Close Menu
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Trending
    • विधानसभा चुनाव 2027 के लिए कांग्रेस की Gen Z और युवा प्रत्याशी मैदान में उतारने की तैयारी
    • 13 साल अमेरिका में रहने के बाद भारत लौटी महिला ने बताया भारत लौटने का कारण
    • श्रमिक परिवारों के बच्चे आगे बढ़ेंगे, तभी विकसित छत्तीसगढ़ और विकसित भारत का सपना होगा पूरा
    • सर्पदंश से 25 वर्षीय युवती की दर्दनाक मौत
    • शक के चलते पिता ने दोस्त संग मिलकर की बेटी की हत्या, दोनों गिरफ्तार
    • मिस यूनिवर्स इंडिया 2026 के ग्रैंड फिनाले में केरल की 19 वर्षीय काजिया लिज मेजो ने शानदार जीत दर्ज कर राष्ट्रीय ताज कर लिया अपने नाम
    • सेना के सम्मान में राखी का धागा, नवा रायपुर के पोस्टकार्ड पर विद्यार्थियों ने लिखे भावपूर्ण संदेश
    • धान की फसल में कीट प्रकोप से बचाव के लिए किसान रहें सतर्क
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Chhattisgarh RajyaChhattisgarh Rajya
    Tuesday, August 25
    • खानपान-सेहत
    • फीचर
    • राशिफल
    • लेख-आलेख
    • व्यापार
    • बिलासपुर
    • रायपुर
    • भिलाई
    • राजनाँदगाँव
    • कोरबा
    Chhattisgarh RajyaChhattisgarh Rajya
    Home»संपादकीय»क्या महंगी चीनी आयात का कारण ?
    संपादकीय

    क्या महंगी चीनी आयात का कारण ?

    chhattisgarhrajya.inBy chhattisgarhrajya.inAugust 24, 2026
    Facebook Twitter WhatsApp Email Telegram
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn Pinterest Email

    भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चीनी उत्पादक, निर्यातक और खपत वाला देश है। उससे आगे ब्राजील ही है। एक अच्छे साल और अच्छी फसल के मद्देनजर भारत औसतन 70 लाख टन चीनी निर्यात करता रहा है, लेकिन 280-285 लाख टन की घरेलू खपत को सुनिश्चित करने के बाद ही निर्यात किया जाता है। इस साल भी तमाम स्थितियों के बाद 41 लाख टन से अधिक चीनी ‘अतिरिक्त भंडारण’ में है, फिर भी बीते गुरुवार, 20 अगस्त, को 10 लाख टन कच्ची चीनी आयात करने की अनुमति सरकार ने दी है। बेशक यह चीनी शुल्क-मुक्त होगी। आयात की यह नौबत 10 साल के बाद आई है। मोदी सरकार ने 30 सितंबर, 2026 तक सभी तरह की चीनी के निर्यात पर पाबंदी थोप रखी है। दरअसल मई के बाद जब चीनी मिलों के बड़े व्यापारी और एसोसिएशन के पदाधिकारी प्रधानमंत्री मोदी और कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान से मिले थे, तो उन्होंने दावा किया था कि इस साल 343.5 लाख टन चीनी का उत्पादन संभव है, लिहाजा निर्यात खोल दिया जाए। सरकार ने उनके आंकड़ों पर भरोसा किया और निर्यात खोल दिया, लेकिन जब हकीकत खुलने लगी, तो उत्पादन 279 लाख टन पर आकर ठहर गया, जबकि देश में चीनी की खपत 280-285 लाख टन आंकी गई है। नतीजा यह हुआ कि जो चीनी 21 जुलाई को करीब 45 रुपए प्रति किलो बिक रही थी, वह 31 जुलाई को उछल कर 50 रुपए हो गई और बीते शुक्रवार, 21 अगस्त, को 65 रुपए चीनी का भाव हो गया। एक ही महीने में चीनी 20 रुपए महंगी….! स्थितियों को भांपते हुए बड़े व्यापारियों, थोक विक्रेता, थोक के औद्योगिक उपभोक्ताओं ने जुलाई से पहले ही चीनी की जमाखोरी शुरू कर दी, ताकि त्योहारों के मौसम में अधिक दामों पर चीनी बेचकर मुनाफे कमाए जा सकें। अगस्त में कई चीनी मिलों ने बिक्री ही रोक दी। वे भी मुनाफाखोरी, कालाबाजारी की जमात में खड़ी हो गईं। अब 20 अक्तूबर को दशहरा है और 8 नवंबर को दिवाली है। भारत के दोनों ही राष्ट्रीय त्योहार हैं, लेकिन उनसे पहले ही चीनी की मिठास ‘कड़वी’ हो गई है।

    एथेनॉल को ‘खलनायक’ बनाया जा रहा है, जो सरासर गलत है। हालांकि हम ई-20 नीति के पक्षधर नहीं हैं, क्योंकि भारत सरकार तमाम पारदर्शी जवाब नहीं दे पाई है। ई-20 का देश में जबरदस्त विरोध किया जा रहा है। नवंबर, 2025 से जुलाई, 2026 के दौरान तेल कंपनियों को 810.67 करोड़ लीटर एथेनॉल सप्लाई किया गया है। उसमें से 259.24 करोड़ लीटर, अर्थात 32 फीसदी, गन्ने से तैयार किया गया है, जबकि शेष 68 फीसदी एथेनॉल मक्का, शीरे, भारतीय खाद्य निगम के चावल और टूटे या सड़े-खराब अनाज से बनाया गया है। पहले 34 लाख टन चीनी को एथेनॉल बनाने के लिए तय किया जाना था, लेकिन उत्पादन कम होने के कारण 30 लाख टन चीनी एथेनॉल बनाने को मुहैया कराई गई। उसके बावजूद भंडारों में चीनी उपलब्ध थी। तो सवाल है कि चीनी का आयात क्यों किया जा रहा है? चीनी खुदरा बाजार में महंगी क्यों होती जा रही है? क्या जमाखोरों, मुनाफाखोरों, बिचौलिया ताकतों और वर्चस्ववादी मिलों पर सरकार का कोई नियंत्रण नहीं है, क्योंकि ये ‘कालाबाजारी’ बार-बार उभर कर सामने आते हैं? इस खेल में बेचारा किसान तो गायब है। खुद भारत सरकार मानती है कि किसान की औसत आय 10,000 रुपए माहवार से भी कम है। तो महंगी चीनी के मुनाफे किसकी जेब में गए? जाहिर है कि जमाखोर दलाल ‘अमीर’ बनते रहे। दरअसल हम चीनी की कमी और महंगाई को न तो खाद्य-संकट मानते हैं और न ही यह राष्ट्रीय अराजकता का कारण बन सकती है। अलबत्ता मल्लिकार्जुन खडग़े और अखिलेश यादव सरीखे विपक्षी नेता ‘राजनीति’ जरूर करेंगे। बहरहाल विशेषज्ञों का मानना है कि महाराष्ट्र, कर्नाटक, गुजरात में गन्ने की फसल, बीते साल सितंबर-अक्तूबर में, अधिक बारिश से प्रभावित हुई थी। नतीजतन उत्पादन कम हुआ और भंडारण 9 साल के सबसे निचले स्तर पर आ गया। इस साल भी जून में बहुत कम बारिश हुई। खासकर महाराष्ट्र और कर्नाटक में। मॉनसून भी असंतुलित रहा। इससे साफ है कि 2026-27 में भी गन्ने के खेत, चीनी उत्पादन निश्चित रूप से प्रभावित होंगे। अनुमान है कि आने वाले साल में 33 लाख टन चीनी उत्पादन कम हो सकता है। क्या आयात जारी रखना पड़ेगा? अगर महंगाई की बात करें तो इससे आम आदमी परेशान है। हर चीज महंगी होती जा रही है, जबकि आय में वृद्धि नहीं हो पा रही है। गरीब लोगों के साथ-साथ मध्यम वर्ग को भी लगता है कि महंगाई बढ़ रही है और उसे नीचे लाने के लिए किए जा रहे प्रयास नाकाफी हैं। मोदी सरकार का दायित्व है कि वह महंगाई को बढऩे से रोके। ऐसी अवस्था में जबकि देश में बेरोजगारी भी है, आम आदमी भला महंगाई से कैसे निपट पाएगा। जनकल्याण के लिए सरकार को ठोस उपाय करने होंगे।

    Share. Facebook Twitter Telegram WhatsApp Email
    chhattisgarhrajya.in
    chhattisgarhrajya.in
    • Website

    Related Posts

    ‘नशा छुड़ाने के नाम पर देश में चल रहे’ अवैध अड्डों में उत्पीड़न भी जारी!

    August 23, 2026

    केंद्रीय मंत्री अब विश्वविद्यालयों में…

    August 22, 2026

    ईरान बनेगा ‘जापान’!

    August 21, 2026

    Address - Gayatri Nagar, Near Ashirwad Hospital, Danganiya, Raipur C.G.

    Chandra Bhushan Verma
    Owner & Editor
    Mobile - 9826237000 Email - chhattisgarhrajya.in@gmail.com
    Facebook X (Twitter) Instagram Pinterest
    • About Us
    • Contact Us
    • Privacy Policy
    • Terms and Conditions
    • Disclaimer
    © 2026 ThemeSphere. Designed by ThemeSphere.

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.