ़), देवनारायण साहू (सारंगढ़), एम.एल. यादव (कोरबा), ओ.पी. भट्ट (कांकेर), आर.डी. झाड़ी (बीजापुर), एस.एन. देहारी (नारायणपुर), एस.के. धातोड़े (कोंडागांव), रूपकुमार झाड़ी (दंतेवाड़ा), शेख कासिमुद्दीन (सुकमा), प्रेमचंद गुप्ता (वैकुंठपुर), माणिक चंद्र (अंबिकापुर), राजेन्द्र पटेल (बलरामपुर), संतोष ठाकुर (सूरजपुर), आर.ए. शर्मा (गौरेला-पेंड्रा-मरवाही), सतीश उपाध्याय (मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर), हरि प्रसाद मिश्रा (सक्ति), भैया लाल परिहार (मुंगेली), यवन कुमार डिंडोरे (बेमेतरा), रिखीराम साहू (महासमुंद), लखन लाल साहू (गरियाबंद), बी के वर्मा (दुर्ग), रामेंद्र तिवारी (मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी), प्रकाश गुप्ता (कबीरधाम), देवदत्त दुबे(खैरागढ़-छुईखदान-गंडई), अश्वनी नायक (डोंगरगढ़), अनूपनाथ योगी (आरंग) ने संयुक्त रूप से सरकार से कड़ी मांग की है कि पेंशनरों के लिए 3% डीआर का आदेश तत्काल जारी किया जाए। 81 माह के लंबित डीआर एरियर के भुगतान पर स्पष्ट निर्णय लिया जाए |

    चेतावनी भी दी
    महासंघ ने दो टूक कहा है कि यदि अब भी सरकार ने शीघ्र निर्णय नहीं लिया, तो पेंशनर समुदाय को आंदोलन की राह अपनाने के लिए बाध्य होना पड़ेगा, जिसकी सम्पूर्ण जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

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