मुंबई: बॉम्बे हाईकोर्ट ने मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन (MCA) के किचन में अस्वच्छता और साफ-सफाई के नियमों के उल्लंघन पर टिप्पणी की है। कोर्ट ने मजाकिया लहजे में पूछा कि क्या खिलाड़ियों को पता है कि वे ‘नॉन-वेज चाय’ पी रहे हैं? यह टिप्पणी कोर्ट ने एमसीए की रसोई में मक्खियां और कॉकरोच मिलने के खुलासे पर की है। कोर्ट ने एफडीए को 27 अगस्त को नए सिरे से MCA के 5 किचन का निरीक्षण करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 29 अगस्त को होगी।
जांच में मिली थी गंदगी
एक्टिंग चीफ जस्टिस रविंद्र घुघे और जस्टिस गौतम अनखड़ की बेंच यह निर्देश एमसीए की याचिका पर सुनवाई के बाद दिया। याचिका में बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स स्थित एमसीए के परिसर में चलने वाले पांच रेस्टोरेंट के लाइसेंस सस्पेंड करने के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) के फैसले को चुनौती दी गई है। हाल ही में FDA की जांच में इन रेस्टोरेंट की रसोई में कॉकरोच और मक्खियों की भरमार मिली थी। फर्श गंदा पाया गया था।
एफडीए कर सकत है लाइसेंस निलंबित
एफसीए की ओर से सीनियर ऐडवोकेट विक्रम ननकानी ने कहा कि लाइसेंस निलंबित करने से पहले FDA को सुधार नोटिस जारी करना चाहिए था, ताकि खामियों को दूर करने का मौका मिल सके। किचन बंद होने के कारण मैदान पर आने वाले क्रिकेटरों को चाय तक उपलब्ध नहीं कराई जा पा रही है। इस पर बेंच ने कहा कि यदि निरीक्षण में साफ सफाई के नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो एफडीए तत्काल लाइसेंस निलंबित कर सकता है। हालांकि ऐसे मामलों में पहले सुधार नोटिस देना जरूरी नहीं है। रसोई में मक्खियों और कॉकरोच का होना चिंता का विषय है। हालांकि, अदालत ने एमसीए को खिलाड़ियों के लिए चाय और कॉफी उपलब्ध कराने के लिए वेंडिंग मशीन लगाने की अनुमति दे दी।
हाईकोर्ट ने एफडीए की तारीफ की
बेंच ने एफडीए की कार्रवाई की सराहना करते हुए कहा कि खाद्य सुरक्षा और स्वच्छता सुनिश्चित करने के लिए की जा रही कार्रवाई प्रशंसनीय है। भविष्य में भी ऐसी कार्रवाई होनी चाहिए। बेंच ने स्पष्ट किया कि यदि किसी रेस्टोरेंट ने निरीक्षण में सामने आई सभी कमियों को दूर कर दिया है, तो लाइसेंस सस्पेंड करने का आदेश अनिश्चितकाल तक कायम नहीं रखा जा सकता। एफडीए का उद्देश्य कमियों को दूर कराना है। जब वह उद्देश्य पूरा हो जाए तो लाइसेंस सस्पेंशन आदेश वापस लेने पर तत्काल विचार हो।

